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Tasdiq Ahmed Khan's Blog – November 2017 Archive (2)

ग़ज़ल (नाज़ कब वो भी उठा पाते हैं दीवाने का )

(फाइलातुन -फ़इलातुन-फ़इलातुन-फेलुन )

जिन से आबाद हर इक गोशा है वीराने का |

नाज़ कब वो भी उठा पाते हैं दीवाने का |

इंतज़ारी में कटी उम्र नहीं इसका गम

रंज है आपका वादे से मुकर जाने का |

कमसे कम मेरे ख़यालों में ही आ जाया करो

वक़्त कब मिलता है तुम को मेरे घर आने का |

लाख तू मेरी वफ़ाओं को भुला दे दिल से

अज़्म मुहकम है मेरा प्यार तेरा पाने का |

कोई इक बूँद को तरसे कोई भर भर के पिए

खूब दस्तूर…

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Added by Tasdiq Ahmed Khan on November 17, 2017 at 11:00am — 24 Comments

ग़ज़ल (आने वाला कोई फिर दौरे परेशानी है )

(फाइलातुन -फइलातुन -फइलातुन -फेलुन )

आने वाला कोई फिर दौरे परेशानी है |

यक बयक करने लगा कोई महरबानी है |

देखता है जो उन्हें कहता है वो सिर्फ़ यही

इस ज़माने में नहीं उनका कोई सानी है |

आएगा सामने उसका भी नतीजा जल्दी

वक़्त के हुक्मरा की तू ने जो मनमानी है |

ख़त्म हो जाएगी हर चीज़ ही क्या है दुनिया

सिर्फ़ उल्फ़त ही वो शै है जो नहीं फानी है |

आ गया जब से मुझे उनका तसव्वुर करना

हो गई तब से…

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Added by Tasdiq Ahmed Khan on November 8, 2017 at 10:30pm — 14 Comments

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