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नव रात्री नव रात है,नव जीवन संदेश/

तन मन भवन शुद्ध रखो,आये माँ किस भेष//

भक्तगण नव रात्री में,रखते हैं उपवास/

कन्या पूजन भी करें,माँ का यही निवास//

देखो कैसे सज रहा,माता का दरबार/

माँ के दर्शन को लगी,लम्बी बहुत कतार//

जयकारों से मात के,गूंज रहा दरबार/

माता का आशीष ले,पायें शक्ति अपार//

गरबा रमती मात है,चहुँ दिसि उत्सव होय/

भक्त यहाँ सुख पात हैं,सबके मंगल होय//

हवन अरु जागरण करे,नवरात्री सब लोग/

देती माँ आशीष जो,मिटे क्लेश सब रोग//

धन धान्य और सम्पदा,वैभव खिल खिल जाय/

निश दिन पूजे मात को,सब सम्भव हो जाय//

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Comment by ASHISH KUMAAR TRIVEDI on April 16, 2013 at 10:41am

सुन्दर

Comment by Vinita Shukla on October 17, 2012 at 2:23pm

नवरात्रि के सुन्दर अवसर पर, भक्ति का रंग घोलने वाले भावसिक्त दोहे. बधाई अशोक जी.

Comment by Rekha Joshi on October 17, 2012 at 10:03am

धन धान्य और सम्पदा,वैभव खिल खिल जाय/

निश दिन पूजे मात को,सब सम्भव हो जाय//

बहुत सुन्दर दोहे रचे है,आदरणीय अशोक जी ,हार्दिक बधाई 

Comment by Ashok Kumar Raktale on October 16, 2012 at 10:06pm

आदरणीय खान साहब,

                      सादर नमस्कार, आपसे स्नेहाशीष पाकर मन गदगद हुआ. बहुत बहुत धन्यवाद.

Comment by Ashok Kumar Raktale on October 16, 2012 at 10:05pm

आदरणीय लड़ीवाला जी, आ. संदीप जी, आद. राजेश कुमारी जी आप ने दोहों को पसंद किया. आप सभी का हार्दिक आभार.

आप सभी को एवं समस्त मंच के सदस्यों को नवरात्रि कि हार्दिक शुभकामनाएं.

Comment by Ashok Kumar Raktale on October 16, 2012 at 10:02pm

आदरणीय रविकर जी

                         सादर नमस्कार, दोहों पर आपकी मुहर पाकर बहुत प्रसन्नता हुई. धन्यवाद.

Comment by लतीफ़ ख़ान on October 16, 2012 at 9:34pm

Ashok ji aadab, navratri par apke dwara rachit dohe ati uttam hain. badhai swikar karein.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on October 16, 2012 at 8:42pm

अशोक कुमार रक्ताले जी बहुत सुन्दर उत्कृष्ट दोहे कहे हैं बहुत बहुत बधाई नवरात्र की शुभकामनाएं 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on October 16, 2012 at 12:30pm

आदरणीय अशोक सर जी सादर प्रणाम
बहुत सुन्दर दोहे रचे हैं आपने शारदीय नवरात्र की शुभकामनाओं सहित बहुत बहुत बधाई आपको

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on October 16, 2012 at 11:55am

नव रात्री नव रात है,नव जीवन संदेश/

तन मन भवन शुद्ध रखो,आये माँ किस भेष//

सुन्दर  दोहे सुंदर संदेश्त्मक भाव  नव रात्र  स्थापना के प्रथम दिन उपलब्ध करने हेतु धन्यवाद और हार्दिक बधाई श्री अशोक रक्ताले जी 

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