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Dr Ashutosh Mishra's Blog – December 2013 Archive (6)

अश्क का दरिया भी रुख पे आ गया

अब्रे गम जब दिल पे मेरे छा गया

अश्क का दरिया भी रुख पे आ गया

आइना देखा है जब भी दोस्तों

सामने मेरे मेरा सच  आ गया

यूं तो गुल लाखों थे बगिया में मगर

दिल को लेकिन कोई कांटा  भा गया

वो हसीं गुल आने वाला है इधर

चूम झोंका खुशबू का बतला गया

हाल उनसे कहते दिल का जब तलक

यार नजरों से ही सब जतला गया

जिसने भर दी खार से ये जिन्दगी

फूल नकली दे के फिर बहला…

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Added by Dr Ashutosh Mishra on December 23, 2013 at 7:30pm — 18 Comments

छलकती आँखें हैं साकी हसीं इक जाम हो जाये

१२२२   १२२२   १२२२    १२२२

छलकती आँखें हैं साकी हसीं इक जाम हो जाये

बना दो रिंद दुनिया को सुहानी शाम हो जाये

 

जुदा मजहब के लोगों को मिला दे आज ऐ साकी

तरीका कोई भी हो आज दिलकश काम हो जाये

 

हमें हिन्दू मुसल्मा कह लड़ाते हैं भिड़ाते हैं

करो कोई जतन ऐसा की हिंदी नाम हो जाये

 

हजारों फूल गुलशन में जुदा हैं रूप रंगत भी

मगर खुशबू जुदा मिलकर हसीं पैगाम हो जाये

 

न जाने किसकी साजिश है बहाते हम लहू…

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Added by Dr Ashutosh Mishra on December 19, 2013 at 2:30pm — 21 Comments

सौदा नहीं किया कभी अपने जमीर का

सीमित संसाधनों के साथ

महती भौतिकता वादी प्यास की तृप्ति

शायद प्रेरित करती है तुम्हे सतत

बेच देने के लिए अपना जमीर ......

शराब और शबाब में मस्त

अपने दांतों से खींचते हुए

रोस्टेड चिकेन की टाँगे

भूलते रहे हो तुम अपने शक्ति और अधिकार ...

फिर  समाज में रुतवा कायम करने की;

एक अच्छा पिता और पति कहलाने की ;

तुम्हारी ख्वाइश ने भी जी भर हवा दी है  

अधिक से अधिक धनोपार्जन की तुम्हारी प्यास को

जायज या नाजायज

किसी…

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Added by Dr Ashutosh Mishra on December 14, 2013 at 4:29pm — 7 Comments

रात को चाँद फिर आयेगा देखिये.

२१२  २१२   २१२     २१२

रात को चाँद फिर आयेगा देखिये

आके दिल फिर जला जायेगा देखिये

 

हम रहेंगे खड़े रात भर छत पे ही 

बादलों में वो छुप जायेगा देखिये

 

अपने दीवानों पे रोज ही इस तरह

चांद क्या क्या सितम ढायेगा देखिये

 

हम जिसे भूल पाए कभी हैं  नहीं

किस तरह वो भुला पायेगा देखिये

 

रंग गिरगिट के जैसे बदलता है जो 

कैसे वादे निभा पायेगा देखिये

 

चांदनी बन जमी पर उतरता रहा

खुद जमी पर…

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Added by Dr Ashutosh Mishra on December 11, 2013 at 4:30pm — 20 Comments

मौत की रात मेरी रूह भी रो जायेगी

२१२२       १२१२       १२२      २२२

रोज आदत जो तुमसे मिल ने की हो जायेगी 

मौत की रात मेरी रूह भी रो जायेगी 

आखिरी पल क़ज़ा जो सामने होगी मेरे 

जिन्दगी इक हसीन  ख्वाब में खो जायेगी 

आज साकी बनी ग़ज़ल खडी है महफ़िल में 

रिंद जब देंगे मशविरा  सँवर  वो  जायेगी 

हार उल्फत का देख मौत होगी शर्मिंदा 

मौत खुद जिन्दगी ही हार में पो जायेगी 

बात गुल से हसीं हो खार सी कड़वी चाहे 

बीज जेहन मे ये  ग़ज़ल के ही बो…

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Added by Dr Ashutosh Mishra on December 9, 2013 at 11:30am — 10 Comments

सारे शहर में उग गए मशरूम जमी पर

२२१२     १२१२    २२१    १२२ 

दम भूख से हैं तोड़ते मासूम जमीं पर 

पीकर शराब मस्ती में तू झूम जमी पर

 

बच्चे मनाते फुलझड़ी बिन रो के दिवाली 

पीकर तुझे लगे मची है धूम जमी पर 

अम्बार फरजी डिग्रियों के तूने लगाए 

लटका के अब गले में इन्हें घूम जमी पर 

दो बूँद अश्क जो गिरे आँखों से यूं तेरी 

सारे शहर में उग गए मशरूम जमी पर 

सड़कों पे गर पिया तो पोलिश का भी है पंगा 

बनवा ले झुरमुटों में ही कोई रूम जमी…

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Added by Dr Ashutosh Mishra on December 4, 2013 at 11:06am — 24 Comments

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