For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हाँथो में तेरे हमदम जादू नहीं तो क्या है - SALIM RAZA REWA

221 2122 221 2122
हाथों में तेरे हमदम कैसा ये फ़न छुपा है 
मिट्टी को तू ने छूकर सोना बना दिया है
-
उस दिन से जाने कितनी नज़रें लगी हैं मुझपर 
जिस दिन से तूने मुझको अपना बना लिया है
-
यूँ ही रहे सलामत खिलता हुआ ये चेहरा 
तू ख़ुश रहे हमेशा  मेरी यही दुआ है
-
आंखें हैं सुर्ख़  रुख़ पर बिखरे हुए हैं गेसू
हिज्रे सनम में शब भर क्या जागता रहा है
-
इक पल में मुस्कुराना इक पल में रूठ जाना
तेरी इसी अदा ने दीवाना कर दिया है
-
तेरी ख़ुशी में ख़ुश हूँ ग़म में तिरे परेशाँ
तेरा है हाल जो भी वो हाल अब मेरा है 
-
देकर सज़ा-ए-फाँसी ख़्वाहिश वो पूछते हैं
अब क्या उन्हें बताएं क्या आख़िरी रज़ा है
_______________________________
मौलिक व अप्रकाशित

Views: 226

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on March 11, 2018 at 6:04am

आद0 सलीम जी सादर अभिवादन। बहुत बेहतरीन ग़ज़ल, और इस ग़ज़ल के हवाले से चर्चा भी काबिलेतारीफ। आद0 समर साहब से हम सभी सीखते है। बहुत बहुत दाद और मुबारकबाद इस प्रस्तुति पर। सादर

Comment by SALIM RAZA REWA on March 8, 2018 at 10:00pm
आ. बृजेश जी,
ग़ज़ल को अपनी मुहब्बत से नवाज़ने के लिए शुक्रिया,
कहां खो जाते हैं भाई आप ब्लाग़ के सक्रिय सदस्यों में है, आपकी उपस्थिति में मज़ा आता है...
Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on March 8, 2018 at 7:23pm

वाह क्या कहने आदरणीय सलीम जी..बहुतखूब ग़ज़ल कही..

Comment by SALIM RAZA REWA on March 8, 2018 at 5:26pm
आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर',
जी ग़ज़ल पसंद करने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया,
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 8, 2018 at 4:12pm

आ. भाई सलीम जी , सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by SALIM RAZA REWA on March 7, 2018 at 5:59pm
जनाब तस्दीक साहब,
आपकी महब्बत के लिए शुक्रिया...
यह पाठशाला है और हम तो अभी तालीबे इल्म है...
बाक़ी मेरा मतलब तो समझ ही लिए हैं....
Comment by Tasdiq Ahmed Khan on March 7, 2018 at 1:36pm

जनाब सलीम रज़ा साहिब ,अच्छी ग़ज़ल हुई है ,मुबारकबाद क़ुबूल फरमायें। 

गुणीजनों की बातों का संज्ञान लें।

Comment by SALIM RAZA REWA on March 7, 2018 at 11:31am
जी हेडिंग बदलना ही भूल गए..
Comment by Samar kabeer on March 7, 2018 at 10:58am

आमीन ।

हेडिंग में भी 'हाँथो' को " हाथों" कर लें ।

Comment by SALIM RAZA REWA on March 7, 2018 at 10:39am
जनाब समर साहब,
आपकी महब्बत के लिए शुक्रिया, कभी कभी experiment हो जाता है, बहरहाल
आपके निगहबानी में, हमेशा सीखने को मिलता है, ख़ुदा आपको अच्छा रखे.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' posted a blog post

जागो उठो हे लाल तुम (मधुमालती छंद)

(14 मात्राओं का सम मात्रिक छंद, सात सात मात्राओं पर यति, चरणान्त में रगण अर्थात गुरु लघु गुरु)जागो…See More
17 minutes ago
dr neelam mahendra added a discussion to the group सामाजिक सरोकार
Thumbnail

सामाजिक न्याय की तरफ एक ठोस कदम

सामाजिक न्याय की तरफ एक ठोस कदम…See More
22 minutes ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' posted blog posts
28 minutes ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल: न हसरतों से ज़ियादा रखें लगाव कभी ...(१२ )
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी , सदर नमस्कार | आपकी उत्साहवर्धक…"
1 hour ago
Jitendra sharma joined Admin's group
Thumbnail

हिंदी की कक्षा

हिंदी सीखे : वार्ताकार - आचार्य श्री संजीव वर्मा "सलिल"
2 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on विनय कुमार's blog post अपनों का दर्द- लघुकथा
"आद0 विनय कुमार जी सादर अभिवादन। बढ़िया लघुकथा लिखी आपने, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार कीजिये"
3 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Mahendra Kumar's blog post ग़ज़ल : कैसे बनता है कोई शख़्स तमाशा देखो
"आद0 महेंद्र जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने, बधाई स्वीकार कीजिये।"
3 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Balram Dhakar's blog post ग़ज़ल-बलराम धाकड़ (किसने सूरज यहाँ खंगाले हैं)
"आद0 बकराम धाकड़ जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने, बधाई स्वीकार कीजिये"
3 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post ग़ज़ल: न हसरतों से ज़ियादा रखें लगाव कभी ...(१२ )
"आद0 गिरधारी सिंह गहलोत जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल पर दिली मुबारकबाद,, शेष आद0 समर साहब के बातों का…"
3 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on TEJ VEER SINGH's blog post देहलीज़  -  लघुकथा -
"आद0 तेजवीर सिंह जी सादर अभिवादन। अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें"
3 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on विनय कुमार's blog post कसक- लघुकथा
"आद0 विनय जी सादर अभिवादन। बढ़िया लघुकथा कही आपने, बधाई स्वीकार कीजिये"
4 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Sushil Sarna's blog post ३ क्षणिकाएं :
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। तीनों क्षणिकाएँ उत्तम हैं। इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
4 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service