For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Tasdiq Ahmed Khan's Blog – May 2017 Archive (4)

ग़ज़ल--शम अ रोशन करो मुहब्बत की

ग़ज़ल

-----

(फ़ाइलातुन -मफ़ाइलुंन -फेलुंन)



आँधियाँ चल रही हैं नफ़रत की।

शमअ रोशन करो मुहब्बत की।



जिसको तदबीर पर यक़ीन नहीं

बात करता है वह ही किस्मत की।



दुश्मने जान हो गए उमरा

में ने मुफ़लिस की जब हिमायत की।



रहबरी के लिए चुना जिसको

साथ उसने मेरे सियासत की।



होश में आ जा बागबाने चमन

हो गई इब्तदा बग़ावत की।



उनके जलवों से वह नहीं वाकिफ़

बात करते हैं जो कियामत की।



वक़्त तस्दीक़ इम्तहान का… Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on May 19, 2017 at 9:18pm — 17 Comments

ग़ज़ल----(कब वो मेरे दिल से निकला था)

ग़ज़ल

---------

(फअल-फऊलन-फेलुन-फेलुन )

सिर्फ़ वो महफ़िल से निकला था |

कब वो मेरे दिल से निकला था |

दिलबर के दीदार का मंज़र

चश्म से मुश्किल से निकला था |

रास्ता मेरी मंज़िल का भी

उनकी ही मंज़िल से निकला था |

जिसने बचाया बद नज़रों से

वो जादू तिल से निकला था |

हरफे निदा जो बना अदावत

ज़ह्ने मुक़ाबिल से निकला था |

आ ही गया वो फिर मक़्तल में

बच के जो क़ातिल से निकला था…

Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on May 13, 2017 at 12:44pm — 16 Comments

ग़ज़ल(यहीं डूब जाने को जी चाहता है )

ग़ज़ल

--------

(फऊलन-फऊलन -फऊलन -फऊलन )

लगी को बुझाने को जी चाहता है |

तुम्हें कब से पाने को जी चाहता है |

यक़ीनन बड़ी मुज़त् रिब है शबे ग़म

मगर मुस्कराने को जी चाहता है |

समुंदर से गहरी हैं आँखें तुम्हारी

यहीं डूब जाने को जी चाहता है |

तेरे नाम में भी बहुत है हलावत

इसे लब पे लाने को जी चाहता है |

तेरे अहदे माज़ी से वाक़िफ़ हैं फिर भी

नयी चोट खाने को जी चाहता है |

मुसलसल…

Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on May 4, 2017 at 9:59pm — 16 Comments

हो गया वह बे मुरव्वत देखते ही देखते

ग़ज़ल

फ़ाइलातुन-फ़ाइलातुन-फ़ाइलातुन-फाइलुन



मिल गई उल्फ़त की जन्नत देखते ही देखते।

हो गई उन से मुहब्बत देखते ही देखते।



आ गया है कौन आख़िर हुस्न के बाज़ार में

हो गई बरपा कियामत देखते ही देखते ।



हो गया शायद वफाओं का सितमगर पर असर

ख़त्म करदी उसने नफ़रत देखते ही देखते।



कारवां वालों को हासिल ही न था जिसको यक़ी

उसने पा ली है क़यादत देखते ही देखते।



ये है खारों की हिमायत का नतीजा बागबां

हो गई हर सू बग़ावत देखते ही… Continue

Added by Tasdiq Ahmed Khan on May 1, 2017 at 8:34pm — 18 Comments

Monthly Archives

2022

2019

2018

2017

2016

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"चमत्कार की आत्मकथा (लघुकथा): एक प्रतिष्ठित बड़े विद्यालय से शन्नो ने इस्तीफा दे दिया था। कुछ…"
20 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"नववर्ष की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं समस्त ओबीओ परिवार को। प्रयासरत हैं लेखन और सहभागिता हेतु।"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ

सूर्य के दस्तक लगाना देखना सोया हुआ है व्यक्त होने की जगह क्यों शब्द लुंठित जिस समय जग अर्थ ’नव’…See More
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-129 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"बहुत आभार आदरणीय ऋचा जी। "
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"नमस्कार भाई लक्ष्मण जी, अच्छी ग़ज़ल हुई है।  आग मन में बहुत लिए हों सभी दीप इससे  कोई जला…"
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"हो गयी है  सुलह सभी से मगरद्वेष मन का अभी मिटा तो नहीं।।अच्छे शेर और अच्छी ग़ज़ल के लिए बधाई आ.…"
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"रात मुझ पर नशा सा तारी था .....कहने से गेयता और शेरियत बढ़ जाएगी.शेष आपके और अजय जी के संवाद से…"
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. ऋचा जी "
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. तिलक राज सर "
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. लक्ष्मण जी "
Monday
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-186
"धन्यवाद आ. जयहिंद जी.हमारे यहाँ पुनर्जन्म का कांसेप्ट भी है अत: मौत मंजिल हो नहीं सकती..बूंद और…"
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service