For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Deepak Sharma Kuluvi's Blog – December 2010 Archive (11)

आखरी पन्ने -10 (दीपक शर्मा 'कुल्लुवी')

आखरी पन्ने - 10



 

(दीपक शर्मा 'कुल्लुवी')



गतांक - 10 से आगे...



दोस्तों मैं जाते हुए साल 2010 कि बिदाई और आते हुए नव वर्ष 2011 का स्वागत अपनें कुछ भजनों से करना चाहूँगा . खुदा आप सबको ढेर खुशियाँ प्रदान करे वैसे इसी सप्ताह उड़ीसा के मंदिर में घटित शर्मनाक घटना से मन अत्यंत दुखी है जिसमें एक विदेशी महिला को केवल इस बात के लिए मंदिर से…

Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on December 31, 2010 at 4:00pm — No Comments

आखरी पन्ने -8



Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on December 18, 2010 at 4:00pm — 1 Comment

गतांक - 6 से आगे आखरी पन्ने -7

 



गतांक - 6 से आगे…
Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on December 16, 2010 at 12:30pm — 2 Comments

आखरी पन्ने -6 (दीपक शर्मा कुल्लुवी)

गतांक - 5 से आगे


आखरी पन्ने -6
(दीपक शर्मा 'कुल्लुवी')


भुलाया न गया
लाख चाहा तेरी यादों को भुलाया न गया
आप भी लौट के आये न हमसे जाया गया
दूरियां दिल की नहीं तेरी मेरी जिद्द की थी
फासला…
Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on December 15, 2010 at 5:00pm — 2 Comments

आखरी पन्नें-5 दीपक शर्मा कुल्लुवी

गतांक 4 से आगे
आखरी पन्नें-5 दीपक शर्मा कुल्लुवी
कुछ तो पल जी लेने दे
सपनों में आना छोड़कर
रह जाएंगी बाद तन्हा
यह तनहाइयाँ मेरी
इंसान अपने स्कूल कॉलिज में बिताए पल कभी नहीं भूलता वोह मस्तियाँ ,शरारतें,घूमना ,फिरना, यह वोह समय होता है जब वोह खुद को शहंशाह समझता है कई सपनें संजोता है यह वोह रंगीन पल होते हैं जिन्हें वोह उम्र भर याद करता है इससे अच्छा समय फिर ज़िन्दगी में कभी नहीं आता वोह बेफिक्री,लापरवाही फिर कहाँ नसीब…
Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on December 14, 2010 at 1:29pm — 1 Comment

आखरी पन्नें-4 दीपक शर्मा' कुल्लुवी'





गतांक से आगे
आखरी पन्नें-4 दीपक शर्मा कुल्लुवी
कितना बदल गया



मेरा शहर कितना बदल गया

मेरे वास्ते अब क्या रहा

मेरा शहर कितना बदल -----

न वोह मंजिलें न वोह रास्ते

जो कभी थे मेरे…
Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on December 10, 2010 at 3:00pm — 1 Comment

आखरी पन्नें (2) दीपक शर्मा 'कुल्लुवी '

आखरी पन्नें (2) दीपक शर्मा 'कुल्लुवी '



न देख ख्वाब यह साक़ी की कोई थाम लेगा तुझको

संभले हुए दिल तेरी महफ़िल में नहीं आते.........



ज़िन्दगी में इंसान बहुत कुछ जीतता है और बहुत कुछ हार जाता है लेकिन हार कभी नहीं माननी चाहिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए कभी तो मंजिल मिलेगी मंजिल कभी न भी मिले तो कम से कम उसके करीब तो पहुँच जाओगे









कमीं रह गयी



ज़िन्दगी में तुम्हारी कमीं रह गयी

अपनीं… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on December 7, 2010 at 3:25pm — 3 Comments

आखरी पन्नें (१) दीपक शर्मा 'कुल्लुवी '

आखरी पन्नें (१) दीपक शर्मा 'कुल्लुवी '



इन आखरी पन्नों में ज़िन्दगी का दर्द है

कुछ हमनें झेला है कुछ आप बाँट लेना

मेरे क़त्ल-ओ-गम में शामिल हैं कई नाम

ज़िक्र आपका आए न बस इतनी दुआ करना

.......

आखरी पन्नें मेरी ज़िंदगी की अंतिम किताब,अंतिम रचना,आखरी पैगाम कुछ भी हो सकता है हो सकता है यह केवल एक ही पन्नें में ख़त्म हो जाए य सैंकड़ों हजारों और पन्ने इसमें और जुड़ जाएँ क्योंकि कल किसनें देखा है खुदा ने मेरे लिए भी कोई न… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on December 7, 2010 at 11:55am — 2 Comments

आखरी पन्नें

आखरी पन्नें



ज़िंदगी अपनी यादों की इक खुली किताब है

समेटे हुए हैं जिसमें हम अपने आस पास का दर्द

इसको खोलने से पहले बस इतना ख्याल रखना

आपके अश्क ढल न जाएँ दर्द मेरा देखकर



आखरी पन्नें मेरी ज़िंदगी की अंतिम किताब,अंतिम रचना,आखरी पैगाम कुछ भी हो सकता है

क्योंकि कल किसनें देखा है खुदा ने मेरे लिए भी कोई न कोई दिन तो एसा निश्चित किया होगा जिसका कल कभी न आयेगा मैं एक लेखक हूँ जिसे हर रोज़ कुछ न कुछ नया लिखने की चाह रहती है ,प्यास रहती है और मैं कुछ न कुछ लिखता… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on December 6, 2010 at 7:35pm — No Comments

रिश्ता-ए-ग़म

रिश्ता-ए-गम

ग़म तो ग़म हैं ग़म का क्या ग़म आते जाते हैं

किसी को देते तन्हाई किसी को रुलाते हैं

'दीपक कुल्लुवी' पत्थर दिल है लोग यह कहते हैं

उसको तो यह ग़म भी अक्सर रास आ जाते हैं

किसने देखा उसको रोते किसने झाँका दिल में

किसने पूछा क्यों कर यह ग़म तुझको भाते हैं

कुछ तो बात होगी इस ग़म में कुछ तो होगा ज़रूर

बेवफा न होते यह साथ साथ ही आते हैं

गम से रिश्ता रखो यारो ताउम्र देंगे साथ

यह आखरी लम्हात तक रिश्ता… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on December 4, 2010 at 10:00am — No Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

जगदानन्द झा 'मनु' added 2 discussions to the group मैथिली साहित्य
Monday
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Aug 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service