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Ajay sharma's Blog – October 2012 Archive (4)

जो बाँतें चेनो ओ अमन की करते हैं

जो बाँतें चेनो ओ अमन की करते हैं 
खुद तैयारी कफन की करते हैं 
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फूल का कारोबार है उनका 
जो बुराई चमन की करते  हैं 
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लोग कहते हैं सिरफिरा उनको 
जो बाँतें  ज्यादा वतन की करते हैं 
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उनकी यादें भी न रहती महफूज़  
जो हिफाज़त वतन की करते…
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Added by ajay sharma on October 12, 2012 at 5:30pm — 1 Comment

सांस के क़दमों से पूछियें .......

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कितनी ख़ास ओ आम ज़िन्दगी 

पेट  की  ग़ुलाम  ज़िन्दगी
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मिल गयी तो  सुबह हो  गयी 
खो गयी तो शाम ज़िन्दगी 
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हर गरीब अमीर के लिए 
बन गयी इक काम ज़िन्दगी
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सांस…
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Added by ajay sharma on October 12, 2012 at 5:21pm — 3 Comments

ग़ालिब भूखे पेट है तुलसी नंगी पीठ..

ना गर्मी में ताप है, ना सर्दी में शीत,

जाने कैसा दौर है, कोई नियम ना रीत |



गूंगे बहरे पा रहे अंधों से सम्मान,

ग़ालिब भूखे पेट है तुलसी नंगी पीठ |



जब पैसा साहित्य का बन जाता है धर्म, 

ग़ज़लें बर्तन मांजती पानी भरते गीत |



आंसू पीकर सो गए बच्चे सब लाचार,

हार गए फिर वायदे, गयी…
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Added by ajay sharma on October 8, 2012 at 10:00pm — 4 Comments

इतनी दूर चले जाना था इतनी पास बुलाया क्यों -----------

तुमसे सीखा हंसना मैंने आखिर मुझे रुलाया क्यों ....

इतनी दूर चले जाना था इतनी पास बुलाया क्यों ...



तेरी यादें, ख़त तेरे कुछ केवल बचा खजाने में 

नींदें, दिल का चैन , खो गया तेरे ख्वाब सजाने में

सोना था तो सो जाते तुम नाहक मुझे जगाया क्यों 

इतनी दूर चले जाना था इतनी पास बुलाया क्यों -----------



काँटों पर चलना था चलते, लेकिन तुम भी होते साथ 

जब भी ठोकर गर मैं खाता तुम दे देते अपना हाथ 

वादे ढेरों लेकिन तुमने इक भी नहीं…

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Added by ajay sharma on October 1, 2012 at 12:02pm — 2 Comments

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