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June 2020 Blog Posts

चाहती हूँ

दिवस के अवसान का,भ्रम नहीं पाले कोई,

चाॅद की आमद के पीछे,

आएगी ऊषा नई ,

ऊध्व॔मुख सूरजमुखी से होड़ लेना चाहती हूँ ..एक

गहरी नींद सोना चाहती हूँ ।

अश्रुओं में बह गई है,

विगत की अंतिम निशानी,

पलकों पर सजने लगी है,

प्रीत की नूतन कहानी,जिंदगी की जीत पर ,

मन को ड़ुबोना चाहती हूँ ।

एक गहरी नींद सोना चाहती हूँ ।

मैं सृजन के शब्द होकर,

दिग् दिगंत में उड़ सकूँ,

धूप का सा आचरण ले,

कालिमा से लड़ सकूँ,

राख से जन्मे विहग के,पंख होना…

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Added by Anvita on June 4, 2020 at 12:00pm — 5 Comments

कहीं नायाब पत्थर है , कहीं मन्दिर मदीना है

कहीं नायाब पत्थर है , कहीं मन्दिर मदीना है

तेरा घर संगेमरमर का , मेरा तो नीला ज़ीना है

कोई मन्दिर पे सर टेके, कोई काबा को माने है

मैं हर पत्थर पे सर टेकूं जहाँ नेकी क़रीना है

कहीं पर धूप है तपती, कहीं सागर की लहरें हैं

अजब है रंग दरिया का, जहाँ तेरा सफ़ीना है

कोई ऐ सी में बैठा है , कोई छतरी को भी तरसे

मगर ख़ूँ एक सा बहता, बहे इक सा पसीना है

कभी मिट्टी से भी पूछो, कि जलना है या दफना दूं

कहे मिट्टी दे आज़ादी…

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Added by Dimple Sharma on June 3, 2020 at 6:30pm — 7 Comments

जीवन पर कुछ दोहे :

जीवन पर कुछ दोहे :

जीवन नदिया आस की, बहती जिसमें प्यास।

टूटे सपनों का सहे, जीव सदा संत्रास।१ ।

जीवन का हर मोड़ है, सपनों का भंडार।

अभिलाषा में जीत की, छिपी हुई है हार।२ ।

जीवन पथ निर्मम बड़ा, अनदेखा है ठौर।

करने तुझको हैं पथिक,सफ़र सैंकड़ों और।३।

जीवन उपवन में खिलें, सुख -दुख रूपी फूल।

अपना -अपना भाग्य है फूल मिलें या शूल।४ ।

मिथ्या जग में जीत है, मिथ्या जग में हार ।

जीवन का हर मोड़ है, सपनों…

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Added by Sushil Sarna on June 2, 2020 at 9:00pm — 8 Comments

अधूरे अफ़साने :

अधूरे अफ़साने :

जाने कितने उजाले ज़िंदा हैं

मर जाने के बाद भी

भरे थे तुम ने जो

मेरी आरज़ूओं के दामन में

मेरे ख़्वाबों की दहलीज़ पर

वो आज भी रक़्स करते हैं

मेरी पलकों के किनारों पर

तारीकी में डूबी हुई

वो अलसाई सी सहर

वो अब्र के बिस्तर पर

माहताब की

अंगड़ाइयों का कह्र

वो लम्स की गुफ़्तगू

महक रही है आज भी

दूर तलक

मेरे जिस्मो-जां की वादियों में

तुम थे

तो…

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Added by Sushil Sarna on June 1, 2020 at 8:00pm — 8 Comments

परम पावनी गंगा

चन्द्रलोक की सारी सुषमा, आज लुप्त हो जाती है।

लोल लहर की सुरम्य आभा, कचरों में खो जाती है

चाँदी जैसी चंचल लहरें, अब कब पुलकित होती हैं

देख दुर्दशा माँ गंगा की, हरपल आँखे रोती हैं।

बस कागज पर निर्मल होती, मीठी-मीठी बातों से।

कल्पनीय चपला जस शोभित, होती हैं सौगातों से।

व्यथित सदा ही गंगा होती, मानव के संतापों से।

फिर कैसे वह मुक्त करेगी, उसे भयंकर पापों से।

एक समय था गंगा लहरें, उज्ज्वल रूप दिखाती थी।

धवल मनोहर रात चाँदनी, गंगा…

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Added by डॉ छोटेलाल सिंह on June 1, 2020 at 5:45pm — 5 Comments

गंगादशहरा पर कुछ दोहे

...............

गंगा जी ने जिस दिवस, धरे धरा पर पाँव

माने गंगा दशहरा, मिलकर पूरा गाँव।१।

**

विष्णुपाद से जो निकल, बैठी शंकर भाल

प्रकट रूप में फिर चली, गोमुख से बंगाल।२।

**

करती मोक्ष प्रदान है, भवसागर से तार

भागीरथ तप से हुआ, हम सबका उद्धार।३।

**

गोमुख गंगा धाम है, चार धाम में एक

जिसके दर्शन से मिटें, मन के पाप अनेक।४।

**

अमृत जिसका नीर है, जीवन का आधार

अंत समय जो ये मिले, खुले स्वर्ग का द्वार।५।

**

अद्भुत गंगाजल कभी, पड़ें…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 1, 2020 at 1:39pm — 4 Comments

उम्मीद क्या करना -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'( गजल)

१२२२/१२२२/१२२२/१२२२



रहेगा साथ सूरज यूँ  सदा  उम्मीद क्या करना

जलेगा साँझ होते ही दिया उम्मीद क्या करना।१।

**

जो बरसाता रहा कोड़े सदा निर्धन की किस्मत पर

करेगा आज  थोड़ी  सी  दया  उम्मीद  क्या करना।२।

**

बनाये  दूरियाँ  ही  था सभी  से  गाँव  में  भी  जो 

नगर में उससे मिलने की भला उम्मीद क्या करना।३।

**

चला करती है उसकी जब इसी से खूब रोटी सच

वो देगा छोड़ छलने की…

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Added by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on June 1, 2020 at 5:00am — 4 Comments

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