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भोजपुरी साहित्य Discussions (249)

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गजल (भोजपुरी) // -सौरभ

१२२ १२२ १२२ १२२ रटौले रटल बा नियम का ह, मत का ? बुझाइल कबो ना सही का, गलत का ! सियासत के सोझगर गनितओ बुझाई गुना-भाग छोड़ीं, बताईं जुगत का ?…

Started by Saurabh Pandey

5 Feb 25, 2021
Reply by Aazi Tamaam

कवनो देश नाहीं सुघ्घर हिंदुस्तान से (पैरोडी)

सबसे सुंदर लुभावन पावन, इ बा मनभावन, कि सगरो जहान से कौनो देश नाही सुघ्घर हिंदुस्तान से उत्तर में देखा हो, हिमालय जेकर माथ बा दक्षिण में फ…

Started by आशीष यादव

0 Feb 8, 2021

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पाँच गो फरकल दोहा // --सौरभ

लबरहिया के बात का, बकरी वाली फोंsह सगर चरित्तर नासि के, छछनो कढ़ली घोंsह    कुकुर जमाती राति-दिन, भूँक बतासे भूँक भइल असामी मोट, भा, भालू…

Started by Saurabh Pandey

0 Oct 7, 2020

कइसे होई गंगा पार

जिनिगी भर बस पाप कमइला कइसे करबा गंगा पार जुलुम सहे के आदत सभके के थामी हाथे हथियार केहू नाही बनी सहाई बुझबा जब खुद के लाचार काम न कर…

Started by आशीष यादव

5 Aug 19, 2020
Reply by आशीष यादव

होली -गीत

अइसन मौसम आइल बा मनवा अब फगुआइल बा।1 खिल रहल बा कली गुलाबी भौंरा खूब अगराइल बा।2 टहले के मिलल तब निमन नाहीं तब गभुआइल बा।3 कर रहल मनुहार गु…

Started by Manan Kumar singh

0 Dec 19, 2017

भोजपुरी

हमनी के भोजपुरी भाषा के संबंध में एतने जानी ले जा कि एकरा अंदर एतना क्षमता बा कि उ कवनो विषय या विधा पर आपन विचार व्यक्त करें में तनिकांे क…

Started by indravidyavachaspatitiwari

0 Oct 30, 2017

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भोजपुरी नवगीत : फेर भइल बा चाक्का जाम // -सौरभ

फेर भइल बा चाक्का-जाम दलित-गरीबन के उकसावत !   बचवन के मन में छटपट्टी कोरा आँखिन में अचकच बा बूढ़ आँखि के सोझा सबकुछबिला रहल, झुठहीं मचमच बा…

Started by Saurabh Pandey

0 Jul 19, 2017

भोजपुरी गजल -उठि के नारी सक्ति सकार कइलs

फाइलातुन फाइलुन फऊल फेलुन  कहँवा से आइके जगार कइल जिनगी में साँइ से उजार कइल जिनगी से अइसन करार कइल सिनुरा वीरांगना पुछार कइल पँउआ बढ़त…

Started by PRAMOD SRIVASTAVA

5 Oct 25, 2016
Reply by Saurabh Pandey

भोजपुरी लधुकथा -नउटंकी।

"कइसन कइसन नउटंकी करेलीसन"  असपताल मां दरद के मारे कँहरत आ छटपटात उछलत मेहरारू के देखि बोली बोलली भउजी। "जवना के नउटंकी कहतारू नू ईहो भागिय…

Started by PRAMOD SRIVASTAVA

2 Oct 12, 2016
Reply by PRAMOD SRIVASTAVA

अकिल अझुराइल

आम असो आइल बा  खूब बउराइल बा  काँच बने चटनी त  सतुआ घोराइल बा  मावस ना बारी मा  बिजुरी बराइल बा  हाथ, हाथी, सायकिल  सभे अगराइल बा  जाति…

Started by PRAMOD SRIVASTAVA

6 Oct 4, 2016
Reply by PRAMOD SRIVASTAVA

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Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
6 hours ago

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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Saturday
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चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
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Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Jul 14
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

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Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

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Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10

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