For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Sushil Sarna's Blog (900)

राखी पर कुछ दोहे. . . .

राखी पर कुछ दोहे. . . .

भाई बहिन के प्यार का, राखी है त्योहार ।

पावन धागों में छुपी , बहना की मनुहार ।।

बहना भेजे डाक से, भाई को सन्देश ।

राखी भैया बाँधना, मैं बैठी परदेश ।।

रंग बिरंगी राखियाँ, रिश्तों का संसार ।

धागों में है छुपी हुई, बहना की मनुहार  ।।

राखी ले कर भ्रात के, बहना आई द्वार ।

तिलक लगाती माथ पर, देती दुआ हजार ।।

बहना चाहे भ्रात का, सुखी रहे परिवार ।

रिश्तों में चलती रहे, मीठी मधुर…

Continue

Added by Sushil Sarna on August 11, 2022 at 1:02pm — 2 Comments

गीत रीते वादों का. . . . .

गीत रीते वादों का ......

मैं गीत हूँ  रीते  वादों  का , मैं  गीत हूँ  बीती  रातों  का।

जो मीत से कुछ भी कह न सका,वो गीत हूँ मैं बरसातों का ।

          हर मौसम ने उस मौसम  की

          बरसातों  को   दहकाया   है ,

          बीत गया वो मौसम दिल का

          लौट के फिर  कब  आया  है ,

जश्न  मनाता हूँ  मैं  अपनी , भीगी  हुई  मुलाकातों  का ।

जो मीत से कुछ भी कह न सका,वो गीत हूँ मैं बरसातों का ।

            कैसे अपने  स्वप्न  मिटा  दूँ…

Continue

Added by Sushil Sarna on July 27, 2022 at 3:01pm — No Comments

दोहा त्रयी -फूल

दोहा त्रयी : फूल

कागज के ये फूल कब, देते कोई गंध  ।
भौंरों को भाता नहीं, आभासी मकरंद  ।।

इस नकली मकरंद पर, मौन मधुप गुंजार ।
अब कागज के फूल से, गुलशन है गुलज़ार ।।

अब कागज के पुष्प दें, प्रीतम को उपहार ।
मुरझाता नकली नहीं, फूलों का संसार ।।

सुशील सरना / 15-7-22

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Added by Sushil Sarna on July 15, 2022 at 3:17pm — No Comments

दोहा मुक्तक : गाँव ....

मुक्तक : गाँव .....

मिट्टी का घर  ढूँढते, भटक  रहे  हैं  पाँव।

कहाँ गई पगडंडियाँ, कहाँ गए वो  गाँव ।

पीपल बूढ़ा हो गया, मौन हुए सब  कूप -

काली सड़कों पर हुई, दुर्लभ ठंडी छाँव ।

                  *******

कच्चे घर  पक्के  हुए, बदल  गया  परिवेश ।

छीन लिया हल बैल का, यंत्रों  ने अब देश ।

बदले- बदले अब लगें , भोर साँझ  के  रंग  -

वर्तमान  में  गाँव  का, बदल  गया  है  पेश ।

(पेश =रूप, आकार )

                     ********

गाँवों…

Continue

Added by Sushil Sarna on July 11, 2022 at 1:00pm — No Comments

बुढ़ापा .....

बुढ़ापा ....

तन पर दस्तक दे रही, जरा काल की शाम ।

काया को भाने लगा, अच्छा  अब  आराम ।1।

बीते कल की आज हम, कहलाते हैं शान ।

शान बुढ़ापे की हुई, अपनों से अंजान ।2।

झुर्री-झुर्री पर लिखा, जीवन का संघर्ष ।

जरा अवस्था देखती ,मुड़ कर बीते वर्ष ।3।

देख बुढ़ापा हो गया, चिन्तित क्यों इंसान ।

शायद उसको हो गया, अन्तिम पल का भान ।4।

काया में कम्पन बढी , दृष्टि हुई मजबूर ।

अपनों से अपने हुए, जरा काल में दूर…

Continue

Added by Sushil Sarna on July 6, 2022 at 12:30pm — 4 Comments

दोहा मुक्तक .....

दोहा  मुक्तक ........

कड़- कड़ कड़के दामिनी, घन बरसे घनघोर ।

   उत्पातों  के  दौर  में, साँस का  मचाए  शोर  ।

        रात   बढ़ी  बढ़ते   गए,  आलिंगन   के   बंध -

           पागल दिल को भा गया , दिल का प्यारा चोर ।

                       * * * * *

एक दिवानी को हुआ, दीवाने  से  प्यार ।

     पलकों में सजने लगा, सपनों का संसार ।

           गुपचुप-गुपचुप फिर हुए, नैनों में संकेत  -

                चरम पलों में हो  गए, शर्मीले  अभिसार…

Continue

Added by Sushil Sarna on July 4, 2022 at 9:38pm — 2 Comments

पाँच दोहे मेघों पर. . . . .

पाँच दोहे मेघों पर . . . . .

अम्बर में विचरण करे, मेघों का विस्तार  ।

सावन की देने लगी, दस्तक अब बौछार ।।

मेघों का मेला करे, अम्बर का शृंगार ।

आज दिवाकर लग रहा, थोड़ा सा लाचार ।।

थोड़ी सी है धूप तो, थोड़ी सी बरसात ।

अम्बर में  आदित्य को, बादल देते मात ।।

बादल नभ को चूमते, पहन श्वेत परिधान ।

हंसों की ये टोलियाँ, आसमान की शान ।।

नील वसन पर कर दिया, मेघों ने शृंगार ।

धरती पर चलने लगी, शीतल मस्त बयार…

Continue

Added by Sushil Sarna on June 24, 2022 at 2:30pm — 6 Comments

हंसगति छन्द. . . . .

हंसगति छन्द. . . .(11,9)

जले  शमा  के   साथ, रात   परवाने ।
करें   इश्क  की  बात, शमा   दीवाने ।
दिल को दिल दिन-रात, सुनाता बातें ।
आती रह -रह याद, तन को  बरसातें ।
                  * * * *
बिखरी-बिखरी ज़ुल्फ,कहे अफसाने ।
तन्हा - तन्हा   आज,  लगे   मैख़ाने  ।
पैमानों   से   रिन्द ,  करें   मनमानी  ।
अब  लगती  है  जीस्त , यहाँ बेमानी ।

मौलिक एवं अप्रकाशित 

सुशील सरना / 23-6-22

Added by Sushil Sarna on June 23, 2022 at 1:14pm — No Comments

दोहा पंचक. . .

दोहा पंचक. . . . .

अद्भुत है ये जिंदगी, अद्भुत इसकी प्यास ।

श्वास-श्वास में आस का, रहता हरदम वास ।।

श्वास-श्वास में  आस का, रहता हरदम वास ।

इच्छाओं की वीचियाँ, दिल में करतीं रास ।।

इच्छाओं की वीचियाँ, दिल में करतीं रास ।

जीवन भर होती नहीं, पूर्ण जीव की आस ।।

जीवन भर होती नहीं, पूर्ण जीव की आस ।

अन्तकाल में जिन्दगी, होती बहुत  उदास ।।

अन्तकाल में जिन्दगी, होती बहुत उदास ।

अद्भुत है ये जिंदगी, अद्भुत…

Continue

Added by Sushil Sarna on June 22, 2022 at 6:12pm — 8 Comments

पितृ दिवस पर कुछ क्षणिकाएँ. . .

पितृ दिवस पर कुछ क्षणिकाएँ ....

काँधे को
काँधे ने
काँधे दिया
इक अरसे के बाद
सृष्टि रो पड़ी
.........................
छूट गया
उँगलियों से
उनका आसमान
इक नाद बनकर रह गया
इक नाम
पापा
............................
पापा
पुत्र का आसमान
पुत्र
पिता का अरमान
एक छवि एक छाया
एक जान
एक पहचान

सुशील सरना / 19-6-22

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Added by Sushil Sarna on June 19, 2022 at 8:28pm — 4 Comments

मुक्तक ( आधार छंद - हंसगति )

मुक्तक

आधार छंद हंसगति  (11,9 )

प्रीतम   तेरी  प्रीत , बड़ी   हरजाई ।

   विगत पलों की याद, बनी दुखदाई ।

      निष्ठुर  तेरा  प्यार , बहुत  तड़पाता -

           तन्हाई में  आज, आँख  भर  आई ।

                        * * *

दिल से दिल की बात, करे दिलवाला ।

    मस्ती  में  बस  प्यार , करे  मतवाला ।

        उसके ही बस गीत , सुनाता  मन  को -

             पी कर हो  वो  मस्त , नैन  की  हाला ।

सुशील सरना / 15-6-22

मौलिक एवं…

Continue

Added by Sushil Sarna on June 15, 2022 at 11:44am — 4 Comments

कौन है वो. . . .

कौन है वो ......

उनींदीं आँखें
बिखरे बाल
पेशानी पर सलवटें
अजब सी तिश्नगी लिए
चलता रहता है
मेरे साथ
मुझ सा ही कोई
मेरी परछांईं बनकर
कौन है वो
जो
मेरे देखने पर
दूर खड़ा होकर
मुस्कुराता है
मेरी बेबसी पर

सुशील सरना / 5-6-22

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Added by Sushil Sarna on June 5, 2022 at 12:15pm — No Comments

याद आयेगा हमें. . . . .

याद  आयेगा हमें .....

जान  ले  लेगा   हमारी   मुस्कुराना   आपका

इस गली का हर बशर अब है दिवाना आपका

बारिशों में बाम पर वो  भीगती  अगड़ाइयाँ

आँख से जाता नहीं वो रुख छुपाना आपका

हम गली के मोड़ पर हैं आज तक ठहरे हुए

सोचते हैं हो गया गुम क्यों ठिकाना आपका

दिल लगा कर तोड़ना तासीर है ये आपकी

दूर जाने का नहीं  अच्छा  बहाना  आपका

वो गिराना खिड़कियों से पर्चियाँ इकरार की 

याद  आयेगा  हमें  सदियों जमाना …

Continue

Added by Sushil Sarna on May 29, 2022 at 1:29pm — No Comments

रोला छंद. . . . .

रोला छंद. . . .

विगत पलों की याद, हृदय  को  लगे  सुहानी।
छलक-छलक ये नैन, गाल पर लिखें कहानी ।
मौन छुअन  संवाद, देह  पर  विचरण  करते ।
सुधियों  के  सब  रंग, रिक्त अम्बर  में भरते ।
                    *=*=*=*
तड़प- तड़प  के  रात, गुजारे  प्रेम  दिवानी ।
विरहन की ये पीर, जगत ने  कब  है  जानी ।
मौसम  गुजरे   साथ, प्यार  के  गये  जमाने ।
रह - रह  आते  याद, रात  के  वो अफसाने ।

सुशील सरना / 28-5-22

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Added by Sushil Sarna on May 28, 2022 at 2:23pm — No Comments

आँधियों से क्या गिला. . . . .

आँधियों से क्या गिला .....

2122  2122  2122  212

रूठ जाएँ मंजिलें  तो  रहबरों  से  क्या गिला

हो समन्दर बेवफ़ा तो कश्तियों से क्या गिला

टूट जाए घर किसी का ग़र  हवाओं  से  कहीं

वक्त ही ग़र हो बुरा तो आँधियों से क्या गिला

याद आया वो शज़र जिस पर गिरी थी बारिशें

आज भीगे हम अकेले  बारिशों से क्या  गिला

ज़ख्म  यादों के  न जाने आज क्यूँ रिसने  लगे

दर्द के हों  जलजले  तो आँसुओं से क्या…

Continue

Added by Sushil Sarna on May 24, 2022 at 4:00pm — 10 Comments

सिन्दूर -(क्षणिकाएँ )

सिन्दूर  (क्षणिकाएँ ).....

सजावट की

नहीं

निभाने की चीज है

सिन्दूर

******

निभाने की नहीं

आजकल

सजावट की चीज है

सिन्दूर

******

छीन लिया है

अर्थ

सिन्दूर का

वर्तमान के

बदले परिवेश ने

******

प्रतीक है

दो साँसों के समर्पण की

अभिव्यक्ति का

सिन्दूर

******

आरम्भ है

एक विश्वास के

उदय होने का

माथे पर अलंकृत

चुटकी भर

सिन्दूर

सुशील सरना /…

Continue

Added by Sushil Sarna on May 23, 2022 at 10:53am — 2 Comments

फिर किसी के वास्ते .......

फिर किसी के वास्ते ......

क्यूँ दिलाएं हम यकीं दिल को किसी  के वास्ते ।

हो गया दिल आज गमगीं फिर किसी के वास्ते ।

था बसाया घर कभी हमने किसी के ख़्वाब में ,

छोड़ दी हमने ज़मीं वो फिर किसी के वास्ते ।

मर मिटा था दिल कभी जो इक हसीं के नूर पर ,

तोड़ आए  दिल वहीं  वो फिर  किसी के वास्ते ।

दे गया महबूब मेरा  मुझ को  जीने की सज़ा ,

आज क्यूँ जाने हज़ीं है दिल किसी के वास्ते ।

वो तसव्वुर में हमारे बस गई कुछ इस तरह…

Continue

Added by Sushil Sarna on May 19, 2022 at 2:12pm — 3 Comments

गज़ल - ज़ुल्फ की जंजीर से ......

गजल- ज़ुल्फ की जंजीर से ......

2122 2122 2122 212



आश्ना  होते  अगर  हम  हुस्न  की  तासीर से

दिल लगाते हम भला क्यों ज़ुल्फ़ की ज़ंजीर से

खा रहे थे लाख क़समें जो हमारे प्यार की

दे गए वो दर्द लाखों इक नज़र के तीर से

हमसफ़र बन कर चले वो रास्ते में छोड़ कर

भर गए झोली  हमारी ग़र्द  की  जागीर  से

मंज़िलों  के  पास  आ  के  दूर  मंज़िंलें हो  गई

क्या गिला शिकवा करें हम धड़कनों के पीर से

बाद मुद्दत के मिले…

Continue

Added by Sushil Sarna on May 13, 2022 at 9:00pm — 8 Comments

बुझते नहीं अलाव. . . . (दोहा गज़ल )

बुझते नहीं अलाव .....(दोहा गज़ल )

मौन  प्रीत  के  हो गए, अंकित मन में  भाव ।

इन  भावों  के उम्र भर, बुझते नहीं  अलाव ।।

साँसों को मिलती नहीं, जब तक प्रीत की साँस,

रिसते   रहते  ह्रदय  में, मौन  प्रीत   के   घाव ।

आँखों   को   देती  रहीं , आँखें  ये  संदेश ,

दूर किनारा है बहुत , कागज की है नाव ।

अजब अगन है प्रीत की, अजब प्रीत की रीत ,

नैन  कोर  से  याद   के , होते   रहते   स्राव ।

ठहर गया है वक्त भी…

Continue

Added by Sushil Sarna on May 11, 2022 at 11:30am — 10 Comments

दोहा मुक्तक .....

दोहा मुक्तक.....

अपने कृत्यों  से  कभी, देना  मत  संताप ।
माँ के चरणों में कटें, जन्म- जन्म के पाप ।
फर्ज निभाना दूध का , हरना हर तकलीफ -
बेटे को  आशीष  से, माँ  के  मिले  प्रताप ।
                     * * * *
भूले से करना नहीं, माता का  अपमान ।
देना उसके  त्याग  को, सेवा से सम्मान ।
मूरत है ये ईश की, ये  करुणा  की  धार -
माँ के चरणों में सदा, सुखी रहे सन्तान ।

सुशील सरना / 10-5-22

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Added by Sushil Sarna on May 10, 2022 at 8:12pm — 5 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
6 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
12 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
12 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
14 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
yesterday

सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता जी, आपकी भावनाओं और मंच के प्रति आपके जुड़ाव को शब्द-शब्द में महसूस किया जा सकता…"
Tuesday
amita tiwari and आशीष यादव are now friends
Monday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"मान्यवर  सौरभ पांडे जी , सार्थक और विस्तृत टिप्पणी के लिए आभार."
Monday
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post भ्रम सिर्फ बारी का है
"आशीष यादव जी , मेरा संदेश आप तक पहुंचा ,प्रयास सफल हो गया .धन्यवाद.पर्यावरण को जितनी चुनौतियां आज…"
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय धामी जी सारगर्भित ग़ज़ल कही है...बहुत बहुत बधाई "
Monday
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार
"आदरणीय सुशील जी बड़े सुन्दर दोहे सृजित हुए...हार्दिक बधाई "
Monday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रबंधन समिति से आग्रह है कि इस पोस्ट का लिंक उस ब्लॉक में डाल दें जिसमें कैलंडर डाला जाता है। हो…"
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service