For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Madan Mohan saxena
  • Male
  • Mumbai.Maharashtra
  • India
Share

Madan Mohan saxena's Friends

  • Rahila
  • meena pandey
  • poonam dogra
  • harivallabh sharma
  • narendrasinh chauhan
  • kalpna mishra bajpai
  • atul kushwah
  • Nilesh Shevgaonkar
  • DR. HIRDESH CHAUDHARY
  • Vasundhara pandey
  • Sushil Sarna
  • vandana
  • sanju shabdita
  • Akhand Gahmari
  • annapurna bajpai
 

Madan Mohan saxena's Page

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
Shahjahanpur
Profession
Writer &Poet.
About me
Writer &Poet.

नजर

धर्म निर्पेक्षता का नारा बुलंद करने बाले
आम आदमी का नाम लेने बाले
किसान पुत्र नेता
दलित की बेटी
सदी के महा नायक
क्रिकेट के भगबान
सत्यमेब जयते की घोष करने बाले
घूम घूम कर चैरिटी करने बाले सेलुलर सितारें
अरबों खरबों का ब्यापार करने बाले घराने
त्रासदी के इस समय में
पीड़ित लोगों को नजर
क्यों नहीं आ रहे .

Madan Mohan saxena's Photos

  • Add Photos
  • View All

Comment Wall (4 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 7:05pm on January 3, 2016, Sushil Sarna said…

नूतन वर्ष 2016 आपको सपरिवार मंगलमय हो। मैं प्रभु से आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने की कामना करता हूँ।

सुशील सरना

At 5:24pm on October 8, 2015, narendrasinh chauhan said…

सुक्रिया आप का

At 9:51pm on January 27, 2014, Vindu Babu said…

आपका हार्दिक स्वागत है आदरणीय सक्सेना जी।

सादर

At 9:25am on January 24, 2014, कल्पना रामानी said…

आदरणीय, मेरी मित्र सूची में आपका हार्दिक स्वागत है

Madan Mohan saxena's Blog

जिंदगानी लुटाने की बात करते हो

किस ज़माने की बात करते हो
रिश्तें निभाने की बात करते हो

अहसान ज़माने का है यार मुझ पर
क्यों राय भुलाने की बात करते हो

जिसे देखे हुए हो गया अर्सा मुझे
दिल में समाने की बात करते हो

तन्हा गुजरी है उम्र क्या कहिये
जज़्बात दबाने की बात करते हो

गर तेरा संग हो गया होता "मदन "
जिंदगानी लुटाने की बात करते हो

मौलिक और अप्रकाशित

मदन मोहन सक्सेना

Posted on September 27, 2016 at 12:00pm — 2 Comments

कुछ पाने की तमन्ना में हम खो देते बहुत कुछ है

अँधेरे में रहा करता है साया साथ अपने पर

बिना जोखिम उजाले में है रह पाना बहुत मुश्किल

ख्वाबों और यादों की गली में उम्र गुजारी है

समय के साथ दुनिया में है रह पाना बहुत मुश्किल

कहने को तो कह लेते है अपनी बात सबसे हम

जुबां से दिल की बातो को है कह पाना बहुत मुश्किल

ज़माने से मिली ठोकर तो अपना हौसला बढता

अपनों से मिली ठोकर तो सह पाना बहुत मुश्किल

कुछ पाने की तमन्ना में हम खो देते बहुत कुछ है

क्या खोया और क्या पाया कह पाना बहुत मुश्किल

कुछ…

Continue

Posted on August 4, 2016 at 1:03pm — 3 Comments

चंद शेर आपके लिए

चंद शेर आपके लिए

एक।

दर्द मुझसे मिलकर अब मुस्कराता है
जब दर्द को दबा जानकार पिया मैंने

दो.

वक्त की मार सबको सिखाती सबक़ है
ज़िन्दगी चंद सांसों की लगती जुआँ है

तीन.

समय के साथ बहने का मजा कुछ और है यारों
रिश्तें भी बदल जाते समय जब भी बदलता है

चार.

जब हाथों हाथ लेते थे अपने भी पराये भी
बचपन यार अच्छा था हँसता मुस्कराता था

"मौलिक व अप्रकाशित"
प्रस्तुति:
मदन मोहन सक्सेना

Posted on February 24, 2016 at 12:09pm — 3 Comments

अब समाचार ब्यापार हो गए

अब समाचार ब्यापार हो गए

किसकी बातें सच्ची जानें
अब समाचार ब्यापार हो गए

पैसा जब से हाथ से फिसला
दूर नाते रिश्ते दार हो गए

डिजिटल डिजिटल सुना है जबसे
अपने हाथ पैर बेकार हो गए

रुपया पैसा बैंक तिजोरी
आज जीने के आधार हो गए

प्रेम ,अहिंसा ,सत्य , अपरिग्रह
बापू क्यों लाचार हो गए

सीधा सच्चा मुश्किल में अब
कपटी रुतबेदार हो गए

मौलिक और अप्रकाशित

मदन मोहन सक्सेना

Posted on October 8, 2015 at 2:30pm — 2 Comments

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक- 101 in the group चित्र से काव्य तक
"जय हो.. "
6 hours ago
गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अरसा गुज़र गया है कोई गुफ़्तुगू नहीं (६२ )
"हार्दिक आभार बृजेश कुमार बृज जी "
9 hours ago
surender insan commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नए ख्वाब दिखाने वाला - ग़ज़ल
"आदरणीय बसन्त जी अच्छी ग़ज़ल कही आपने । बधाई स्वीकार करें जी।"
10 hours ago
surender insan commented on सतविन्द्र कुमार राणा's blog post नहीं अच्छा है यूँ मजबूर होना- ग़ज़ल
"अच्छी ग़ज़ल हुई हक़ी सतविंदर भाई जी। मुबारकबाद कबूल करे।"
10 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on विनय कुमार's blog post व्यस्तता- लघुकथा
"हार्दिक बधाई आदरणीय विनय कुमार जी। बेहतरीन लघुकथा।"
10 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दीप बुझा करते है जिसके चलने पर - गजल( लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर')
"हार्दिक बधाई आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर जी। बेहतरीन गज़ल। जख्म दिए  हैं …"
10 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-लालफीताशाही-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"हार्दिक बधाई आदरणीय बृजेश कुमार 'ब्रज' जी। बेहतरीन गज़ल। ये  कहा था …"
11 hours ago
TEJ VEER SINGH commented on डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव's blog post दु:स्वप्न (लघुकथा )
"हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी। बेहतरीन प्रस्तुति।एक पौराणिक प्रसंग को अति सुंदर…"
11 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post उजास- लघुकथा
"इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ मुहतरम समर कबीर साहब"
12 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post व्यस्तता- लघुकथा
"इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ मुहतरम समर कबीर साहब"
12 hours ago
सतविन्द्र कुमार राणा posted a blog post

नहीं अच्छा है यूँ मजबूर होना- ग़ज़ल

1222 1222 122 नहीं अच्छा है यूँ मजबूर होना दिखें हैं साथ लेकिन दूर होना।कली का कुछ समय को ठीक है,…See More
16 hours ago
सतविन्द्र कुमार राणा commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-लालफीताशाही-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"उत्तम अति उत्तम!"
17 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service