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ARVIND BHATNAGAR's Blog – August 2013 Archive (3)

तान्या : दो प्रेम कविताएँ

एक

चाँद झाँका

बादलों की ओट से ,

चाँदनी चुपके से आ

खिड़की के रस्ते,

बिछ गई बिस्तर पे मेरे/ 

और 

हवा  का एक झोंका,

सोंधी सी खुश्बू लिए

छू कर गया गालों को मेरे /

यूँ लगा मुझको कि

तुम सोई हो मेरे पास ,

मेरी बाहों के घेरे में /

लेकर होठों पर

एक इंद्रधनुषी मुस्कुराहट

तृप्त |

दो

सपने, तान्या

एक दम छोटे से बच्चे 

जैसे होते हैं/

अपने मे खोए…

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Added by ARVIND BHATNAGAR on August 28, 2013 at 5:30pm — 14 Comments

दरख़्त

हैं दरख़्त जाने कितने , पर कहीं नही है साया , 

मेरी ज़िंदगी में यारों , ये क्या मु…

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Added by ARVIND BHATNAGAR on August 24, 2013 at 7:30pm — 10 Comments

शज़र

शज़र

मेरे सीने में कोई प्यासा शज़र, अब तक है,

उसके अंदाज़ में मौसम का असर, अब तक है|

उसको मंज़िल मिली, वो चैन से सोने को गया,

मेरे हिस्से मे कोई तन्हा सफ़र ,अब तक है|

वो नही, नींद नही, फिर भी मैं खुश हूँ, गोया,

उसकी मासूम दुआओं का असर अब तक है|

उसकी ख्वाहिश कहीं मुट्ठी में बंद रेत ना हो,

मेरे अहसास में पैबस्त ये डर अब तक है|

मुझ से पूछा है कई बार, ढलते सूरज ने ,

यूँ तो 'शेखर' है तेरा नाम,…

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Added by ARVIND BHATNAGAR on August 18, 2013 at 1:30pm — 5 Comments

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