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दोहे ... एक भाव कई रूप ... नर से नारी माँगती ..

दोहे ... एक भाव कई रूप ...
नर से नारी माँगती ..

नर से नारी माँगती, बस थोड़ा सा प्यार।
थोड़े से उस प्यार पर, तन-मन देती वार।।

नर से नारी माँगती , सपनों का शृंगार।
नारी तन का नर अधम ,करता फिर व्यापार।।

नर से नारी माँगती , जीवन भर का साथ।
ले हाथों में हाथ वो, माने उसको नाथ।।

नर से नारी माँगती,बाहों का संसार।
बन जाता फिर प्रेम वो, माथे का शृंगार ।।

नर से नारी माँगती ,माधव जैसा प्यार।
बन अधरों की बाँसुरी , कर सोलह शृंगार।।

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 933

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Comment by Sushil Sarna on April 5, 2019 at 4:28pm

आदरणीय surender insan जी सृजन पर आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by surender insan on April 4, 2019 at 5:21pm

वाह वाह वाह बहुत अच्छे दोहे कहे है।

बधाई हो।

Comment by Sushil Sarna on April 4, 2019 at 4:26pm

आदरणीय Tasdiq Ahmed Khan जी सृजन पर आपकी मधुर प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on April 4, 2019 at 4:26pm

आदरणीय  narendrasinh chauhan  जी सृजन पर आपकी मधुर प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on April 4, 2019 at 4:25pm

आदरणीय Hariom Shrivastava  जी सृजन पर आपकी मधुर प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on April 4, 2019 at 4:25pm

आदरणीय Samar kabeer जी सृजन पर आपकी मधुर प्रशंसा का दिल से आभार।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on April 2, 2019 at 5:18pm

जनाब भाई सुशील सरना साहिब, सुन्दर दोहे हुए हैं मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं l 

Comment by narendrasinh chauhan on March 29, 2019 at 3:07pm

सर , खूब सुन्दर रचना। .प्रणाम 

Comment by Hariom Shrivastava on March 29, 2019 at 12:51pm

वाहह,वाहह,बहुत सुंदर दोहे

Comment by Samar kabeer on March 28, 2019 at 11:46am

जनाब सुशील सरना जी आदाब,अच्छे दोहे रचे आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

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