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दर पर किसे रोकना चाहते हो?-ग़ज़ल

22 122 122 122

हँसती निगाहें अधर मुस्कुराते
सच सच बताओ कि क्या चाहते हो?

रेशम सी ज़ुल्फ़ें हैं उड़तीं हवा से
बोलो किसे बांधना चाहते हो?

गालों पे ये जो भवर है तुम्हारे
किसको डुबाना भला चाहते हो?

बाँहों पे खुद की टिका करके सर तुम
दर पर किसे रोकना चाहते हो?

बोलो अदाओं की गिराकर
करना किसे तुम फ़ना चाहते हो?

मौलिक-अप्रकाशित

Views: 602

Comment

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Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on July 9, 2016 at 10:06am
आदरणीय रवि सर सादर प्रणाम। बिजली शब्द छूट गया है
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on July 9, 2016 at 10:05am
आदरणीय राहिला जी सादर आभार
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on July 9, 2016 at 10:04am
आदरणीय महेंद्र कुमार जी सादर आभार।
Comment by Ravi Shukla on July 8, 2016 at 11:08am

आदरणीय पंकज कुमार मिश्र जी. बहुत-बहुत बधाई आदरणीय अशोक जी के कथन पर ध्‍यान दीजिये सही में बिजली कही रह गई है । हा हा हा टंकण त्रुटि होगी अशोक जी सही हा जाएगी

Comment by Rahila on July 8, 2016 at 10:53am
बेहद दिलकश ग़ज़ल हुयी आदरणीय सर जी!बहुत सुंदर।सादर
Comment by Mahendra Kumar on July 7, 2016 at 9:36pm
इस ग़ज़ल के लिये हार्दिक बधाई स्वीकार करें पंकज जी, अच्छे अशआर हुए हैं, सादर!
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on July 7, 2016 at 8:29pm
आदरणीय सुशील सर सादर प्रणाम, बहुत बहुत आभार
Comment by Pankaj Kumar Mishra "Vatsyayan" on July 7, 2016 at 8:29pm
आदरणीय अशोक सर सादर प्रणाम और हार्दिक आभार। सही पकडे हैं-बिजली शब्द आते ही यूपी का पॉवर कट सिस्टम लागू हो जाता है।☺☺☺☺☺☺
Comment by Sushil Sarna on July 7, 2016 at 1:48pm

बाँहों पे खुद की टिका करके सर तुम
दर पर किसे रोकना चाहते हो?

बोलो अदाओं की गिराकर
करना किसे तुम फ़ना चाहते हो?

वाह अादरणीय पंकज जी बहुत दिलकश अशअार हुए हैं ... शेर दर शेर दाद कबूल फरमाएं।

Comment by Ashok Kumar Raktale on July 7, 2016 at 11:52am

वाह ! बहुत सुंदर आदरणीय पंकज कुमार मिश्रा जी. बहुत-बहुत बधाई. अंत में बिजली कहीं अटक गई है.देख लें.सादर.

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