For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सरगम भरता, कल-कल करता, 

झर-झर  झरता  निर्झर  सस्वर I

तम को छलता, पग-पग चलता,

धक्-धक् जलता सूरज सत्वर  II

 

सन-सन बहता, गुम-सुम रहता, 

क्या-कुछ  कहता रह-रह मारुत  I

मह-मह उपवन, बह-बह कर मन,

यह क्या उलझन है रुत अजगुत II

 

छन-छन पायल, तन-मन घायल, 

मन्मथ  मायल  आतुर  बाले !

झन-झन  झनके, कंगन  खनके ,

बोले – ‘प्रिय  हैं  आने  वाले II’

 

थक-थक  नैना,  बुद-बुद  बैना, 

पचि-पचि  रैना,  अंसुवन काटी  I 

डिग-डिग संयम, धिग-धिग प्रियतम,

ढिग-ढिग  बंधन की  परिपाटी II

 

यदि  आ  जाते, रस  सरसाते,   

मधु  बरसाते,  मैं  मदमाती  I

मंदिर  मैय्या   पुहुप  दुनैय्या,   

लावा-लैय्या,  मैं  भर लाती II

(मौलिक व् अप्रकाशित )

Views: 995

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on April 16, 2015 at 8:05pm

अनुज भंडारी  जी

आपका आभार .


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 16, 2015 at 1:56pm

रचना की गेयता अंत तक जाते-जाते बहुगुणी हो जाती है, आदरणीय गोपाल नारायनजी.

हार्दिक धन्यवाद.

सास्वर  शब्द मुझे समझ में नहीं आया.

एक बात,

यदि आपने इस रचना के लिए पादाकुलक शब्द का प्रयोग किया है तो क्या प्रति चरण चार चौकल के अलावा पादाकुलक के अन्य नियम लागू नहीं होने चाहिए?  चौपाई की एक अर्द्धाली क्याभिन्न तुकान्तता की हो सकती है ? फिर इस पादाकुलक ने क्या गुनाह किया है ?

Comment by Shyam Narain Verma on April 16, 2015 at 11:01am

सुंदर भाव लिए, उत्तम रचना के लिए बधाई ....

 सादर 

Comment by shree suneel on April 16, 2015 at 1:06am
यदि आ जाते, रस सरसाते,
मधु बरसाते, मैं मदमाती I
मंदिर मैय्या पुहुप दुनैय्या,
लावा-लैय्या, मैं भर लाती II"
आ0 गोपाल नारायण सर, मुग्ध हूँ इस सुन्दर रचना पर. शब्द-विन्यास.. अहहह!!! बधाई

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 15, 2015 at 11:09pm

बहुत सुन्दर प्रस्तुति आदरणीय ,समान् स्वर के शब्दों का बेहतरीन चयन 

सन-सन बहता, गुम-सुम रहता, 

क्या-कुछ  कहता रह-रह मारुत  I

मह-मह उपवन, बह-बह कर मन,

यह क्या उलझन है रुत अजगुत II   अतिसुन्दर 

वैसे हर बंद सरस है ...बहुत बहुत बधाई आपको 

 

Comment by Hari Prakash Dubey on April 15, 2015 at 9:57pm

आदरणीय  डॉक्टर गोपाल नारायण सर , बहुत ही शानदार/ जबरदस्त   रचना , हार्दिक बधाई  ! सादर 

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on April 15, 2015 at 8:32pm

अति सुन्दर! मज़ा आ गया!मन आन्नद-विभोर हो गया! अभिनन्दन

Comment by Sushil Sarna on April 15, 2015 at 7:43pm

यदि आ जाते, रस सरसाते,
मधु बरसाते, मैं मदमाती I
मंदिर मैय्या पुहुप दुनैय्या,
लावा-लैय्या, मैं भर लाती II

वाह आदरणीय वाह बेहद खूबसूरत प्रस्तुति … हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय।

Comment by Dr. Vijai Shanker on April 15, 2015 at 6:36pm
डिग-डिग संयम, धिग-धिग प्रियतम,
ढिग-ढिग बंधन की परिपाटी II
सुन्दर, बहुत ही सुन्दर , आकर्षक, शिक्षाप्रद भी, बहुत बहुत बधाई , आदरणीय डॉ o गोपाल नारायण जी , इस प्रस्तुति, पर, सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on April 15, 2015 at 6:30pm

आदरणीय बड़े भाई गोपाल जी , क्या लाजवाब रचना की है , शब्दों का चयन भी बहुत सुन्दर लगा , पढ़ के मज़ा आ गया । आपको हार्दिक बधाइयाँ ॥

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ.लक्ष्मणसिह धानी, 'मुसाफिर' साहब  खूबसूरत विषयान्तर ग़ज़ल हुई  ! हार्दिक …"
13 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर मुक्तक हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
22 minutes ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
8 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"ग़ज़ल   बह्र ए मीर लगता था दिन रात सुनेगा सब के दिल की बात सुनेगा अपने जैसा लगता था…"
23 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'

बदला ही राजनीति के अब है स्वभाव में आये कमी कहाँ  से  कहो  फिर दुराव में।१। * अवसर समानता का कहे…See More
23 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
" दोहा मुक्तक :  हिम्मत यदि करके कहूँ, उनसे दिल की बात  कि आज चौदह फरवरी, करो प्यार…"
yesterday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"दोहा एकादश. . . . . दिल दिल से दिल की कीजिये, दिल वाली वो बात । बीत न जाए व्यर्थ के, संवादों में…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"गजल*****करता है कौन दिल से भला दिल की बात अबबनती कहाँ है दिल की दवा दिल की बात अब।१।*इक दौर वो…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"सादर अभिवादन।"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-183
"स्वागतम"
yesterday
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद' जी सादर नमस्कार, रास्तो पर तीरगी...ये वही रास्ते हैं जिन…"
Friday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service