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Naveen Mani Tripathi's Blog – July 2019 Archive (4)

ग़ज़ल

212 212 212 212

जब से ख़ामोश वो सिसकियां हो गईं ।

दूरियां प्यार के दरमियाँ हो गईं ।।

कत्ल कर दे न ये भीड़ ही आपका ।

अब तो क़ातिल यहाँ बस्तियाँ हो गईं ।।

आप ग़मगीन आये नज़र बारहा ।

आपके घर में जब बेटियां हो गईं ।।

कैसी तक़दीर है इस वतन की सनम ।

आलिमों से खफ़ा रोटियां हो गईं ।।

फूल को चूसकर उड़ गईं शाख से ।

कितनी चालाक ये तितलियां हो गईं ।।

दर्दो गम पर…

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Added by Naveen Mani Tripathi on July 28, 2019 at 12:17am — 2 Comments

ग़ज़ल

2122 1212 22

.

पूछिये मत कि हादसा क्या है ।

पूछिये दिल मेरा बचा क्या है।।

दरमियाँ इश्क़ मसअला क्या है।

तेरी उल्फ़त का फ़लसफ़ा क्या है

सारी बस्ती तबाह है तुझसे ।

हुस्न तेरी बता रजा क्या है ।।

आसरा तोड़ शान से लेकिन ।

तू बता दे कि फायदा क्या है ।।

रिन्द के होश उड़ गए कैसे ।

रुख से चिलमन तेरा हटा क्या है।।

बारहा पूछिये न दर्दो गम ।

हाले दिल आपसे छुपा क्या है ।।



फूँक कर…

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Added by Naveen Mani Tripathi on July 16, 2019 at 12:00am — 2 Comments

ग़ज़ल

2122 2122 212

दुश्मनी हमसे  निकाली  जाएगी ।

बेसबब इज्ज़त उछाली जाएगी ।।

नौकरी मत  ढूढ़  तू इस मुल्क में ।

अब तेरे हिस्से की थाली जाएगी ।।

लग रहा है अब रकीबों के लिए ।

आशिकी साँचे में ढाली जाएगी ।।

चाहतें   अब  क्या  सताएंगी   उसे ।

जब कोई ख़्वाहिश न पाली जाएगी ।।…

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Added by Naveen Mani Tripathi on July 11, 2019 at 12:12am — 4 Comments

ग़ज़ल

221 2121 1221 212

मुद्दत के बाद आई है ख़ुश्बू सबा के साथ ।

बेशक़ बहार होगी मेरे हमनवा के साथ ।।

शायद मेरे सनम का वो इज़हारे इश्क था ।

यूँ ही नहीं झुकी थीं वो पलकें हया के साथ ।।

वह शख्स दे गया है मुझे बेवफ़ा का नाम ।

जो ख़ुद निभा सका न मुहब्बत वफ़ा के साथ ।।

माँगी मदत जरा सी तो लहज़े बदल गए ।

अब तक मिले जो लोग हमें मशविरा के साथ ।।

आँखों में साफ़ साफ़ सुनामी की है…

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Added by Naveen Mani Tripathi on July 8, 2019 at 11:00am — 10 Comments

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