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हम उनकी याद में रोए भी मुस्कुराए भी (~रूपम कुमार 'मीत')

बह्र- 1212 / 1122 / 1212 / 22 (112)

अज़ाब-ए-हिज्र में सुख-दुख के गीत गाए भी
हम उनकी याद में रोए भी मुस्कुराए भी [1]

ख़ुदा ने ख़ल्क़ किया है चराग़ जैसा हमें
वही जलाए हमें फिर वही बुझाए भी [2]

अजीब साल ये गुज़रा हमारी जिंदगी में
ख़ुदा करे न दुबारा कभी फिर आए भी [3]

हमारे यार का अंदाज़-ए-इश्क़ सबसे जुदा
कभी हँसाए वो हमको कभी रुलाए भी [4]

गुलाब जैसे लबों से वो हमको चूमता है
निशान प्यार के सीने से फिर मिटाए भी [5]

बनाने वाले ने सब को बनाया ऐसा यहाँ
जो चोट दे भी सके और जो चोट खाए भी [6]

यक़ीन कैसे करूँ बे-वफ़ा की बातों पर
मैं उसके दिल में हूँ तो चीर कर दिखाए भी [7]

~रूपम कुमार 'मीत'

मौलिक व अप्रकाशित

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Comment by Rupam kumar -'मीत' on September 30, 2020 at 8:43am

आदरणीय , लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' साहिब जी , आपको मेरा प्रणाम। ग़ज़ल पर उपस्थिति और हौसला अफ़ज़ाई का हृदय तल से शुक्रिया। , आपका  आशीर्वाद और स्नेह बना रहे  बालक पर सादर |

Comment by Rupam kumar -'मीत' on September 30, 2020 at 7:46am

आदरणीय , लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' साहिब जी , आपको मेरा प्रणाम। ग़ज़ल पर उपस्थिति और हौसला अफ़ज़ाई का हृदय तल से शुक्रिया। , आपका  आशीर्वाद और स्नेह बना रहे  बालक पर सादर |

Comment by Rupam kumar -'मीत' on September 30, 2020 at 7:44am

आदरणीय , सालिक गणवीर साहिब जी , आपको मेरा प्रणाम। ग़ज़ल पर उपस्थिति और हौसला अफ़ज़ाई का हृदय तल से शुक्रिया। सादर |

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on September 30, 2020 at 7:26am

आ. रूपम जी, अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by सालिक गणवीर on September 29, 2020 at 5:51pm

प्रिय रुपम

बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है. वाह.ढेरों बधाइयाँ।

Comment by Rupam kumar -'मीत' on September 29, 2020 at 6:13am

आदरणीया डिम्पल शर्मा जी सुप्रभात, आपको मेरा प्रणाम। ग़ज़ल पर उपस्थिति और हौसला अफ़ज़ाई का हृदय तल से शुक्रिया। आपको शे'र पंसद आए बहुत अच्छा लगा, बालक पर अपना स्नेह बनाए रखें।

Comment by Dimple Sharma on September 29, 2020 at 6:00am

आदरणीय रूपम कुमार जी नमस्ते, वाह बहुत ख़ूब, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें, ग़ज़ल का मतला बहुत ख़ूब हुआ है आदरणीय बधाई स्वीकार करें, दुसरा शेर भी बहुत पसन्द आया , उम्दा ग़ज़ल हुई है आदरणीय मुबारकबाद आपको।

Comment by Rupam kumar -'मीत' on September 28, 2020 at 10:07am

आदरणीय निलेश साहिब जी,  मेरा  प्रणाम आपको, बहुत शुक्रिया आपका, बहुत दुआएं, सलामत रहे और लिखते रहे, बालक पर स्नेह बना रहे सादर |

Comment by Nilesh Shevgaonkar on September 27, 2020 at 11:13pm

अब मुकम्मल हो गया शेर 
बधाई 

Comment by Rupam kumar -'मीत' on September 27, 2020 at 9:50pm

आ. अमीरुद्दीन साहिब जी, बहुत शुक्रिया आपका, एक कोशिश हमने भी की है,

आपने मेरे ख़याल को मरने नहीं दिया, और शे'र  सहीह कर दिया।

हमने यूँ कहा था,

यक़ीन कैसे करें बे-वफ़ा की बातों पर

जो उसके दिल में है वो चीर कर दिखाए भी 

क्या अब यह शे'र सहीह है साहिब??

हूँ शुरुआत में हमें थोड़ा खटक रहा है।

यूँ कह सकतें है क्या?

यक़ीन कैसे करूँ बे-वफ़ा की बातों पर

मैं उसके दिल में हूँ तो चीर कर दिखाए भी   

मार्गदर्शन करें सादर!!

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