For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Monika Jain's Blog (13)

प्रतीक्षारत विरह

"प्रिये अपनी दाईं तरफ थोड़ा सा मुड़कर देखो

कोई है जो हौले से तुम्हारे सीने पर हाथ रखना चाहती है ।

तुम्हे नील गगन और खुद को धरा बनाना चाहती है ।

तुम्हारे आलिंगन…
Continue

Added by Monika Jain on August 27, 2018 at 9:30pm — 2 Comments

स्त्रीत्व

"वो सफर लगातार चलता ही रहा.....

वो रस्ते बस आगे, और आगे ही बढ़ते रहे।

मैं कभी ज़मीन पर तो कभी आसमान पर,

दिन भर बुने अपने ख़ाबों की लड़ी सजती रही।

अपने ही वजूद को कभी बच्चों में, कभी घर की दीवारों में,

तो कभी उनकी आँखों में तलाशती रही.......

जानती हूँ सब हैं मेरे, पर.... फिर भी,

मैं अपने ख़ाबों के साथ अकेली सफर तय करती रही।

और ये आस ये उम्मीद बांधती रही कि,

मेरे अस्तित्व से निरंतर झरती जीवन धारा को

ये समाज आज नहीं तो कल सहृदय अपनायेगा।…

Continue

Added by Monika Jain on March 17, 2016 at 6:30pm — 3 Comments

इंतज़ार........

इंतज़ार........

हम आज भी तेरे जाने के बाद, तेरे कदमो के निशाँ पे सर रख के सजदा करते हैं I

जो आँख तेरे आने पे झपकना भूल जाती थी, और एकटक निहारा करती थी तुम्हें

वही आँखें अब तेरे कदमों की छाप पर टिकी इंतज़ार करती हैं,

कि कब ये निशाँ वापस मेरी ओर लौट कर आयेंगे....

कान हर पल तेरी आहात को सुनने के लिए बेताब रहते हैं,

दिल-ओ-दिमाग हर वक़्त हर वक़्त तेरे ख़यालों में गुम सा रहता है,

दिल हर घडी…
Continue

Added by Monika Jain on June 9, 2012 at 6:16pm — 2 Comments

सौन्दर्य और स्वास्थ्य एक दूसरे के पूरक



        सौन्दर्य और स्वस्थ्य दोनो एक ही सिक्के के दो पहलू हैं लेकिन इसके बावजूद भी हम में से ज़्यादातर महिलाऐं सिक्के के एक ही पहलू यानि सिर्फ खूबसूरती पर ही ध्यान देती हैं । और स्वस्थ्य को जाने - अनजाने दरकिनार करती चली जाती हैं । बहुत सी महिलाओं की नज़र में खूबसूरती के मायने हैं आकर्षक मेकअप, खूबसूरत कपड़े, और मैचिंग जूलरी । लेकिन क्या सचमुच खूबसूरती के यही मायने हैं ? हम ये तो नहीं कहते कि आकर्षक कपड़े, ज़ेवर, और मेकअप खूबसूरती का हिस्सा नहीं हैं लेकिन यह…

Continue

Added by Monika Jain on May 19, 2012 at 11:30pm — 8 Comments

उड़ान

यह रचना मैंने करीब १०-११ साल  पहले लिखी थी और आज जब इस रचना को पढ़ती हूँ तो ऐसा लगता है मानो न तब कुछ बदला था न आज कुछ बदला है बस अगर कुछ बदला है तो इस पुरुष प्रधान समाज में तीर मारने वाले बदल गए है. ये रचना हमेशा मेरे मन के निकट रही है इसलिए आप सभी तक पहुंचा रही हूँ ----
"उड़ान"

मैं हूँ इक छोटी सी…
Continue

Added by Monika Jain on May 9, 2012 at 12:30am — 12 Comments

तुम क्या समझो तुम क्या जानो......मोनिका जैन "डाली"

तुम क्या समझो तुम क्या जानो

है पीर कहा ? है दर्द कहाँ ?

क्यों है मन आकुल व्याकुल सा

क्यों है तन थका थका सा ये

क्यों हार - हार कर  भी लेती हूँ

जीने की प्रबल प्रतिग्या मैं

क्यों बुझे हूऐ दीपों में मैं

आशा की जोत जलाती हूँ  

क्यों हूँ  रूठी हूँ दुनिया से मैं

क्यों फिर भी सबसे हिली मिली

हैं प्रश्न बहुत पर फिर भी

मैं क्यों खडी - खडी मुस्काती हूँ ?

क्या है ? क्यों है ? कैसा है ?

प्रश्नों की ठेलम ठेली है !

हो चकित देख कर…

Continue

Added by Monika Jain on May 6, 2012 at 7:00pm — 11 Comments

प्यार का ख्याल.....

प्यार  का ख्याल.....

प्यार  का ख्याल गर खाब मैं ही हो आये, 

तो ज़िन्दगी खूब से खूबतर हो जाये.

हर आँख से…

Continue

Added by Monika Jain on April 12, 2012 at 4:31pm — 5 Comments

"समय और भाग्य"

"समय और भाग्य"

सब कुछ भले न सही, पर 

कुछ कुछ सबको मिला है ,

और यही कुछ कुछ एहसास कराता है की …

Continue

Added by Monika Jain on March 13, 2012 at 9:20pm — 7 Comments

"कशमकश"

"कशमकश"

क्यों वक़्त से पहले ये वक़्त भागता सा लगे है मुझे. 

फिर भी क्यों ये ज़िन्दगी थमी सी लगे है मुझे ?

एक अजीब सी कशमकश है! क्या? मालूम नहीं.

पर कभी सब पास तो कभी सब दूर सा लगे है मुझे.…

Continue

Added by Monika Jain on March 12, 2012 at 2:18am — 4 Comments

भरोसा

दिल की धडकनों को महसूस करके देखो.

कुछ देर मेरे साथ चल के देखो.

तुम्हारे सारे ग़म में अपने सीने में छुपा लुंगी.…

Continue

Added by Monika Jain on March 11, 2012 at 12:30am — 6 Comments

"समर्पण"



मुझे दुनिया नहीं, मुझे तुम्हारा साथ चाहिए.

जीवन पथ पर तुम्हारा स्नेह चाहिए .

प्रेम की पराकाष्ठ में ही नहीं,

कंटीले पथ पर भी तुम्हारी बाँहें…

Continue

Added by Monika Jain on March 10, 2012 at 1:00am — 2 Comments

इंतज़ार बस इंतज़ार.............

है प्रियवर,  तुम  कब  आओगे  भेजो  तुम  सन्देश 

थक  गई  मोरी  अँखियाँ अब  तो  भेजो  तुम  सन्देश 

भेजो  तुम  सन्देश  प्रिये  तो झपकूँ अपने  नैन 

राह  तकूँ मै हर  आहट पे  देखूँ  द्वारे …

Continue

Added by Monika Jain on March 1, 2012 at 11:30pm — 7 Comments

आदर्शों पर चल कर तो देखो

आदर्शों पर चल कर तो देखो,

सर उठा कर जी कर तो देखो.



अत्याचार, ज़ुल्म, और भ्रष्टाचार के आगे

आवाज़ बुलंद करके तो देखो.

मन की राह कठिन है

चुनौतियाँ जटिल है,

पर एक बार आवाज़

बुलंद करके तो देखो

आत्मसम्मान से भर उठोगे

गर्व से सर उठा सकोगे (और)

एक बार जो चख लिया

आत्मसम्मान का स्वाद

तो हर चुनौती पार करने को

बलवला उठोगे

बस ज़रूरत है साहस की

ज़रूरत है हिम्मत की.



आदर्शों पर चल कर तो देखो, …

Continue

Added by Monika Jain on February 29, 2012 at 12:00am — 6 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

sushil yadav posted blog posts
7 hours ago
Sushil posted blog posts
7 hours ago
vijay nikore posted a blog post

अनसुने अनकहे के बीच

                        अनसुने अनकहे के बीच.कहे अनसुने-से रहे कुछ जज़्बातउसपर अनकहे एहसासों का…See More
7 hours ago
रोहित डोबरियाल "मल्हार" replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"1 लाख मासिक चाहिए ही क्यों भाई, वर्डप्रेस CRM में वेबसाइट को ट्रांसफर कर दिया जाए, तो सालाना खर्च…"
Oct 15
KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service