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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Blog – July 2020 Archive (4)

तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर दे(११८ )

(1212 1122 1212 22 /112 )

तू अपने आप को अब मेरे रू ब रू कर दे

बहुत दिनों की मेरी पूरी आरज़ू कर दे

**

वबा के वार से दुश्वार हो गया जीना

ख़ुदाया अम्न को तारी तू चार सू कर दे

**

बता मैं दश्त में पानी कहाँ तलाश करूँ

चल अपनी चश्म के अश्कों से बा-वज़ू कर दे

**

ख़ुदा किसी को न औलाद ऐसी अब देना

जो वालिदेन की इज़्ज़त लहू लहू कर दे

**

मैं जानता हूँ सदाओं की भीड़…

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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on July 30, 2020 at 4:00pm — 6 Comments

अपने हिसार-ए-फ़िक्र से बाहर बशर निकल (११७ )

(221 2121 1221 212 )

अपने हिसार-ए-फ़िक्र से बाहर बशर निकल

दुनिया बदल गई है तू भी अब ज़रा बदल

**

रफ़्तार अपनी वक़्त कभी थामता नहीं

अच्छा यही है वक़्त के माफ़िक तू दोस्त ढल

**

पीछे रहा तो होंगी न दुश्वारियां ये कम

चाहे तरक़्क़ी गर तो ज़माने के साथ चल

**

रिश्ते निभाने के लिए है सब्र लाज़मी

रखना तुझे है गाम हर एक अब सँभल सँभल

**

तूफ़ान में चराग़ की मानन्द क्यों…

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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on July 27, 2020 at 10:30pm — 6 Comments

मुहब्बत कीजिए यारो सदा दिलदार की सूरत (११६ )

ग़ज़ल (1222 1222 1222 1222 )

.

मुहब्बत कीजिए यारो सदा दिलदार की सूरत

भरोसा कीजिए मज़बूत इक दीवार की सूरत

**

रहें कुछ राज़ अपनी ज़िंदगी के राज़ ही बेहतर

नहीं अच्छा कि हो ये ज़िंदगी अख़बार की सूरत

**

ख़ुशी के चंद पल ही ज़िंदगी में दोस्त मिलते हैं

मगर आते हैं ग़म अक्सर सबा-रफ़्तार की सूरत

**

भले पैदा हुए हैं आप मुफ़लिस कीजिए कोशिश

न समझें आप ख़ुद को…

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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on July 7, 2020 at 6:30pm — 5 Comments

उमड़ता जब हृदय में प्यार कविता जन्म लेती है (११५ )

ग़ज़ल (1222 *4 )

.

उमड़ता जब हृदय में प्यार कविता जन्म लेती है 

प्रकृति जब जब करे शृंगार कविता जन्म लेती है 

***

नहीं देखा अगर जाये किसी से जुल्म निर्धन पर

बने संघर्ष जब आधार कविता जन्म लेती है 

***

हुआ विचलित अगर मन है किसी भी बात को लेकर

गलत जब हो नहीं स्वीकार कविता जन्म लेती है 

***

कभी पीड़ा हुई इतनी हुआ सहना जिसे…

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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on July 4, 2020 at 1:30pm — 6 Comments

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