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विनय कुमार's Blog – March 2019 Archive (3)

चिट्ठियाँ --

चिट्ठियाँ नहीं जानती

वो तो बस चली आती हैं

कभी सही पते पर

तो अक्सर गलत पते पर

लेकिन उन्हें क्या पता

कि वह सालों साल

धूल खाती रहेंगी

दरअसल उनका गंतव्य

बदल चुका होता है

लेकिन लोग अपने पते

इन चिट्ठियों के लिए

अक्सर नहीं बदलते

बस फोन नंबर ही

बदल लेते हैं

सन्देश मिलते रहते हैं

उन बदले हुए नंबरों पर

लेकिन चिट्ठियाँ आती रहती हैं

उन पुराने पतों पर

लोग अक्सर भूल जाते हैं

लोग उन्हें अब नहीं बदलते…

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Added by विनय कुमार on March 19, 2019 at 7:13pm — 6 Comments

एक और कसम-व्यंग्य

दोस्त क्यूँ होते हैं, इस सवाल का जवाब जिंदगी के अलग अलग समय में अलग अलग हो सकता है. लेकिन एक जवाब तो कामन है कि जो आपके लिए हमेशा खड़ा रहे, आपकी हर मुसीबत में काम आए, वही असली दोस्त होता है. बहरहाल अधिकांश दोस्त ऐसे होते भी हैं, बस कुछेक अपवाद को छोड़कर.

कुछ लोगों का यह भी मानना है कि अगर सियापा ही न करें तो दोस्त कैसे, ये अलग बात है कि आप माने या न माने. अमूमन ऐसे दोस्त तो जिंदगी के शुरूआती दिनों में ही मिलते हैं जब आपके ऊपर किसी किस्म के सियापे का कोई असर नहीं पड़े. और मुझे तो बिलकुल नहीं…

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Added by विनय कुमार on March 19, 2019 at 7:00pm — 2 Comments

चलो मुद्दों की बात करते हैं

चलो मुद्दों की बात करते हैं

वही मुद्दे जिनसे वो डरते हैं



वादे जितने भी उनको करने हों

बेहिचक वो तो किया करते हैं



बात जो पूछ लो गरीबों की

वो अमीरों की बात करते हैं



आपने प्रश्न उनसे जो पूछे

देशद्रोही करार करते हैं



है कहाँ रोजगार गर पूछो

बैंड बाजे की बात करते हैं



क्या किसानों की करेंगे ये मदद

सोना, आलू से पैदा करते हैं



इनकी नज़रों में जनता उल्लू है

उल्लू ये सीधा किया करते…

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Added by विनय कुमार on March 15, 2019 at 4:05pm — 6 Comments

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