For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

        ज वो बेहद खुश थी। कई दिनों बाद कुछ ठीक-ठाक ग्राहक आये थे। वह अरसे बाद आज रात बच्चों को अच्छा खाना खिला पाई थी। बच्चे भी बहुत दिनों बाद अच्छा खाना खाकर तृप्त दिख रहे थे, "माँ, वाह, मज़ा आ गया !"

         आज की इस आमदनी की बात उसके दल्ले पति से भी न छुपी रह सकी थी। दो-चार थप्पड़ रसीद कर उसने उससे कुछ पैसे ऐंठ लिये। ठेके पर दोस्तों के साथ बैठ, ठर्रा गटकाते हुए उधर वह भी बड़बड़ाये जा रहा था, "वाह मज़ा आ गया !"

(मौलिक एवं अप्रकाशित)

Views: 101

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 21, 2020 at 6:54am

आ. भाई गणेश जी, सादर अभिवादन । उत्तम कथा हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on November 19, 2020 at 9:05pm

आदरणीय गणेश जी बहुत मार्मिक सामाजिक विद्रूपता का सटीक चित्रण किया है...

Comment by TEJ VEER SINGH on November 19, 2020 at 12:26pm

हार्दिक बधाई आदरणीय गणेश जी बागी जी। लाज़वाब लघुकथा।कितने कम शब्दों में कितनी गहरी बात। बहुत खूब।

Comment by Dr. Vijai Shanker on November 10, 2020 at 9:22am


विचित्र किन्तु सत्य। कभी कभार ही ऐसी कहानियां मिलती है। आनंद की अनुभूति भी विचित्र होती है और यदि वह कहीं किसी की विवशता के धरातल पर प्राप्त हुयी हो तो..... .रचना पर बधाई , आदरणीय इंजी० गणेश जी बागी जी , सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 10, 2020 at 7:56am

 'मज़ा' की तासीर पर बहुत ही महीन दृष्टि डाली है आपने, गणेश भाई. एक ओर क्षुधा-तृप्ति का जीवनदायी मज़ा है, तो दूसरी ओर व्यसन की पुष्टि का आततायी मज़ा है. इन दोनों के बीच दायित्वबोध से भरी कर्मठ माँ अपने पारिवारिक समाज में निहायत निरुपाय नारी के तौर पर कितनी विवश, कितनी लाचार जीती हुई है.
इस सोच को सुंदर विन्यास दिया है, आपने. बधाई.

Comment by Chetan Prakash on November 10, 2020 at 5:57am

आदरणीय भाई इं0. गणेश बागी जी नमन ! वाहहहह, बहुत अच्छी लघु कथा है ! बधाई स्वीकार करें !
,

Comment by Veena Gupta on November 10, 2020 at 1:50am

बाग़ी जी,इतने कम शब्दों में सुन्दर अभिव्यक्ति के लिए हार्दिक बधाई

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on November 9, 2020 at 9:45pm

आदाब। बेहतरीन तुलनात्मक तंजदार हार्दिक बधाई आदरणीय सर बागी साहिब।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on PHOOL SINGH's blog post धूप-छांव
"आ. भाई फूल सिंह जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
1 minute ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Chetan Prakash's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन । गजल का प्रयास अच्छा हुआ है । शेष आ. समर जी कह ही चुके हैं । हार्दिक…"
3 minutes ago
Chetan Prakash commented on Chetan Prakash's blog post ग़ज़ल
"आदाब, आदरणीय, आप सही कह रहै है अवकाश मिलते ही आपके संकेतानुसार पुनः सही स्वरूप में…"
10 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Dr. Vijai Shanker's blog post कौन हो तुम — डॉo विजय शंकर
"आ. भाई विजय शंकर जी, सादर अभिवादन । बहुत अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
10 hours ago
Chetan Prakash commented on Chetan Prakash's blog post रोटी
"मोहतरम जनाब, समर कबीर साहब, आदाब, आप कविता, रोटी .तक पहुँचने की ज़हमत की, इसके लिए आपका बहुत-बहुत…"
11 hours ago
Samar kabeer commented on Chetan Prakash's blog post ग़ज़ल
"'हलचल भी नहीं है' तो रदीफ़ है, क़वाफ़ी मतले में 'वो' और 'तो' हैं, बाक़ी…"
11 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post बड़ी नज़ाकत से हमने .....
"आदरणीय  Samar kabeer जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार।"
11 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दस्तक :
"आदरणीय  Samar kabeer जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार।"
11 hours ago
Chetan Prakash commented on Chetan Prakash's blog post दौड़ अपनी-अपनी (लघु- कथा)
" मोहतरम जनाब, समर कबीर साहब, आदाब, आपने लघुकथा " दौड़ अपनी अपनी" तक पहुँचने की…"
11 hours ago
Chetan Prakash commented on Chetan Prakash's blog post ग़ज़ल
"आदाब आदरणीय, समर कबीर साहब ,  उक्त ग़ज़ल के मतले के दोनों मिसरों में चूँकि एक ही काफिया ( हलचल…"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सब्र दशकों से किये है -लक्ष्मण धामी'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति व प्रशंसा के लिए आभार।"
13 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सब्र दशकों से किये है -लक्ष्मण धामी'मुसाफिर' (गजल)
"आ. भाई विजय शंकर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए धन्यवाद ।"
13 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service