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Tasdiq Ahmed Khan's Blog – March 2019 Archive (2)

ग़ज़ल (यूँ ही तो न मायूस हम हो गए)

ग़ज़ल (यूँ ही तो न मायूस हम हो गए)

(फ ऊलन _फ ऊलन _फ ऊलन _फ अल)

यूँ ही तो न मायूस हम हो गएl

अचानक सितम उनके कम हो गए l

ज़माने की नाकाम साज़िश हुई

वो मेरे हुए उनके हम हो गए l

खिलाफे सितम क्या सुखनवर लिखें

बिकाऊ जब उनके क़लम हो गए l

हुकूमत बचा ज़ुल्‍म की संग दिल

सभी अब खिलाफे सितम हो गए l

कोई आ गया आख़री वक़्त क्या

सभी खत्म दिल के अलम हो गए l

यूँ ही तो न यारों को हैरत हुई…

Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on March 14, 2019 at 5:23pm — 6 Comments

ग़ज़ल (जो वाकिफ़ ही नहीं नामे वफ़ा से)

ग़ज़ल (जो वाकिफ़ ही नहीं नामे वफ़ा से)

(मफाई लुन _मफाई लुन _फ ऊलन)

जो वाकिफ़ ही नहीं नामे वफ़ा सेl

लगा बैठा हूँ दिल उस दिलरुबा से l

वो बिन मांगे ही मुझको मिल गए हैं

करूँ कोई दुआ अब क्या ख़ुदा से l

झुका मुंसिफ़ भी ज़र के आगे वर्ना

बरी होता नहीं क़ातिल सज़ा से l

परायों का करूँ मैं कैसे शिकवा

मुझे लूटा है अपनों ने दगा से l

ये है फिरक़ा परस्तों की ही साज़िश

बुझा कब दीप उलफत का हवा से…

Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on March 4, 2019 at 7:49pm — 8 Comments

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