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Mohan Sethi 'इंतज़ार''s Blog (28)

चींटियाँ .......'इंतज़ार'

जब तुम गयी हो

तो दिल का भवंरा बेसुध

तेरे दिल के बंद दरवाज़े से

जा टकराया

और गिर पड़ा जमीन पर

होश ना रहा उसको !

जब जागा नींद से

तो बेवफ़ाई की चींटियों ने

था उसे घेरा हुआ

नोच नोच कर खा रहीं थी

मेरे दिल के नादान भंवरे को

घसीटते हुए ले जा रहीं थी

अपनी मांद में

तड़पा था बहुत

कोशिश भी की छुटने की

जालिमों ने मौका न दिया

सोचा.... लोग तो चार कांधों की

आरजू करते हैं

और मुझे चार नहीं

हज़ार कांधे नसीब हुए

और…

Continue

Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on April 2, 2015 at 5:10am — 17 Comments

सूने पन्ने पे तेरा नाम .......'इंतज़ार'

बहुत बार समझाया

कभी दिल को फुसलाया

मगर खुद ही ना समझ पाया

मैं हूँ क्यों यहाँ पर

बस रोज़ वो अँधेरे

और तेरी यादें के

दहकते अंगारे

परवानों सा जलने की

दुआ करता हूँ

कुछ हसीन सपनों का व्यापार

अपनी नींदों से

किया करता हूँ

दिल में बसी मूरत को

पलकों में छिपा रखता हूँ

तेरी यादों को

कागज पे अक्सर उतार देता हूँ

जब सूने पन्ने पे तेरा नाम आता है

क्या जानू क्यूँ पन्ने को

अहंकार हो जाता है

और मुझे फिर से प्यार हो जाता है…

Continue

Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on March 25, 2015 at 11:48am — 22 Comments

गुल ........'इंतज़ार'

गुल से है परेशां गुलिस्तां सारा

भंवरे से दिल लगाने की ज़िद उसकी नहीं गवारा

मगर गुल जानता है कि आज काँटों का साथ

फिर माली के हाथों किसी अंजान के साथ

गुलशन से बिदाई का मसला है सारा 



बिछुड़ने का फिक्र नहीं उसको

कल का क्या.... आज तो जी लेने दो उसको

काट शाख़ से सब सूंघेंगे एक दिन

फिर अगले दिन मसल डालेंगे ये उसको

भंवरा तो रोज़ आ कर चूमता है

मंडराता है चारो तरफ लुभाता है उसको

अपनी गुंजन के गीत सुनाता है

और सुबह फिर मिलने का वादा दे जाता…

Continue

Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on March 24, 2015 at 8:16am — 10 Comments

हीरा हूँ ........'इंतज़ार'

हर हीरा किसी हसीना के
गले का हार नहीं बनता !
हर हसीना के गले को
हीरों का हार नहीं मिलता !

कई हीरे ज़मी में दबे रहते हैं
कोयलों की गोद में
सोये पड़े रहते हैं !
उनको तराशने वालों का
औजार नहीं मिलता !

न कमी हसीना के हुस्न में है
न हीरों की गुणवत्ता में !
बस किस्मत के खेल हैं सारे
किसी को वोह मिल जाते हैं
और हमें प्यार नहीं मिलता !!

***************************

मौलिक व अप्रकाशित

Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on March 23, 2015 at 12:42pm — 15 Comments

भँवरा........'इंतज़ार'

भँवरा हूँ ......
फूल दर फूल घूमना आदत मेरी
हर फूल को चूमना चाहत मेरी
फूल कहाँ पहचानते हैं मुझे
मेरे जैसे कई आते हैं हर रोज़ 
बिन बुलाये यहाँ !
मेरी तो फ़ितरत है
नये मन्ज़र ढूँढ़ना
रुक तो तभी पाऊंगा
जब किसी फूल के
ख़ूनी पंजों में जकड़ा जाऊंगा
वर्ना उड़ता उड़ता
बहुत दूर निकल जाऊंगा.........

"मौलिक व अप्रकाशित"

Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on March 17, 2015 at 4:30am — 10 Comments

पल पल ........'इंतज़ार'

पल पल मुझ से रूठा है

हर पल यूँ तो झूठा है

सच और झूठ का ताना बाना

जीवन का रूप अनूठा है

इक पल में वो अपने दीखे

दो पल में कई सपने दीखे

कुछ पल में सब बिखर गये

यूँ साथ हमारा छूटा है

क्या पल पल मुझसे रूठा है

या जग सारा ये झूठा है !

मैं दीया हूँ तू बाती है

दुनिया क्यूँ तुझे जलाती है

मुझ पे भी कालिख आती है

प्यार के झोंके जब

आग बुझाने आते हैं

बेदर्द नहीं सह पाते हैं 

हाथ बढ़ा ढक लेते हैं

आग को और भड़काते…

Continue

Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on March 16, 2015 at 4:30am — 11 Comments

होली है

आओ होली मिलन कर लें
जला बुराईयों को
अच्छाईयों को दिल में भर लें
मगर देखो तुम
होली की हुड़दंग में
रंग मुहब्बत का
ना इस तरहां लगाया करो
खेलो होली रंगों से
मगर दिल तक
ना आया करो
भांग का नशा है
थोड़ा संभल जाया करो
होली तो भूल जाओगे
अगले दिन
मगर दिल पे लगे रंगों को
जन्म भर ना भुला पाओगे
और हमें यूँ हीं ताउम्र
बे-वजह तड़पाओगे !!

मौलिक व अप्रकाशित

Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on March 6, 2015 at 4:48am — 6 Comments

ताना बाना ........

जीवन का ताना

अकेला उदास डोलता रहा

बाना कहाँ मिला

बुनने को

सच के ताने को

झूठे बानों से

बुनते रहे

एक जख्मी चादर

फरेब के सर पर ओढ़ा

सब्र के कारवाँ चलते रहे

जीने की रिवायत से

समझोता करते रहे

बिन प्यार की

बेरंग चादर ओढ़े

मुखोटों की मुस्कुराहटों का

दम भरते रहे

काश बाना

प्यार की सच्चाई से

खिलता कोई

तो एक सतरंगी चदरिया

बुन लेता

और बस…

Continue

Added by Mohan Sethi 'इंतज़ार' on February 17, 2015 at 11:21am — 12 Comments

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