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आशीष यादव
  • 35, Male
  • ghazipur, uttarpradesh
  • India
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आशीष यादव's Discussions

क्या भारत मेँ अन्तर्माध्यमिक तक हिन्दी एक अनिवार्य विषय नही होनी चाहिए
15 Replies

आज जहाँ सुनिये वहीँ भाषा का बिगड़ा स्वरूप सुनाई देता है। किस पुरुष का कर्ता है और कौन सी क्रिया लग गई पता ही नही। यह भी नही की यह युवा पीढ़ी ढंग से आंग्ल भाषा ही जानती हो। तो क्या हमारी और सरकार की यह…Continue

Started this discussion. Last reply by आशीष यादव Jul 28, 2012.

 

Welcome, आशीष यादव!

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amita tiwari and आशीष यादव are now friends
May 11
आशीष यादव posted a blog post

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे हैं,और हम... जो खेतों से कटकर आ रहे हैं।वे हमारे 'अधिकार' नहीं निचोड़ते,वे हमारे भीतर कहीं आत्मा तक निचोड़ते हैं।पहले वे मीठी बातें करते हैं, जैसे शक्कर की…See More
May 11
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत अच्छे दोहे रचे गए हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
May 11
आशीष यादव commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"एक बेहतरीन ग़ज़ल रचा है आपने। बिलकुल सामयिक।  इस बढ़िया रचना पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
May 11
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"सदियों से मनुष्य प्रकृति का शोषण करता रहा है, जिसे विकास समझता रहा है वह विनास की एक एक सीढ़ी है।  आज किसी और को नुक्सान हो रहा है कल दूसरे को होगा।  एक उचित कविता रची गई है।"
May 11
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . .अधर
"वाह। "
May 11
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .विविध
"आदरणीय श्री सुशील जी नमस्कार।  बहुत बढ़िया दोहों की रचना हुई है।  बधाई स्वीकार कीजिए।"
May 11
आशीष यादव commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post कुंडलिया
"आदरणीय सुरेश जी नमस्कार । बढ़िया छंद रचा गया है।  हार्दिक बधाई।"
May 11
आशीष यादव commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"आदरणीय सुशील जी, जीवन के यथार्थ को दिखाते दोहे बेहतरीन बने हैं।  हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।"
May 11
आशीष यादव commented on vijay nikore's blog post प्यार का पतझड़
"कुछ चीज़ों को जब कहना मुश्किल हो जाता है तब वह कविता बनकर सामने आ जाती है। एक बेहतरीन कविता पर बधाई स्वीकार कीजिए।"
May 11
आशीष यादव commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
"एक भावपूर्ण मर्मस्पर्शी कविता पर आपको बधाई।  आदरणीय Saurabh Pandey जी की टिप्पणी ही इस कविता की ऊँचाई को बयां करने के लिए बहुत है "
May 11
आशीष यादव commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post कविता
"इस पटल पर प्रकाशित होने के 6 साल बाद इस कविता को पढ़ रहा हूं। भावों को गीत बना देना, कविता बना देना एक कारीगरी है। आपने इसके साथ न्याय किया है।  मेरी तरफ से बधाई स्वीकार करें।"
May 11
आशीष यादव commented on Awanish Dhar Dvivedi's blog post ग़ज़ल
"जो भी बोलना चाहा आपने अच्छा बोला। बाकी कमी बेसी आदरणीय उस्ताद जन बोलना चाहेंगे।"
May 11
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जिस प्रकार हम लाइव तरही मुशायरा, चित्र से काव्य तक, obo लाइव महा उत्सव इत्यादि का आयोजन करते हैं उसे सप्ताहांत या किसी खास समय पर वीडियो स्वरूप में लाइव आकर लोग अपनी रचना सुनाएं तथा उसे पोस्ट भी करें। सदस्यों की उपस्थिति के अनुसार प्रत्येक को 2 से 5…"
May 2
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"मै मंच के प्रारंभिक दिनों से ही जुड़ा हुआ हूं। इसका बंद होना बहुत दुखद होगा। मुझे लगता है कि कुछ समय निकाल कर वरिष्ठ जनों को इस पर बात करनी चाहिए।  इस सीखने सिखाने की परंपरा के मंच का बंद होना वाकई बहुत दुखद होगा। यदि सभी सक्रिय सदस्य कुछ समय…"
May 2
आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत मनुष्य को संवेदनहीन कर रहा है. यह मोबाइल का युग जिसने सबको अपनी गिरफ्त में ले रखा है जिससे नवजात बच्चे तक अछूते नहीं हैं . इसी को ध्यान में रखकर मैंने…See More
Apr 20

Profile Information

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Male
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GHAZIPUR, U.P.
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work in defence
About me
एक सीधा-सादा इन्सान जो जीवन एवँ मानव की सच्चाईयों को जानने मे लगा हुआ है।

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आशीष यादव's Blog

गन्ने की खोई

पाँच सालों की उम्र,

एक लोहे के कोल्हू में दबी हुई है।

दो चमकदार धूर्त पत्थर (आंखें) हमें घुमा रहे हैं,

और हम... जो खेतों से कटकर आ रहे हैं।

वे हमारे 'अधिकार' नहीं निचोड़ते,

वे हमारे भीतर कहीं आत्मा तक निचोड़ते हैं।

पहले वे मीठी बातें करते हैं, जैसे शक्कर की चाशनी,

फिर हमें परतों में दबाकर,

हमारा 'रक्त' मत पेटियों (ईवीएम) के गिलास में भर लेते हैं।

जब चुनावी कोल्हू रुकता है,

तब हम इंसान नहीं बचते...

हम…

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Posted on May 11, 2026 at 9:33am — 1 Comment

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत मनुष्य को संवेदनहीन कर रहा है. यह मोबाइल का युग जिसने सबको अपनी गिरफ्त में ले रखा है जिससे नवजात बच्चे तक अछूते नहीं हैं . इसी को ध्यान में रखकर मैंने मुख्य शीर्षक मशीनी मनुष्य के अंतर्गत कई कविताओं को लिखने की कोशिश की है.

01

शीर्षक: कारपोरेट कीबोर्ड 

उंगलियाँ नाचती हैं…

मकाम पर नहीं, काली कुंजियों के मैदान…

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Posted on April 20, 2026 at 12:31am

जाने तुमको क्या क्या कहता

तेरी बात अगर छिड़ जाती

जाने तुमको क्या क्या कहता

सूरज चंदा तारे उपवन

झील समंदर दरिया कहता

कहता तेरे होंठ गुलाबी

जैसे सूरज निकल रहा है 

कहता बदन तुम्हारा ऐसा

जैसे सोना पिघल रहा है 

मै तुमको सम्मोहक कहता

मै मनभावन रत्ना कहता

कहता तेरा रूप बहारों

की तरुणाई के जैसा है

और बदन, कहता संगमरमर

सी चिकनाई के जैसा है

तुमको पूनम की रातों का

जगमग जगमग चंदा कहता

तेरे…

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Posted on January 7, 2025 at 8:30pm — 1 Comment

गज़ल : पत्थरों पर चल रहा हूं

2122 2122

पत्थरों पर चल रहा हूँ

रास्तों को छल रहा हूँ 1

लग रहा हूँ आज मीठा

सब्र का मैं फल रहा हूँ 2

कर दिया उनको पवित्तर 

यार गंगा जल रहा हूँ 3 

अब नहीं ख्वाहिश किसी की

हाँ कभी बेकल रहा हूँ 4

आज इतनी गाड़ियाँ है

मैं कभी पैदल रहा हूँ 5

याद आऊँ, मुस्कुरा दो 

वह तुम्हारा कल रहा हूँ 6

मैं डुबोया हूँ खुद ही को

स्वयं का दलदल रहा हूँ…

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Posted on January 19, 2023 at 11:56pm — 1 Comment

Comment Wall (45 comments)

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At 11:15pm on August 6, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

प्रिय आशीष जी.....मेरी कविता को पसंद करने के लिए आपका हार्दिक आभार.....

At 12:51am on July 13, 2012, Sachchidanand Pandey said…
 शुक्रिया आशीष जी
At 11:26pm on July 2, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…

आशीष जी, प्रोत्साहन हेतु आपका हार्दिक आभार.......

At 10:46am on June 25, 2012, कुमार गौरव अजीतेन्दु said…
आशीष जी, मेरी रचना को पसंद करने के लिए आपका आभार।
At 10:03am on June 6, 2012, अरुण कान्त शुक्ला said…

आशीष जी मित्र बनने का अवसर प्रदान करने के लिए धन्यवाद |

At 10:34am on June 1, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

आशीष जी आपकी शुभकमानयों और बधाइयों के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद !

At 9:33pm on May 26, 2012, डॉ. सूर्या बाली "सूरज" said…

आशीष जी आपकी दाद के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ! अच्छा लिखते हो ! ऐसे ही लिखते रहो और सबका मनोरंजन करते रहो !!

At 8:21pm on May 19, 2012, MAHIMA SHREE said…

swagat hai

At 3:44pm on May 4, 2012,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

Dhanyavaad Ashish Bhai.

At 7:43pm on April 12, 2012, Sarita Sinha said…

thanx ashish ji for liking my post...

 
 
 

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