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DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU''s Blog – November 2015 Archive (7)

धीरे-धीरे.........(बैजनाथ शर्मा ‘मिंटू’)

अरकान - 122 122 122 122

 

किया जिसने दिल में ही घर धीरे-धीरे|

उसी ने रुलाया मगर धीरे –धीरे|

 

उमर  मेरी  गुजरी है यादों में जिनकी ,

हुई आज उनको खबर धीरे –धीरे |

 

जहाँ तक पहुचने की ख्वाहिश है मेरी,

यकीनन मैं पहुंचूंगा पर धीरे –धीरे|

 

बचपन में सरका जवानी में दौड़ा,

बुढापा गया अब ठहर धीरे-धीरे|

 

न शिकवा किसी से न है अब शिकायत,

भरा घाव मेरा मगर धीरे –धीरे|

 

मौलिक व…

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Added by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on November 26, 2015 at 8:00pm — 4 Comments

दिन सुनहरा हो गया- बैजनाथ शर्मा 'मिंटू'

अरकान -   2122   2122   2122   212

 

आप आये और मेरा दिन सुनहरा हो गया|

आपको देखा तो मेरा फूल चेहरा हो गया|

  

कुछ समय पहले तलक तो थी हरी यें वादियाँ ,

आपके जाते ही तो हर  सिम्त सहरा हो गया|

क़त्ल का ए सिलसिला क्यों और आगे बढ़ गया,

जब से मेरे गाँव में कुछ सख्त पहरा हो गया |

 

लाख चीखो और चिल्लाओ सुनेगा कौन अब,

हाय पत्थर दिल ज़माना आज बहरा हो गया|

 

जख्म तो बस जख्म था जो भर भी सकता था मगर…

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Added by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on November 20, 2015 at 10:00pm — 1 Comment

गीत - कितना तुझको याद किया.( बैजनाथ शर्मा ‘मिंटू’)

श्याम हमारे दिल से पूछो, कितना तुझको याद किया|

भूल गई मैं सारे जग को, फिर भी तेरा नाम लिया|

यादों में तेरी मुरली वाले, जीवन यूँ ही गुजार दिया,

श्याम हमारे दिल से पूछो, कितना तुझको याद किया|

 

देख के तेरी भोली सूरत हम भी धोखा खा ही गए,

मोहन तेरी मीठी-मीठी बातों में हम आ ही गए,

हार गए जीवन में सब फिर भी तेरा नाम लिया

श्याम हमारे दिल से पूछो, कितना तुझको याद किया|

 

करती हूँ कोशिश मैं मोहन याद हमेशा तुम आओ,

रह नही सकती…

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Added by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on November 19, 2015 at 8:30pm — 2 Comments

नया कोई सपना सजाकर तो देखो| -बैजनाथ शर्मा ‘मिंटू’

अरकान -    122      122      122    122  

नया कोई सपना सजाकर तो देखो|

परायों को अपना बनाकर तो देखो

 

लगेगी ए दुनिया तुम्हें खूबसूरत,

ज़रा दिल से नफ़रत भुलाकर तो देखो|

 

सफलता मिलेगी तुम्हें भी यकीनन,

कदम अपने तुम भी बढाकर तो देखो|

 

बहू-बेटियाँ क्यों न पर्दा करेगी,

हया उनको तुम भी सिखाकर तो देखो|

 

करोगे जहां को भी सूरज –सा रोशन,

तुम अपने को पहले तपाकर तो देखो|

 

बनेंगे…

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Added by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on November 18, 2015 at 6:30pm — 9 Comments

मेरा पैगाम बाक़ी है|- बैजनाथ शर्मा ‘मिंटू’

अरकान- 1222     1222     1222     1222

                    

 

सुनो सब गौर से वीरों मेरा पैगाम बाक़ी है|

न हारो हौसला अपना अभी तो लाम बाकी है|

 

मैं आकर मैकदे में अब बता कैसे रहूँ प्यासा,

पिला दे जह्र ही साक़ी अभी इक जाम बाक़ी है|

 

जमीं से तोड़कर रिश्ता बहुत आगे निकल आया,

मगर हालत कहते हैं अभी अंजाम बाकी है|

 

गए पकड़े वो सारे जो बहुत मासूम थे यारो,

सही कातिल का लेकिन इक सियासी नाम बाक़ी…

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Added by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on November 17, 2015 at 12:00am — 4 Comments

बाकी सब कुछ अच्छा है|---बैजनाथ शर्मा 'मिंटू'

अरकान -   2 2   2 2    2 2   2 2     2 2   2 2   2 2   2    

तेरे बिन घर वन लगता है बाकी सब कुछ अच्छा है|

तुझ बिन बेटे जी डरता है बाकी सब कुछ अच्छा है|

 

माँ तेरी बीमार पड़ी है गुमसुम बहना भी रहती,

भैया का भी हाल बुरा है  बाकी सब कुछ अच्छा है|            

 

दादी तेरी बुढिया हैं  पर चूल्हा-चौका हैं  करती,                                      

कोई न उनका दुख हरता है बाकी सब कुछ अच्छा है|

 

दादा जी पूछा करते…

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Added by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on November 13, 2015 at 6:00pm — 8 Comments

न जाने क्यों भला फिर आज उनकी याद आयी है|

अरकान- 1222     1222       1222        1222 

न जाने क्यों भला फिर आज उनकी याद आयी है|

न मिलने की कसम जिनसे हमेशा मैंने खाई है|

मुरव्वत से हैं बेगाने हया तक बेच खाई है,

छूटे गर पिंड ऐसों से इसी में ही भलाई है|

तुम्हारी याद हावी है मेरे दिल पर उसी दिन से,

हुई खुशियाँ मेरी रुखसत दुखों से ही सगाई है|

समझकर देवता पत्थर को घर में ला बिठाया है,

इमारत दिल की यूँ अफसोस क्यों मैंने सजाई है|

जो मारा पीठ पर…

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Added by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on November 9, 2015 at 8:00pm — 1 Comment

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