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AVINASH S BAGDE's Blog – June 2012 Archive (5)

कटाक्ष!

मंत्रालय में आग.......भाग डी. के..भाग.......!!!!!!

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आग!
बड़ा ही बहु-आयामी शब्द है ये.
दिल से लेकर मंत्रालय तक इसकी हुकूमत के झंडे लहराते है.
आग मत लगा..
आग लगा दूंगा
पानी में आग लगाना
तन-बदन पे आग लगना
जाने कितने तरीके है आग को जताने के.
रोमांटिक हुये तो गा दिया..दो बदन जल गए प्यार की आग में....
अरे छोडिये हमें…
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Added by AVINASH S BAGDE on June 23, 2012 at 4:57pm — 11 Comments

हाईकू

हाईकू
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जंगो-जुनून
हर आदमी अँधा 
किसे सुकून.
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मस्तक सजे
माटी मेरे देश की…
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Added by AVINASH S BAGDE on June 19, 2012 at 10:30am — 7 Comments

7..हाइकु....

हाइकु....
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तेवर भी है
अंग-अंग सोने सा
जेवर भी है.
-------------
नही सूरत
सोच बदल डालो
है जरुरत.
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जान बचाओ
खतरे ही खतरे 
बाज तो  आओ.
-----------
मुर्गी क़े लिए
लड़ते बदस्तूर
कुर्सी क़े लिए
-------------
लड़कियां हैं
ताजगी साथ…
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Added by AVINASH S BAGDE on June 13, 2012 at 8:30pm — 11 Comments

सुग्गे!!!..............(लघुकथा)

सुग्गे!!!

(लघुकथा)
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रोज की तरह आज भी रमेश सायकल पर सुग्गों  के पिंज़रे लटका कर बेचने के लिये निकला.आज की धूप सुबह से ही चिलचिलाती सी थी.
दिनभर आवाज लगा-लगा कर रमेश का गला सूखा जा रहा था.पूरब की लाली धीरे-धीरे पश्चिम के आकाश को लाल करने लगी थी मगर एक भी सुग्गे की बिक्री का संयोग रमेश के भाग में नहीं आया.धूप से बेहाल,थक कर चूर, रमेश सुग्गों के पिंज़रों से भरी…
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Added by AVINASH S BAGDE on June 11, 2012 at 7:30pm — 8 Comments

दो कुण्डलियाँ......

दो कुण्डलियाँ......
१-डॉलर  के कॉलर!

डॉलर  के कॉलर खड़े,रूपया है कमजोर.

महंगाई की डोर  का,दिखे ओर ना छोर.
दिखे ओर ना  छोर ,पकड़ कर कैसे रोकें.
आम-आदमी यहाँ,खा रहा पल-पल धोखे.
'कहता है अविनाश' ,हाल है बद से बदतर!
कितने होंगे कड़क,और डॉलर के कॉलर?
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२-बढे कलंकित कर्म!!!
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ऐसे…
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Added by AVINASH S BAGDE on June 4, 2012 at 7:30pm — 10 Comments

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