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Sarita Bhatia's Blog – June 2013 Archive (7)

दोहे

जल बिन सब बेजान हैं ,धरती कहे पुकार

बरखा देखो आ गई ,लेकर सुखद फुहार

घाव धरा के भर गए , ग्रीष्म हो गया लुप्त

जल फैला चहुँ ओर है ,धरा हो गई तृप्त



बरखा लेकर आ गई ,राहत और सुकून

दिल्ली भी अब बन गई ,देख देहरादून…

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Added by Sarita Bhatia on June 30, 2013 at 6:00pm — 9 Comments

प्रलय या आपदा [आल्हा छंद ] प्रथम प्रयास

रूद्र रूप ले आए भोले ,मचा प्रलय से हाहाकार

मानव आया कुदरत आड़े,उजड़ गए लाखों परिवार

यहाँ जिन्दगी चहका करती,अब हैं लाशों के अम्बार

दोहन लेकर आया विपदा,हम मानस ही जिम्मेवार



उमड़ घुमड़ बादल जो आए,छम छम कर आई बरसात

ध्वस्त हुए सब मंदिर मस्जिद,दिन में ही हो आई…

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Added by Sarita Bhatia on June 27, 2013 at 7:30pm — 26 Comments

चुनावी साल में नेता जी

आज हर ओर खुदी है सड़क

खड्डों मिट्टी की है भरमार

क्योंकि चुनाव को रह गया है एक साल



इसलिए हरेक नेता जी को

सड़क अब टूटी नज़र आने लगी है

अपनी बेरूख़ी जनता अब भाने लगी है

अब सफाई वाला ,कूड़ा उठाने वाला हाज़िरी लगाने लगे…

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Added by Sarita Bhatia on June 26, 2013 at 10:00am — 22 Comments

बारिश : सरिता भाटिया

काली घटाओं ने दिल्ली को यूँ घेरा है

दिन में ही देखो छाया कैसा अँधेरा है

दिल क्यों धक धक करे गोरी तेरा है

आज तो ठंडी हवाओं का यहाँ बसेरा है

होगी बारिश खूब,दिल कहे आज मेरा…

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Added by Sarita Bhatia on June 17, 2013 at 11:00am — 15 Comments

मेरे पिता : सरिता भाटिया

मेरे पिता एवं भाई 



माँ ने जो बेशुमार प्यार दिया,

पिता ने चुपचाप दुलार किया !…

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Added by Sarita Bhatia on June 14, 2013 at 7:00pm — 24 Comments

वो पिता होता है : सरिता भाटिया

दो छोटी रचनाएँ पिता को समर्पित                      

                      1.

थाम ऊँगली जो चलाये वो पिता होता है

प्यार छुपा जो डांट से समझाए वो पिता होता है

कंधे बिठा सारी…

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Added by Sarita Bhatia on June 10, 2013 at 10:30am — 14 Comments

पर्यावरण दिवस

इमारत का कद बढ़ता जाए 

पानी का स्तर घटता जाए 

हरियाली का दाव लगा है

चारों ओर ही सूखा पड़ा है

 …

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Added by Sarita Bhatia on June 6, 2013 at 11:00pm — 13 Comments

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