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नाथ सोनांचली's Blog – July 2020 Archive (4)

ग़ज़ल -दौर वह यारो गया और उसके दीवाने गए

बह्र- 2122  2122  2122  212

मीडिया की फ़ौज लेकर रह्म कब खाने गए

झोपड़ी में सिर्फ़ वे दिल अपने बहलाने गए

रेडियो से ही हुआ करती थी सुब्ह-ओ-शाम जब

दौर वह यारो गया और उसके दीवाने गए

नीम पीपल छाँछ लस्सी बाजरे की रोटियाँ

ज़िन्दगी से गाँव की ये सारे अफ़साने गए

जोड़ते थे जो दिलों को अपनी माटी से यहाँ

फ़ाग चैता और कजरी के वे सब गाने गए

पूछने पर लाल के माँ ने कहा पापा तेरे

ओढ़कर प्यारा तिरंगा चाँद को लाने…

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Added by नाथ सोनांचली on July 30, 2020 at 11:16am — 13 Comments

ग़ज़ल- हाँ में हाँ लोग जो होते हैं मिलने वाले

2122  1122  1122  22

हाँ में हाँ लोग जो होते हैं मिलाने वाले

हैं पस-ए पुश्त मियाँ ज़ुल्म वो ढाने वाले

अपने चहरे के उन्हें दाग़ नज़र आ जाते

देखते ख़ुद को जो आईना दिखाने वाले

पाप धुलते नहीं इस तरह बता दो उनको

हैं जो कुछ लोग ये गंगा में नहाने वाले

हो क़फ़स लाख वो फ़ौलाद का लेकिन यारो

रोक सकता नहीं उनको जो हैं जाने वाले

आपसे वादा निभाएँगे भला वो कैसे

वादा ख़ुद का न कभी ख़ुद से निभाने वाले

आप…

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Added by नाथ सोनांचली on July 18, 2020 at 4:30pm — 14 Comments

ग़ज़ल- रोज़ सितम वो ढाते देखो हम बेबस बेचारों पर

रोज़ सितम वो ढाते देखो हम बेबस बेचारों पर

कोई अंकुश नहीं लगाता इन सरमाया दारों पर।

मजदूरों का जीवन देखो कितना मुश्किल होता है

बिस्तर पास नहीं जब होता सो जाते अख़बारों पर।

भूक ग़रीबी ज्यों की त्यों क्यों तख़्त नशीं कुछ तो बोलो

दोष मढ़ोगे कब तक आख़िर पिछली ही सरकारों पर।

वक़्त नहीं है पास किसी के सबको अपनी आज पड़ी

दौर पुराना ख़्वाब लगे जब भीड़ जुटे चौबारों पर।

बच्चे झुककर बात करेंगे घर के सारे लोगों से

आईने जब लग जाएँगे घर…

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Added by नाथ सोनांचली on July 12, 2020 at 12:59pm — 10 Comments

ग़ज़ल -पुराने गाँव की अब भी कहानी याद है हमको

था सब आँखों में मर्यादा का पानी याद है हमको

पुराने गाँव की अब भी कहानी याद है हमको।

भले खपरैल छप्पर बाँस का घर था हमारा पर

वहीं पर थी सुखों की राजधानी याद है हमको

वो भूके रहके ख़ुद महमान को खाना खिलाते थे

ग़रीबों के घरों की मेज़बानी याद है हमको

हमारे गाँव की बैठक में क़िस्सा गो सुनाता था

वही हामिद के चिमटे की कहानी याद है हमको

सलोना और मनभावन शरारत से भरा बचपन

अभी तक मस्त अल्हड़ ज़िंदगानी याद है…

Continue

Added by नाथ सोनांचली on July 11, 2020 at 12:00pm — 14 Comments

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