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शिज्जु "शकूर"'s Blog – February 2015 Archive (4)

ग़ज़ल

122 122 122 122



ये अकुलाहटें मेरे मन की कहूँ क्या

तड़प बेकरारी नयन की कहूँ क्या



उठे है धुआँ सा दिलो जाँ से मेरे

जली है ज़मीं भी चमन की कहूँ क्या



चला जा रहा हूँ सफ़र में मैं पैहम

नहीं इंतिहा है थकन की कहूँ क्या



तरसता रहा उम्र भर फूल को वो

ये आराइशें इस कफ़न की कहूँ क्या



मुझे लूटकर घर तलक छोडा़ उसने

वफ़ा देखिये राहजन की कहूँ क्या



निशां बह गया वक्त की मौज के साथ

अदा रह गई बांकपन की कहूँ… Continue

Added by शिज्जु "शकूर" on February 24, 2015 at 7:36pm — 14 Comments

पाँच दोहे

मानव मन दुर्बल हुआ, जो पूजे इंसान ।
अंतर ईश मनुष्य का, ना समझे नादान।।

पंक घृणा के फेंककर, कहलाये भगवान।
इतनी सी इस बात को, समझे ना इंसान।।

अपनी अपनी है समझ, अपना अपना पंथ।
मन से दुर्बल के लिये, व्यर्थ सभी हैं ग्रंथ।।

रहे हृदय में आस्था, श्रृद्धा में हो ईश
बस उसके ही नाम पर, नत रखना तू शीश।।

मानव को मानव समझ, ऐसा रख व्यवहार।
बने हँसी का पात्र तू, ऐसा क्या आचार।।

-मौलिक व अप्रकाशित

Added by शिज्जु "शकूर" on February 13, 2015 at 8:00am — 9 Comments

पहली दफ़ा मुझे न खुशी से खुशी हुई

221 2121 1221 212

पहली दफ़ा मुझे न खुशी से खुशी हुई
दामे हयात में मेरी जाँ है फँसी हुई

घुटने लगा है दम मेरा रिश्तों के बोझ से
ये दुनिया जैसे बर्फ के अंदर धँसी हुई

तेरी शिकायतों का करूँ क्या कोई गिला
आँखों में तेरी दिख गई हसरत दबी हुई

था इक मलाल दिल में तगाफ़ुल का हमनशीं
वो बात तेरे वस्ल से आई गई हुई

औराक़ पर उतर गये पल इंतज़ार के
मिसरों में तेरी शक्ल सी मानो बनी हुई

-मौलिक व अप्रकाशित

Added by शिज्जु "शकूर" on February 10, 2015 at 10:30pm — 10 Comments

जो तेरी है कहानी वही मेरी दास्ताँ

221 2121 1221 212

जो तेरी है कहानी वही मेरी दास्ताँ

मैं भी अकेला और तू भी तन्हा है वहाँ

 

हर गाम मुँह चिढ़ाती हुई ज़िन्दगी हमें

हैरान मेरा दिल है परेशान तेरी जाँ

 

जो तेरी रहगुज़र है नहीं रास्ता मेरा

कोई खिंचाव तो है मगर अपने दरमियाँ

 

कुछ ख्वाब नातमाम अधूरी सी हसरतें

हो बेकरार तुम भी वहाँ और मैं यहाँ

 

ग़मगीन तुम उदास मैं भी हूँ “शकूर” और

खामोश ये जहान है चुप-चुप सा आसमाँ

 

-मौलिक…

Continue

Added by शिज्जु "शकूर" on February 1, 2015 at 12:23pm — 8 Comments

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