For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Omprakash Kshatriya
  • Male
  • नीमच
  • India
Share

Omprakash Kshatriya's Friends

  • Rahila
  • सतविन्द्र कुमार राणा
  • Archana Tripathi
  • Maheshwari Kaneri
  • मिथिलेश वामनकर
 

Omprakash Kshatriya's Page

Latest Activity

Omprakash Kshatriya replied to योगराज प्रभाकर's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-35 में स्वीकृत रचनाएँ
"आदरणीय योगराज प्रभाकर भाई साहब जी आप को लघुकथा संगोष्ठी के सफल आयोजन और त्वरित संकलन के लिए बधाई. आप जिस त्वरित रूप से यह कार्य करते हैं वह काबिलेतारीफ है. "
Mar 1
Omprakash Kshatriya replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-35
"आदरणीय योगराज प्रभाकर भाई साहब,कमजोर कथा कभी प्रभावित नहीं करती है.आप की इस टिप्पणी ने मुझे सब से ज्यादा प्रभावित किया. यही वजह है कि आप और आप का स्वभाव मुझे सदा अच्छा लगता है. इसी तरह मेरी गलतियां  बताते रहे. ताकि मैं उसे सुधारता रहू. आभार आप…"
Feb 28
Omprakash Kshatriya replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-35
"कथा कमजोर है. आप की बात से सहमत हूँ. आभार आप का ."
Feb 28
Omprakash Kshatriya replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-35
"आदरणीय जानकी वाही जी आप सभी के सुझाव मान्य है. "
Feb 28
Omprakash Kshatriya replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-35
"आभार आदरणीय नीता कसार जी. आप के मत के लिए. कृपया अपनी रॉय बेझिझक रख दिया कीजिए."
Feb 28
Omprakash Kshatriya replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-35
"आदरणीय महेंद्र कुमार जी . आप की विस्तृत समीक्षा पढ़ आकर मज़ा आ गया. आप का प्रेम है कि आप ने अनुकूल सुझाव भी  दिया."
Feb 28
Omprakash Kshatriya replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-35
"आदरणीय सुनील वर्मा जी आप के नजरिये का स्वागत है. आप मेरी रचना पर बेबाक रॉय रखिए. मुझे अच्छा लगता है. गलत को गलत कहने का साहस होना चाहिए. शुक्रीया आप का."
Feb 28
Omprakash Kshatriya replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-35
"आदरणीय शेख शहजाद उसमानी जी आप का शुक्रिया. आप रचना की चीरफाड़ का मज़ा लीजिए. इस के बहाने मैं भी बहुत कुछ सिखा रहा हूँ. आप भी सीखिए."
Feb 28
Omprakash Kshatriya replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-35
"आप का शुक्रिया आदरणीय तस्दीक अहमद खान साहब,"
Feb 28
Omprakash Kshatriya replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-35
"आदरणीय वीरेंदर वीर जी मेहता आप ने रचना पर अपनी टिप्पणी दे कर मेरा उत्साहवर्धन किया है. आभार आप का ."
Feb 28
Omprakash Kshatriya replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-35
"कभीकभी रचना निरस्त होना भी फायदा देता है आदरणीय तेजवीर जी .यह मैं पिछले ३६ साल से महसूस कर रहा हूँ. आभार आप का ."
Feb 28
Omprakash Kshatriya replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-35
"वाह क्या बात है  ! आप की बेबाक टिप्पणी की स्वागत है. सादर शुक्रिया."
Feb 28
Omprakash Kshatriya replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-35
"इस शानदार लघुकथा के लिए हार्दिक बधाई आदरणीय सीमा सिंह जी."
Feb 28
Omprakash Kshatriya replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-35
"आदरणीय जानकी वाही जी बढ़िया लघुकथा के लिए बधाई ."
Feb 28
Omprakash Kshatriya replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-35
"आदरणीय बरखा जी बहुत शानदार लघुकथा लिखी है . मेरी बधाई स्वीकार कीजिएगा."
Feb 28
Omprakash Kshatriya replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-35
"आदरणीय विनय कुमार जी आप के अभिमत से सहमत हूँ. शुक्रिया."
Feb 27

Profile Information

Gender
Male
City State
Neemuch Madhya Pradesh India
Native Place
Ratangarh
Profession
Govt Service
About me
मूलत: बालकहानीकार , लेखक और शिक्षक

लघुकथा— गलतफहमी

लघुकथा—                                             

गलतफहमी

                                                                   ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”

भाभी ने फिर वही उलाहना दिया,'' आप से पराये अच्छे हैं. जिन्हों ने बुरे वक्त में हमारी सहायता की थी.''

'' हां भाभी. मैं भी यही चाहता था.''

'' हांहां, मुझे पता है. आप क्या चाहते थे. हम भीख मांगे. अपनी जमीन आप के नाम कर दें.''

'' वह तो आप ने अब भी उस ट्रस्ट के नाम पर की है.''

'' हां की है. उस ट्रस्ट ने हमारी सहायता तब की थी जब इस के पापा एक दुर्घटना में शांत हो गए थे. मगर, उस ट्रस्टी से मैं आज तक नहीं मिलीं.'' भाभी ने यह कह कर मुंह बनाया, '' आप से इन का वह पराया दोस्त अच्छा है जिस ने हमें ट्रस्ट से सहायता दिलवाई थी. उसी की बदौलत आज मेरा बेटा एक सफल व्यापारी है.''

'' मैं भी यही चाहता था भाभी. यह आत्मनिर्भर बनें. किसी की सहायता के बिना.''

'' रहने दीजिए. आप की निगाहें तो हमारी जमीन पर थी. उसे हड़पना चाहते थे,'' भाभी ने यही कहा था कि किसी ने दरवाजे की घंटी बजाई.

उन्हों ने दरवाजा खोला तो चौंक गई,'' अरे भाई साहब ! आप. आइएआइए. इन से मिलिए. ये कहने मात्र के लिए मेरे देवर है.''

फिर भाभी अपने देवर की ओर घुम कर बोली,'' और देवरजी ! ये इन के वही दोस्त है जिन्हों ने हमारी बुरे दिनों में सहायता की थी.''

तभी आंगुतक ने हाथ जोड़ते हुए कहा'' अरे ! सरजी आप !'' फिर माला टंगी तस्वीर की ओर इशारा कर के कहा, '' ये आप के भाई थे ?''

'' जी हां.''

तभी भाभी बोली,'' आप इन्हें जानते हैं ?''

'' हां. ये वही ट्रस्टी है, जिन्हों ने गोपनीय रूप से ट्रस्ट बना कर आप की जमीन पर, आप का कारखाना खोलने में मदद की थी.''

यह सुनते ही भाभी संहल नहीं पाई. धड़ाम से सौफे पर बैठ गई.

---------------------------------

Omprakash Kshatriya's Photos

  • Add Photos
  • View All

Omprakash Kshatriya's Blog

लघुकथा - केस

कार से टकरा कर लहूलुहान हुए बासाहब से इंस्पेक्टर ने दोबारा पूछा , “ क्या सोचा है ? कार सुधराई के पैसा देना है या नहीं ?”

“साहब ! बहुत दर्द हो रहा है. अस्पताल ले चलिए.” वह घुटने संहाल कर बोला तो इंस्पेक्टर ने डपट दिया,“अबे साले ! मैं जो पूछ रहा हूँ, उस का जवाब दे ?” कहते हुए जमीन पर लट्ठ दे मारा.

“साहब ! मेरा जुर्म क्या है ? मैं तो रोड़ किनारे बैठा था. गाड़ी तो लड़की चला रही थी. उसी ने मुझे टक्कर मारी है. साहब मुझे छोड़ दीजिए. ” वह हाथ जोड़ते हुए धीरे से विनय करने लगा.

“जानता…

Continue

Posted on May 3, 2016 at 12:30pm — 14 Comments

लघुकथा- नफरत

लघुकथा- नफरत

अख़बार में प्लास्टिक की बोरी पर दीपक बेचते गरीब बच्चे की फोटो के साथ उस की दास्ताँ छपी थी. जिस ने अपने मेहनत से अमेरिका में एरोनाटिक्स इंजीनियरिंग में मुकाम हासिल किया था. उस फोटो को देख कर हार्लिक बोला , “ कितना गन्दा बच्चा है. इसे देख कर खाना खाने की इच्छा ही न हो.”

“ यदि मैं देख लू तो मुझे उलटी हो जाए,” लुनिक्स ने अपना तर्क दिया, “ मम्मा ! ये भारतीय बच्चे इतने गंदे क्यों होते हैं ? आप तो भारत में रही है ना. आप वहां कैसे रहती थी. ये तो नफरत के काबिल है.”

“…

Continue

Posted on November 7, 2015 at 3:30pm — 10 Comments

लघुकथा - अनाथ

लघुकथा- अनाथ

पत्नी की रोजरोज की चिकचिक से परेशान हो कर महेश पिताजी को अनाथालय में छोड़ दरवाजे से बाहर तो आ गया, मगर मन नहीं माना. कहीं पिताजी का मन यहाँ लगेगा कि नहीं. यह जानने के लिए वह वापस अनाथालय में गया तो देखा कि पिताजी प्रबंधक से घुलमिल कर बातें कर रहे थे. जैसे वे बरसों से एकदूसरे को जानते हैं.

पिताजी के कमरे में जाते ही महेश ने पूछा, “ आप इन्हें जानते हैं ?” तो प्रबंधक ने कहा, “ जी मैं उन्हें अच्छी तरह जानता हूँ. वे पिछले ३५ साल से अनाथालय को दान दे रहे हैं . दूसरा बात…

Continue

Posted on October 21, 2015 at 3:00pm — 19 Comments

लघुकथा - पूंछ

लघुकथा – पूंछ

सीढ़ियाँ गंदी हो रही थी कविता ने सोचा झाड़ू निकल दूँ. यह देखा कर पड़ोसन ने कचरा सीढ़ियों पर सरका दिया.

बस ! फिर क्या था. कविता का पारा सातवे आसमान  पर, “ मैं इस के बाप की नौकर हूँ. नहीं निकाल रही झाड़ू,” बड़बड़ाते हुए कविता ऊपर आई , “ साली अपने को समझती क्या है ? कभी सीढ़ियों पर पानी डाल देगी. कभी लहसन का कचरा. कभी कुछ. मैं इस की नौकर हूँ जो रोजरोज सीढ़ियाँ साफ करती रहू. साली अपने को न जाने क्या समझती है ?

“ क्यों जी. आप बोलते क्यों नहीं.” उस ने पति के हाथ से अख़बार…

Continue

Posted on September 22, 2015 at 8:30am — 4 Comments

Comment Wall (4 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 7:25am on January 26, 2016, सतविन्द्र कुमार राणा said…
जन्मदिवस एवम् गणतन्त्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं जी।
At 1:50am on January 26, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार की ओर से आपको जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनायें...

At 8:09pm on October 31, 2015, Omprakash Kshatriya said…

आदरणीय राहिला जी आप का कहना सही है. मगर पोलिसी कर के लोगों को मरवा देना, इस पर मेरा प्रश्न था. कही ऐसा भी होता है, इसी के लिए कहा था. खैर आप का शुक्रिया.

At 3:18pm on October 30, 2015, Rahila said…
हां आद. ओम प्रकाश जी ये घटना हो चुकी है । बहुत से लोग पॉलिसी के बारे में ज्यादा समझते नही ंबस ले लेते है ।
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"बहुत आभार आदरणीय अजय गुप्ता जी"
1 hour ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"बहुत शुक्रिया आदरणीय निलेश जी। आगे सारी टिप्पणियाँ पढ़ी। यही कहना चाहूंगी कि जिस प्रकार आप लोग…"
2 hours ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"हौसला अफ़ज़ाई के लिए आपका बहुत शुक्रिया आदरणीय निलेश जी।"
2 hours ago
anjali gupta replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"ग़ज़ल पर समय देने के लिए और हौसला अफ़ज़ाई के लिए  आपका दिली शुक्रिया दिनेश जी"
2 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"जनाब दिनेश साहिब   , अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं |जनाब समर साहिब के मशवरे…"
3 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"मुहतरमा मंजीत साहिबा, ग़ज़ल का अच्छा प्रयास हुआ है, मुबारकबाद क़ुबुल फरमाएं | जनाब समर साहिब के…"
3 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"मेरे खयाल में शतुरगुरबा नहीं है | जनाब समर साहिब की बात सही है | मिसरे में उनके फ़साने समझने की बात…"
3 hours ago
Tasdiq Ahmed Khan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"मुहतरम जनाब आरिफ साहिब आदाब, ग़ज़ल पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया |"
3 hours ago
Mohan Begowal replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"      प्यार मिलने को है जाना तो बहाना देखो बन न जाये कहीं  झूठा ये तमाशा …"
3 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"'तुम' के साथ क्या परेशानी है,बात तो "आप" की वजह से है, आप तो ये बताएं कि मैंने…"
4 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"जनाब दिनेश कुमार जी आदाब,अच्छी ग़ज़ल हुई है, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । 'फ़ानी दुनिया…"
4 hours ago
अजय गुप्ता replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-95
"वाह। इस संकलन की सबसे आला ग़ज़लों में से एक। एक से बढ़कर एक शेर"
4 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service