For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"OBO लाइव तरही मुशायरे"/"OBO लाइव महा उत्सव"/"चित्र से काव्य तक" प्रतियोगिता के सम्बन्ध मे पूछताछ

"OBO लाइव तरही मुशायरे"/"OBO लाइव महा उत्सव"/"चित्र से काव्य तक" प्रतियोगिता के सम्बन्ध मे यदि किसी तरह की जानकारी चाहिए तो आप यहाँ पूछताछ कर सकते है !

Views: 12776

Reply to This

Replies to This Discussion

मुख्य पृष्ठ के बाईं तरफ देखें आ० सुरेन्द्र इंसान जी, फरवरी माह का कैलेंडर वहाँ लगा हुआ हैI

इस बार का मिसरा -ए-तरह जनाब मख़दूम मुहिउद्दीन साहब की ग़ज़ल से लिया गया है|

 
उन्ही की आँखों के क़िस्से उन्ही के प्यार की बात "

मुफाइलुन     फइलातुन     मुफ़ाइलुन    फइलुन/फेलुन

1212      1122     1212    1121/221/22/112

(बह्र: मुज्‍तस मुसम्मन् मख्बून मक्सूर
रदीफ़ :- की बात 
काफिया :- आर (प्यार, बहार, दयार आदि)

 

जी बेहद शुक्रिया जी आपका आदरणीय।

आदरणीय नमन 

आदरणीय , ग़ज़ल पोस्ट करने की प्रक्रिया बताएं ...

पहले भी एक दो बार प्रयास किया ...पर मुशायरे में भाग लेने से असफल रहा 

कृपया राह दिखाएँ 

शुक्रिया 

मुशायरे की अवधि २४ मार्च  से लेकर २५ मार्च तक है अर्थात मुशायरे में आज मध्य रात्रि के बाद से ग़ज़लें पोस्ट की सकती हैं, रिप्लाई बॉक्स अभी बंद है जो मध्य रात्रि से खुल जायेगा|

मुशायरे का लिंक http://www.openbooksonline.com/forum/topics/81

आदरणीय सादर नमन जी।
क्या ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा अंक 80 का संकलन आ गया है यदि हाँ तो लिंक दे या बताये की मैं कैसे देख सकता हूँ जी।
सादर जी।
आदरणीय नमस्कार
कविता हमे किस ईमेल id पे भेजनी है और क्या हमें केवल कविता भेजनी है उसके नीचे नाम फ़ोन नो इत्यादि नही होना चहिए?

कोई भी रचना सीधे सम्बन्धित आयोजन में पोस्ट करनी होती है भाई राहुल गर्ग जी. मुख्य पेज के बायीं तरफ इस महीने के आयोजनों का केलेंडर है पूरी जानकारी वहां से हासिल कर सकते हैं.    

sir kripya post kaise kahan par karna hai ye batayein kyunki me bilkul naya hun abhi

कृपया बताएं कि 92वें  तरही मुशायरे की ग़ज़ल का संशोधन कब किया जा सकेगा और जानकारी कैसे मिलेगी

आ. अंजलि जी 
आप अपनी मूल प्रति संशोधित   कर लें... जैसे ही राणा भाई को थोडा वक़्त मिलेगा वो  संकलन जारी कर देंगे.. उस समय आप उनसे आग्रह कीजियेगा 
सादर 

आदरणीय राणा प्रताप जी तरही मुशायरा 96 फिराक गोरखपुरी साहब का जो मिसरा दिया गया है मुझे लगता है यह मिसरा कुछ त्रुटि पूर्ण है फिराक साहब की मूल ग़ज़ल का मिसरा यूँ है रात भी नींद भी कहानी भी, हाय क्या चीज़ है जवानी भी। इसकी बह्र फ़ाइलुन फ़ाइलुन मुफाईलुन दी गई है। इस ग़ज़ल के तीसरे सेकंड लास्ट और आखिरी शेर का अवलोकन करने पर इसमें बह्र फ़ाइलातुन मुफाइलुन फैलुन यह मिलती है इस बह्र का निर्वाह होता है तो हम यह मान सकते हैं कि इस मिसरे की बह्र फ़ाइलातुन मुफाइलुन फैलुन है। तो मिसरे के संबंध में है एक तो बह्र स्पष्ट करें और दूसरा मिसरा जो दिया गया है फिराक साहब का ही है या इसमें बदलाव किया गया है।

मेरा भी यही प्रश्न है ।

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"   आदरणीय धर्मेन्द्र कुमार सिंह जी सादर, धर्म के नाम पर अपना उल्लू सीधा करती राजनीति में…"
2 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post न पावन हुए जब मनों के लिए -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"   हमारे बिना यह सियासत कहाँजवाबों में हम हैं सवालों में हम।३।... विडम्बना…"
3 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"   सूर्य के दस्तक लगानादेखना सोया हुआ है व्यक्त होने की जगह क्यों शब्द लुंठितजिस समय…"
3 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"      तरू तरु के पात-पात पर उमढ़-उमढ़ रहा उल्लास मेरा मन क्यूँ उन्मन क्यूँ इतना…"
3 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, क्रोध विषय चुनकर आपके सुन्दर दोहावली रची है. हार्दिक बधाई स्वीकारें.…"
3 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"  आदरणीय सुशील सरना साहब सादर, प्रस्तुत ग़ज़ल पर उत्साहवर्धन के लिए आपका दिल से शुक्रिया.…"
3 hours ago
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"   आदरणीय भाई लक्षमण धामी जी सादर, प्रस्तुत ग़ज़ल की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
3 hours ago
Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"वाह बहुत सुंदर प्रस्तुति हुई है आदरणीय लक्ष्मण धामी जी । हार्दिक बधाई "
4 hours ago
Sushil Sarna commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"वाहहहहहह आदरणीय क्या ग़ज़ल हुई है हर शे'र पर वाह निकलती है । दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं…"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन।बहुत सुंदर समसामयिक गजल हुई है। बहुत बहुत हार्दिक बधाई।"
6 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

ग़ज़ल

   ग़ज़ल2122  2122  212 कितने काँटे कितने कंकर हो गयेहर  गली  जैसे  सुख़नवर हो गये रास्तों  पर …See More
7 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . क्रोध

दोहा पंचक. . . . क्रोधमानव हरदम क्रोध में, लेता है प्रतिशोध ।सही गलत का फिर उसे, कब रहता है बोध…See More
10 hours ago

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service