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धार्मिक साहित्य Discussions (167)

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धर्म एक बस अग्नि धर्म है/जो आवे सो क्षार|

आज पहली बार मैंने इस मंच पर भी अपनी प्रवृत्ति के अनुरूप चर्चा करने का विचार किया है|वर्तमान समय में सनातन मूल्यों में स्खलन चरम पर है|वैदिक…

Started by मनोज कुमार सिंह 'मयंक'

6 Apr 10, 2012
Reply by मनोज कुमार सिंह 'मयंक'

लंका दहन किसके द्वारा

अयोध्या में जानकी घाट मंदिर के श्री वेदान्तीजी महाराज द्वारा सद्गुरु भवन,जयपुर में हनुमत कथा में दिए प्रवर्चन के अनुसार बजरंग बलि हनुमानजी …

Started by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला

0 Mar 30, 2012

तुमको शत शत नमन मेरा ,

सब के दुखड़े हरने वाले , तुमको शत शत नमन मेरा , तू हैं सब कुछ जानने वाला , नहीं देखता दर्द क्यों मेरा, सब के दुखड़े हरने वाले , तुमको शत शत…

Started by Rash Bihari Ravi

0 Mar 29, 2012

सदस्य कार्यकारिणी

ॐ भूर भुवः स्वः ||

जैसे अंखियन नीर बिनु,जैसे धेनु क्षीर बिनु  जैसे भोजन खीर बिनु,जैसे होली अबीर बिनु  तैसे जीवन धीर बिनु || जैसे धरणी मेह बिनु ,जैसे मानव गेह…

Started by rajesh kumari

0 Mar 14, 2012

चहल्लम शरीफ के मुबारक मौके पर नजर हजरत इमाम हुसैन

साक़ी भी है हुसैन के कौसर हुसैन का ! मोहताज है हर एक समंदर हुसैन का !! दोशे मुबरिका पे बिठाते थे खुद हुज़ूर ! रखते थे कितना ध्यान पयम्बर ह…

Started by Hilal Badayuni

1 Jan 14, 2012
Reply by Saurabh Pandey

मै देता हूँ दुःख को बधाई |

यह सच है कि दुःख में इंसान भगवान् को सच्चे मन से याद करता है इसीलिए द्रोपदी ने एक बार कृष्ण से अपने लिए दुःख का वरदान माँगा था ताकि हे कृष्…

Started by Mukesh Kumar Saxena

0 Jan 5, 2012

अंतर्घट

महोदय यह लेख मेरे अपने ब्लॉग अंतर्घट पर प्रकाशित है. मगर क्योंकि एक तो यह लेख तथ्यपरक है और दूसरे यह लेख मेरे आगे के लेखों में भूमिका का क…

Started by Mukesh Kumar Saxena

0 Jan 5, 2012

संत वाणी 1 ( श्री रामकृष्ण परमहंस )

संत वाणी  अवतार या अवतार के अंश को ईश्वरकोटि कहते हैं और साधारण लोगों को जीवकोटि ! जो जीवकोटि के हैं, वे साधनाएँ करके ईश्वर का लाभ प्राप्त…

Started by Rash Bihari Ravi

3 Sep 15, 2011
Reply by Saurabh Pandey

विनय करूँ प्रभु श्री गणेश जी ! ..संजीव 'सलिल'

ॐ गणेश भजन : --संजीव 'सलिल विनय करूँ प्रभु श्री गणेश जी! विघ्न करो सब दूर हमारे... * सत-शिव-सुन्दर हम रच पायें, निज वाणी से नित सच गायें. अ…

Started by sanjiv verma 'salil'

0 Sep 2, 2011

प्रभु नीलकंठ त्रिनेत्र धारी आपको प्रणाम हैं ,

प्रभु नीलकंठ त्रिनेत्र धारी आपको प्रणाम हैं , रक्षा कर संघार कर जो कर ये तेरा काम हैं , प्रभु ... सबको अमृत देने वाले विष लेते आप ही , झोप…

Started by Rash Bihari Ravi

2 Sep 1, 2011
Reply by Rash Bihari Ravi

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"आदरणीय Jaihind Raipuri जी,  अच्छी ग़ज़ल हुई। बधाई स्वीकार करें। /आयी तन्हाई शब ए…"
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"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
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तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . रिश्ते
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
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दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर…See More
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
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"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
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Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-130 (विषय मुक्त)
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