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जो अपने माँ-बाप के - सलीम रज़ा

22 22 22 22 22 2
जो अपने माँ-बाप के दिल को दुखाएगा
चैन-ओ- सुकूँ वो जीवन भर ना पाएगा
-
हक़ बातें तू हरगिज़ ना कह पाएगा
अहसानों के तले  अगर दब जाएगा
-
उस दिन दुनिया ख़ुशिओं से भर जाएगी
जिस दिन प्रीतम लौट के घर को आएगा
-
भूँखा -प्यासा जब देखेगी बेटों को
माँ का दिल टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा
-
उसकी मुरादें सब पूरी हो जाएंगी
दर पे उसके जो दामन फैलाएगा
-
मेरी ग़ज़लों के कुछ शे'र सुना दीजे
जख़्म-ए-दिल को कुछ तो दवा मिल जाएगा 
-
क्यूं दौलत पे लोग रज़ा इतराते हैं
ये सब कुछ तो मिट्टी में मिल जाएगा
..
मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment by SALIM RAZA REWA on January 9, 2018 at 9:26pm
जनाब अफ़रोज साहब यक़ीनन आप सही फ़रमा रहें हैं,
इस ग़लती को सही कर लिया जाएगा...
आपकी नज़र की दाद के साथ शुक्रिया.. क़ुबूल करें
Comment by SALIM RAZA REWA on January 9, 2018 at 9:23pm
जनाब समर साहब आदाब,
बच्चो के सवाल करने पर बड़े नाराज़ नहीं होते.. दुआओं में साथ रखे.
Comment by SALIM RAZA REWA on January 9, 2018 at 9:21pm
आ. राम अवध जी,
ग़ज़ल को पसंद करने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया.
Comment by Afroz 'sahr' on January 9, 2018 at 3:50pm
जनाब सलीम रज़ा साहिब इस रचना पर बधाई स्वीकार करें।
मिसरा " ज़ख़्म ए दिल को कुछ तो दवा मिल जाएगा"
में लफ़्ज़ "दवा" मुअन्नस अर्थात स्त्रीलिंग है। आपने पुल्लिंग बाँधा है। देखिएगा,,,
Comment by Samar kabeer on January 9, 2018 at 2:27pm

जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल है, बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Ram Awadh VIshwakarma on January 9, 2018 at 6:37am

खूबसूरत ग़ज़ल के लिये बधाई आदर्णीय सलीम रज़ा साहब

Comment by SALIM RAZA REWA on January 8, 2018 at 5:46pm
भाई सुरेन्द्र नाथ सिंह जी,
आपकी नवाज़िश के लिए शुक्रगुजार हूँ.
Comment by SALIM RAZA REWA on January 8, 2018 at 5:45pm
जनाब आरिफ साहिब आपकी,
आपकी मुबारक़बाद का तहे दिल से शुक्रिया.. बांकी गुणी जानो का इंतज़ार....
Comment by SALIM RAZA REWA on January 8, 2018 at 5:43pm
आ. काली प्रसाद जी,
आपकी तारीफ के लिए तहे दिल से शुक्रिया.
Comment by नाथ सोनांचली on January 8, 2018 at 1:47pm

आद0 सलीम रज़ा साहब सादर अभिवादन। बेहतरीन ग़ज़ल। मतला बेहतरीन। दूसरे शेर पर अतिरिक्त तालियाँ। बहुत बहुत बधाई इस ग़ज़ल पर।सादर

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