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पापा की लाडली .... मीना पाठक

मै अपने पापा 

की  लाडली 
उनकी ऊँगली 
पकड़   कर 
मचलती इठलाती 
थोड़ी ही दूर चली थी 
कि 
काल चक्र ने 
एक झटके से 
उनके हाथ से 
मेरी ऊँगली छुड़ा दी
 
अब मैं अकेली 
इस निर्जन 
बियावान जंगल 
में 

इधर - उधर 

भटकती   हूँ

एक सुरक्षा भरी 
छाँव  के  लिए 
जहाँ  बैठ  कर
मैं अपने आप को 
सुरक्षित महसूस 
करूँ 

जैसे अपने पापा 
की ऊँगली पकड़ कर 
अपने आप को 
सुरक्षित महसूस 
करती थी 

मैं 

अपने पापा की 

लाडली ।
  • मीना 

(चित्र-गूगल)

मौलिक व अप्रकाशित 

Views: 1063

Comment

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Comment by vijay nikore on February 21, 2013 at 10:47am

आदरणीया मीना जी:

 

मैं आज ही बेटी के पास कुछ दिन बिता कर आया हूँ,

और मैं जानता हूँ कि यह रिश्ता कितना कोमल,

कितना प्यारा है ! इस विषय पर इस सुन्दर कविता

के लिए आपको बधाई।

 

विजय निकोर

Comment by Dr.Ajay Khare on February 20, 2013 at 3:09pm

MEENBA JI BADHAI SUNDER RACHNA

Comment by Rekha Joshi on February 20, 2013 at 12:57pm

सुन्दर भाव मीना जी,बहुत बहुत बधाई

Comment by भरत तिवारी (Bharat Tiwari) on February 20, 2013 at 9:51am

bahut sundar ....

Comment by ajay yadav on February 19, 2013 at 11:52pm

सुंदर भाव भरी रचना ...बधाई मीना जी |

Comment by Aarti Sharma on February 19, 2013 at 8:26pm

बहुत सुन्दर भाव मीना जी...बधाई स्वीकारें

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on February 19, 2013 at 7:50pm

वाह बहुत भावनात्मक रचना हुई है आदरणीया

बहुत बहुत बधाई इस हेतु


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 19, 2013 at 6:52pm

आपकी रचना ने अचानक वक्त से बहुत पीछॆ ढकेल दिया और मैं अपने पापा कि उँगली थामे चली जा रही हूँ ,फिर उनके कदम से कदम मिलाकर चल रही हूँ ,फिर उनसे आगे दौड़ रही हूँ ,बहुत आगे आकर पीछॆ मुड़कर देखती हूँ तो पापा जा चुके थे,और बस कुछ नही कह सकती इससे आगे ,बधाई आपको मीना जी 

Comment by बृजेश नीरज on February 19, 2013 at 6:36pm

पिता पुत्री का रिश्ता ही कुछ अनोखा होता है। 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on February 19, 2013 at 4:28pm

कितने महत्वपूर्ण भाव सांझा हुए है इस कविता में आदरणीया मीना जी, सच में पिता की अंगुली नें पूरे आवरण का एहसास करा दिया. पिता और पुत्री का रिश्ता कितना प्यारा होता है, उसे शब्दों में कितनी सुन्दरता से आपने बाँधा है, इस भाव सम्प्रेषण के लिए आपको बहुत बहुत बधाई . सादर.

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