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अपने ब्लॉग पर सर्वप्रथम पोस्ट ( रचना )माँ को समर्पित ...!!

                -1-

बीज रूप ॐ मिला,जग को आधार मिला,
शक्ति रूप में हुआ है,तेरा विस्तार माँ  !
हर युग में कपूत , देते रहे कष्ट धूप  ,
उनका भी हित किया,कितनी उदार माँ !
आँचल की छांह मिल,दुख सारे गए मिट ,
तेरे नयनों से झरे ,हर पल प्यार माँ !
कोई नहीं दुनिया में,तुझसा कृपालु मात ,
सामने तुम्हारे लघु , सारा संसार माँ !!
                 -2-
सरस,सरल,मृदु ,अधरों पै हास धर ,
पल-पल बिखराती,नित दिव्य-ज्ञान माँ !
स्वाभिमानी,स्वावलंबी,पंख मिले उन्नति को,
अथक है गतिमान ,मेरा दिनमान माँ !
वंदना करे तुम्हारी, सारा जग बलिहारी ,
आदि-अंत,तुमसे ही , मेरी पहचान माँ !
 मात तुम सीप सम ,नन्हे-नन्हे मोती हम,
गर्भ में मिला है तेरे ,हमें प्राण दान माँ !!

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Comment

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Comment by वीनस केसरी on December 3, 2012 at 12:10am

सुन्दर भावाभिव्यक्ति

सादर स्वागत है

Comment by अरुन 'अनन्त' on December 2, 2012 at 11:45am

जय माता दी सुन्दर प्रस्तुति


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on December 1, 2012 at 8:28pm

आपका सादर स्वागत है आदरणीया.

Comment by Dr. Chandresh Kumar Chhatlani on December 1, 2012 at 8:24pm

गर्भ में मिला है तेरे ,हमें प्राण दान माँ !!

मृत्यु सर्वथा सत्य है, साथ ही प्राणों का उद्भव माता के द्वारा है, यह भी सर्वथा सत्य है| धन्य है जननी, जो प्राणदान के साथ अपना जीवन समर्पण भी कर देती है ||| आपके ब्लॉग की  पहली रचना के इतने भावपूर्ण होने पर बहुत बधाई, भावना जी  |||

Comment by seema agrawal on December 1, 2012 at 8:07pm

प्रथम प्रस्तुति  के साथ स्वागत है आपका 

बहुत सुन्दर और प्रभावशाली  घनाक्षरी के लिए हार्दिक बधाई  भावना जी 

Comment by Ashok Kumar Raktale on December 1, 2012 at 7:52pm

आदरेया भावना जी 

               सादर, माँ को समर्पित सुन्दर घनाक्षरी रचना पर बधाई स्वीकारें.स्वागत है.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on December 1, 2012 at 7:51pm

आदरणीया डॉ. भावना जी,

 जगज्जननी माँ शक्ति स्वरूपा को समर्पित घनाक्षरी छंद बेहद सरस व प्रवाहमय है.

प्रथम दो पंक्तियाँ बेहद गहन और सुन्दर हैं 

बीज रूप ॐ मिला,जग को आधार मिला,
शक्ति रूप में हुआ है,तेरा विस्तार माँ  !

हार्दिक बधाई इस बेहतरीन पवित्रतम भावयुक्त प्रथम ब्लॉग पोस्ट पर.

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on December 1, 2012 at 4:03pm

मात तुम सीप सम ,नन्हे-नन्हे मोती हम,
गर्भ में मिला है तेरे ,हमें प्राण दान माँ !!  - सुन्दर समर्पित भावों के साथ प्रविष्टि के लिए बधाई और शुभ कामनाए 

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on December 1, 2012 at 3:50pm

आदरणीया भावना जी सादर प्रणाम 
बहुत सुन्दर घनाक्षरी रची है माँ के सन्दर्भ में आपने सादर बधाई आपको

Comment by shalini kaushik on December 1, 2012 at 3:39pm

बीज रूप ॐ मिला,जग को आधार मिला,
शक्ति रूप में हुआ है,तेरा विस्तार माँ  !
हर युग में कपूत , देते रहे कष्ट धूप  ,
उनका भी हित किया,कितनी उदार माँ !
आँचल की छांह मिल,दुख सारे गए मिट ,
तेरे नयनों से झरे ,हर पल प्यार माँ !
कोई नहीं दुनिया में,तुझसा कृपालु मात ,
सामने तुम्हारे लघु , सारा संसार माँ !!

bahut sundar bhavnayen prastut kee hain aapne bhavna ji.pahli blog post maa ko samarpit kar aapne apna jeevan dhanya kar liya hai .aabhar

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