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Sushil Sarna's Blog – August 2019 Archive (10)

क्षणिकाएँ ....

क्षणिकाएँ ....

लील लेती है
एक ही पल में
कितने अंतरंग पलों का सौंदर्य
विरह की
वेदना

...............

उड़ती रही
देर तक
खिन्न सी एक तितली
मृदा में गिरे
मृत पुष्प में
जीवन ढूँढती

..........................

कह रहे थे दास्ताँ
बेरहम आँधियों की
बिखरे तिनके
घौंसलों के

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Sushil Sarna on August 30, 2019 at 7:10pm — 4 Comments

बेसुरी खाँसी ....

मन ढूँढता रहा

नीरवता में

खोये हुए कोलाहल को

साथ ले गई

अपनी बेसुरी आवाज़ें

खाँसी की

जीवन के अंतिम पहर में

अपने साथ

जाने कितने सपने,

कितने दर्द छुपे थे

बूढ़ी माँ की

उस बेसुरी खरखरी

खाँसी में

पहले…
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Added by Sushil Sarna on August 24, 2019 at 6:30pm — 2 Comments

ऐ हवा ....

ऐ हवा .............

कितनी बेशर्म है

इसे सब खबर है

किसी के अन्तःकक्ष में

यूँ बेधड़क चले आना

रात की शून्यता में

काँच की खिड़कियों को बजाना

पर्दों को बार बार हिलाना

कहाँ की मर्यादा है

कौमुदी क्या सोचती होगी

क्या इसे ज़रा भी लाज नहीं

इसका शोर

उसे मुझसे दूर ले जायगा

मेरा खयाल

मुझसे ही मिलने से शरमाएगा

तू तो बेशर्म है

मेरी अलकों से टकराएगी

मेरे कपोलों को

छू कर निकल जाएगी

मेरे…

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Added by Sushil Sarna on August 23, 2019 at 7:00pm — 4 Comments

चले आओ .....

चले आओ .....

जाने कौन

बात कर गया

चुपके से

दे के दस्तक

नैनों के

वातायन पर

दौड़ पड़ा

पागल मन

मिटाने अपने

तृषित नैनों की

दरस अभिलाषा

पवन के ठहाके

मेरे पागलपन का

द्योतक बन

वातायन के पटों को

बजाने लगे

अंतस का एकांत

अभिसार की अनल को

निरंतर

प्रज्वलित करने लगा

कौन था

जिसका छौना सा खयाल

स्पर्शों की आंधी बन

मेरी बेचैनियों को…

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Added by Sushil Sarna on August 21, 2019 at 12:56pm — 2 Comments

तिरंगे तुझे सुनानी है ....

तिरंगे तुझे सुनानी है ....

सन ४७ की रात में

आज़ादी की बात में

दर्दीले आघात में

छुपी जो एक कहानी है

तिरंगे तुझे सुनानी है

आज़ादी के शोलों में

रंग बसन्ती चोलों में

जय हिन्द के बोलों में

छुपी जो एक कहानी है

तिरंगे तुझे सुनानी है

राजगुरु सुखदेव भगत

और मंगल पण्डे लक्ष्मी बाई

गाँधी शेखर और शिवा की

छुपी जो एक कहानी है

तिरंगे तुझे सुनानी है

आज़ादी के दीवानों की

सरहद के जवानों की…

Continue

Added by Sushil Sarna on August 16, 2019 at 6:44pm — 2 Comments

संतान (क्षणिकाएं ) ....

संतान (क्षणिकाएं ) ....

बुझ गए बुजुर्ग
करते करते
रौशन
अपने ही चिराग

.....................

कर रही
वृक्षारोपण
वृद्धाश्रम में
वृद्धों की हाथों
उनकी ही संतान

.......................

हो गया
संस्कारों का
दाहसंस्कार
मौन बिलखता रहा
कहकहों में
संतान के


सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Sushil Sarna on August 8, 2019 at 12:57pm — 6 Comments

अभिव्यक्ति का संत्रास ...

अभिव्यक्ति का संत्रास ...

वरण किया
आँखों ने
यादों का ताज
पूनम की रात में

होती रही स्रावित
यादें
नैन तटों से
अविरल
तन्हा बरसात में

वीचियों पर
यादों की
तैरती रही
परछाईयाँ
देर तक
तन्हा अवसाद में

कर न सके व्यक्त
अधरों से
अन्तस् के
सिसकते जज्बातों की
अव्यक्त अभिव्यक्ति का संत्रास
शाब्दिक अनुवाद में

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Sushil Sarna on August 6, 2019 at 5:06pm — 10 Comments

वो मेरा था तारा ...

वो मेरा था तारा ...

यादों के बादल से

नैनों के काजल से

लहराते आँचल से

जिसने पुकारा

वो

मेरा था तारा



महकती फिजाओं से

परदेसी हवाओं से

बरसाती राहों से

जिसने पुकारा

वो

मेरा था तारा

सपनों के अम्बर से

खारे समंदर से

मन के बवंडर से

जिसने पुकारा

वो

मेरा था तारा

यादों के नीड से

महकते हुए चीड से

ख्वाबों की भीड़ से

जिसने पुकारा

वो

मेरा था…

Continue

Added by Sushil Sarna on August 5, 2019 at 3:35pm — 6 Comments

चंद हाइकु ...

चंद हाइकु ...

संग दामिनी
धक-धक धड़के
प्यासा दिल

तड़पा गई
विगत अभिसार
बैरी चपला

लुप्त भोर
पयोद घनघोर
शिखी का शोर

छुप न पाया
विरह का सावन
दर्द बहाया

खूब नहाई
रूप की अंगड़ाई
रुत लजाई

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Added by Sushil Sarna on August 3, 2019 at 5:07pm — 4 Comments

ले बाहों में सोऊँगी ....

ले बाहों में सोऊँगी ....

सावन की बरसात को

प्रथम मिलन की रात को

धड़कते हुए जज़्बात को

संवादों के अनुवाद को

ले बाहों में सोऊँगी

अस्तित्व अपना खोऊँगी

अपनी प्रेम कहानी को

भीगी हुई जवानी को

बारिश की रवानी को

नैन तृषा दिवानी को

ले बाहों में सोऊँगी

अस्तित्व अपना खोऊँगी

उस नशीली रात को

उल्फ़त की बरसात को

अजनबी मुलाक़ात को

हाथों में थामे हाथ को

ले बाहों में सोऊँगी

अस्तित्व अपना…

Continue

Added by Sushil Sarna on August 2, 2019 at 5:19pm — 4 Comments

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