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धार्मिक साहित्य Discussions (167)

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भजन.....हे! बजरंगी

भजन.....हे! बजरंगी हे! बजरंगी दया तुम्हारी, क्यों कर मुझ पर नही हुई।मैं आफत-विपदा का मारा, मेरी गल्ती कहॉं हुई।। सुबह सबेरे मैं नित उठ कर…

Started by केवल प्रसाद 'सत्यम'

0 Apr 1, 2014

सीतान्वेषी राम

छंद  -   मालिनीपरिभाषा -इस छंद के प्रत्येक  चरण में  १५ वर्ण  आठवे तथा  फिर सातवे वर्ण  पर विराम देकर होते हैं   i  प्रत्येक  चरण में दो नग…

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

1 Mar 30, 2014
Reply by रमेश कुमार चौहान

'मामेकं शरणम् व्रज '

                छुधित  गरुण ने डैने फैलाये  I  एक लम्बी उड़ान भरी  I  नीचे हिमालय  का नीरव साम्राज्य था  I  अचानक उन्हें एक भयानक  भुजंग  दि…

Started by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव

1 Nov 26, 2013
Reply by annapurna bajpai

नन्द लाला नन्द लाला

नन्द लाला  नन्द लाला नन्द लाला  नन्द लाला  नन्द लाला नन्द लाला ।जय हो आके दर्शन हमको अब दे दो दीन दयाला । जब से तुम हो गये मथुरा के महारा…

Started by बसंत नेमा

0 Nov 22, 2013

अनुरोध (कविता) अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव

                                                                           हेलो- हाय का अर्थ नहीं,  फिर भी कहते हैं हाय- हेलो। फोन,  मोबाइल…

Started by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव

0 Nov 11, 2013

" टेसू..उत्सव" लेख

मध्यप्रदेश के नर्मदांचल क्षेत्र, जो की पूर्वी निमाड़ व  मालवा से लगा हुआ है, में नवरात्रि के पश्चात्, विजयादशमी से लेकर शरद-पूर्णिमा तक एक उ…

Started by जितेन्द्र पस्टारिया

8 Oct 18, 2013
Reply by जितेन्द्र पस्टारिया

तू भगवती शारदे

हरिगीतिका छंद (चतुष्पदी मात्रिक छंद16,12 पर यति 5वी,12वी 19वी एवं 26वी मात्रा लघु पदांत गुरू) हे श्वेत हंस विराजनी मां, तू भगवती शारदे । त…

Started by रमेश कुमार चौहान

0 Oct 14, 2013

“ काली महिमा ”

“ काली महिमा ”    हे भवानी जय माँ दुर्गा हे काली अब दया करो । जगत जननी ममतामयी माँ पालनहारी कृपा करो ।। चारो तरफ है घोर अन्धेरा माँ अब तु…

Started by बसंत नेमा

0 Oct 9, 2013

‘दुर्गा सप्तश्लोकी स्तोत्र’ समस्त ओ बी ओ परिवार को नवरात्रि की बहुत बहुत शुभकामनाएं

‘दुर्गा सप्तश्लोकी स्तोत्र’ को हिंदी में छंदबद्ध कर अनुवाद करने का प्रयास किया है माँ इस नादान की त्रुटियों को क्षमा करें जय हो माँ तुम्हार…

Started by SANDEEP KUMAR PATEL

2 Oct 8, 2013
Reply by SANDEEP KUMAR PATEL

माई तीजा अखंड सौभाग्य द्यो हो माँ!‎

माई तीजा अखंड सौभाग्य द्यो हो माँ!‎माई तीजा अखंड सौभाग्य द्यो हो माँ!‎खाऊँ नही अन्न, जल पीऊँ भी न ‎निराहार काटूँ  घड़ियां!‎माई तीजा अखंड सौभ…

Started by वेदिका

24 Oct 6, 2013
Reply by SANDEEP KUMAR PATEL

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"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
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तब मनुज देवता हो गया जान लो,- लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२१२/२१२/२१२/२१२**अर्थ जो प्रेम का पढ़ सके आदमीएक उन्नत समय गढ़ सके आदमी।१।*आदमीयत जहाँ खूब महफूज होएक…See More
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"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहै हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
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दोहा पंचक. . . . रिश्ते

दोहा पंचक. . . . रिश्तेमिलते हैं  ऐसे गले , जैसे हों मजबूर ।निभा रहे संबंध सब , जैसे हो दस्तूर…See More
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन व आभार।"
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लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई रवि जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सुंदर सुझाव के लिए हार्दिक आभार।"
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