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Monika Jain
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बृजेश नीरज commented on Monika Jain's blog post प्रतीक्षारत विरह
"छन्दमुक्त कविता गद्यात्मक होती है लेकिन आदरणीया कविता के वाक्य-विन्यास और गद्य के वाक्य-विन्यास में अन्तर होता है. शिल्प पर काम करना जरूरी है. छन्द विशेषतः दोहों पर काम करें जिससे आपकी कविता में प्रवाह आ सके."
Sep 1
Samar kabeer commented on Monika Jain's blog post प्रतीक्षारत विरह
"मुहतरमा मोनिका जैन "डॉली" जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें । सभी पंक्तियों में 'चाहती है' और अंत में "चाहती हूँ"?"
Aug 28
Monika Jain posted a blog post

प्रतीक्षारत विरह

"प्रिये अपनी दाईं तरफ थोड़ा सा मुड़कर देखो कोई है जो हौले से तुम्हारे सीने पर हाथ रखना चाहती है । तुम्हे नील गगन और खुद को धरा बनाना चाहती है । तुम्हारे आलिंगन में अनगिनत सितारे जगमगाना चाहती है । और तुम्हें बस तुमसे चुराना चाहती है..... तुम्हारे आलिंगन में आकर तुम्हे सब कुछ भुलाना चाहती है । तुम्हारी आनंदातिरेक सिसकियों में बस अपना नाम सुनना चाहती है । तुम्हें समर्पित होकर तुम्हें तुमसे चुराना चाहती है । एक बार तो मुड़ कर देखो प्रिये....इस प्रतीक्षारत विरह में बस तुम्हें अपना बनाना चाहती हूँ…See More
Aug 28
Monika Jain left a comment for aashukavi neeraj awasthi
"Namaskar Mitr bahut lambe samay ke baad phir se is blog par likhna shuru kar rahi hun dubara se. ab koshish karungi ki niymitta bani rahe. aap sabhi ka sahyog chahungi. Dhanywaad"
Aug 27
Monika Jain updated their profile
Aug 27
Monika Jain and Dr Babban Jee are now friends
Aug 27
Sheikh Shahzad Usmani commented on Monika Jain's blog post स्त्रीत्व
"सच बयान करती सार्थक आह्वान करती हुई रचना के लिए हृदयतल से बहुत बहुत बधाई आपको आदरणीया मोनिका जैन जी।"
Mar 20, 2016
रामबली गुप्ता commented on Monika Jain's blog post स्त्रीत्व
"सुंदर अतुकांत"
Mar 18, 2016
narendrasinh chauhan commented on Monika Jain's blog post स्त्रीत्व
"सुन्दर"
Mar 18, 2016
Monika Jain posted a blog post

स्त्रीत्व

"वो सफर लगातार चलता ही रहा.....वो रस्ते बस आगे, और आगे ही बढ़ते रहे। मैं कभी ज़मीन पर तो कभी आसमान पर, दिन भर बुने अपने ख़ाबों की लड़ी सजती रही। अपने ही वजूद को कभी बच्चों में, कभी घर की दीवारों में, तो कभी उनकी आँखों में तलाशती रही....... जानती हूँ सब हैं मेरे, पर.... फिर भी, मैं अपने ख़ाबों के साथ अकेली सफर तय करती रही। और ये आस ये उम्मीद बांधती रही कि, मेरे अस्तित्व से निरंतर झरती जीवन धारा को ये समाज आज नहीं तो कल सहृदय अपनायेगा। फिर मेरे स्त्रित्व को ये किसी एक दिन नहीं वरन हर रोज़…See More
Mar 18, 2016
Monika Jain is now friends with Raj Kumar Rohilla and Preeti
Mar 17, 2016

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर left a comment for Monika Jain
"ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें."
Jul 28, 2015
Raj Kumar Rohilla left a comment for Monika Jain
"           परकृति की पूरक जो तुम हो इसीलिए  तो हार हार कर जीने की मुमुक्षा तुम में है एस्त्रैन भाव  को मेरे हार्दिक नमन"
Jun 23, 2012
UMASHANKER MISHRA commented on Monika Jain's blog post इंतज़ार........
"गम से भरी रचना ...... आज नहीं तो कल ये क़दमों के निशाँ मेरी ओर ज़रूर वापस लौट कर आयेंगे..... हम आज भी तेरे जाने के बाद तेरे कदमों पे सर रख के सजदा करते हैं i प्यार की भक्ति की चरम सीमा..... बहुत सुन्दर रचना"
Jun 11, 2012
PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA commented on Monika Jain's blog post इंतज़ार........
"तुम पुकार लो  , तुम्हारा इन्तजार है  कितना सुन्दर सलोना इजहार है  थक गयी आँखे उनके इन्तजार में  न सूखे अश्क न पलकें थमी  कितना अनोखा दिलवर का प्यार है  आदरणीय मोनिका जी, सादर , बधाई "
Jun 11, 2012
Monika Jain posted a blog post

इंतज़ार........

इंतज़ार........हम आज भी तेरे जाने के बाद, तेरे कदमो के निशाँ पे सर रख के सजदा करते हैं I जो आँख तेरे आने पे झपकना भूल जाती थी, और एकटक निहारा करती थी तुम्हें वही आँखें अब तेरे कदमों की छाप पर टिकी इंतज़ार करती हैं, कि कब ये निशाँ वापस मेरी ओर लौट कर आयेंगे.... कान हर पल तेरी आहात को सुनने के लिए बेताब रहते हैं, दिल-ओ-दिमाग हर वक़्त हर वक़्त तेरे ख़यालों में गुम सा रहता है, दिल हर घडी बेचैन सा और हर धड़कन तुझसे मिलने को बेकरार सी रहती है  ये आँखें तब भी नहीं झपकती थीं, ये आँखें आज भी नहीं झपकती…See More
Jun 10, 2012

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Female
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U. P.
Native Place
Bhind
Profession
Media
About me
RJ, Hindi Script writer and anchor the TV and Stage shows

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प्रतीक्षारत विरह

"प्रिये अपनी दाईं तरफ थोड़ा सा मुड़कर देखो

कोई है जो हौले से तुम्हारे सीने पर हाथ रखना चाहती है ।

तुम्हे नील गगन और खुद को धरा बनाना चाहती है ।

तुम्हारे आलिंगन…
Continue

Posted on August 27, 2018 at 9:30pm — 2 Comments

स्त्रीत्व

"वो सफर लगातार चलता ही रहा.....

वो रस्ते बस आगे, और आगे ही बढ़ते रहे।

मैं कभी ज़मीन पर तो कभी आसमान पर,

दिन भर बुने अपने ख़ाबों की लड़ी सजती रही।

अपने ही वजूद को कभी बच्चों में, कभी घर की दीवारों में,

तो कभी उनकी आँखों में तलाशती रही.......

जानती हूँ सब हैं मेरे, पर.... फिर भी,

मैं अपने ख़ाबों के साथ अकेली सफर तय करती रही।

और ये आस ये उम्मीद बांधती रही कि,

मेरे अस्तित्व से निरंतर झरती जीवन धारा को

ये समाज आज नहीं तो कल सहृदय अपनायेगा।…

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Posted on March 17, 2016 at 6:30pm — 3 Comments

इंतज़ार........

इंतज़ार........

हम आज भी तेरे जाने के बाद, तेरे कदमो के निशाँ पे सर रख के सजदा करते हैं I

जो आँख तेरे आने पे झपकना भूल जाती थी, और एकटक निहारा करती थी तुम्हें

वही आँखें अब तेरे कदमों की छाप पर टिकी इंतज़ार करती हैं,

कि कब ये निशाँ वापस मेरी ओर लौट कर आयेंगे....

कान हर पल तेरी आहात को सुनने के लिए बेताब रहते हैं,

दिल-ओ-दिमाग हर वक़्त हर वक़्त तेरे ख़यालों में गुम सा रहता है,

दिल हर घडी…
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Posted on June 9, 2012 at 6:16pm — 2 Comments

सौन्दर्य और स्वास्थ्य एक दूसरे के पूरक



        सौन्दर्य और स्वस्थ्य दोनो एक ही सिक्के के दो पहलू हैं लेकिन इसके बावजूद भी हम में से ज़्यादातर महिलाऐं सिक्के के एक ही पहलू यानि सिर्फ खूबसूरती पर ही ध्यान देती हैं । और स्वस्थ्य को जाने - अनजाने दरकिनार करती चली जाती हैं । बहुत सी महिलाओं की नज़र में खूबसूरती के मायने हैं आकर्षक मेकअप, खूबसूरत कपड़े, और मैचिंग जूलरी । लेकिन क्या सचमुच खूबसूरती के यही मायने हैं ? हम ये तो नहीं कहते कि आकर्षक कपड़े, ज़ेवर, और मेकअप खूबसूरती का हिस्सा नहीं हैं लेकिन यह…

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Posted on May 19, 2012 at 11:30pm — 8 Comments

Comment Wall (5 comments)

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At 2:20pm on July 28, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्म दिन की हार्दिक शुभकामनायें.

At 9:59pm on June 23, 2012, Raj Kumar Rohilla said…

          

परकृति की पूरक जो तुम हो इसीलिए  तो हार हार कर जीने की मुमुक्षा तुम में है

एस्त्रैन भाव  को मेरे हार्दिक नमन

At 11:09am on May 10, 2012, PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA said…

आदरणीय मोनिका जी, ये मेरा सौभाग्य है की आपने  मुझे  इस  काबिल  समझा. आभार. 

At 10:29am on January 2, 2012, Admin said…

आदरणीया मोनिका जी, ओ बी ओ पर हिंदी टंकण हेतु कई सारे उपाय दिए लिंक पर बताये गए है, आप लिंक देख ले, वैसे सीधे बॉक्स में लिखने वाला टूल भी बहुत बढ़िया काम करता है | आप नीचे दिया लिंक पहले देख ले .........

http://www.openbooksonline.com/forum/topics/5170231:Topic:27913

At 10:00am on January 2, 2012, Neelam Upadhyaya said…

ओबिओ पर आपका स्वागत है .

 
 
 

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