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धारावाहिक गजल भाग -1 ( लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' )

2122    2122    2122
***********************
डूबता  हो  सूर्य तो अब डूब जाए
मत कहो तुम रोशनी से पास आए /1
******
एक अल्हड़ गोद में शरमा रही जब
चाँद से  कह दो नहीं वह मुस्कुराए /2
******
थी  कभी  मैंने लगायी बोलियाँ भी
मोलने पर तब न मुझको लोग आए /3
******
आज मैं अनमोल हूँ बेमोल बिक कर
व्यर्थ  अब  बाजार जो कीमत लगाए /4
******
कामना जब मुक्ति की थी खूब मुझको
बाँधने  सब  दौड़ कर नित पास आए /5

रास  आया  है मुझे  जब  आज बंधन
लोग क्यों हैं इस तरह से तिलमिलाए/6
******
है मेरी निजता इसे मत भंग करना
छाँव  देते  जब  मुझे   ये केश भाए /7
******
इसलिए अब द्वार आए मुक्ति भी तो
चाहता   हूँ   बिन  पुकारे   लौट  जाए /8

******
देखना जब चाहता  था स्वप्न मीठे
वक्त आया धंुध की चादर उठाए /9

******
हर तरफ बरसात थी जब आसुओं की
मुश्किलों  से  भीगते  आँचल सुखाए /10
******
हो गया  अब  छाँव में  साकार सपना
सूर्य  से बोलो अधिक मत तमतमाए /11
******
मौलिक और अप्रकाशित

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 12, 2015 at 9:58am

आज मैं अनमोल हूँ बेमोल बिक कर
व्यर्थ  अब  बाजार जो कीमत लगाए-----बहुत खूब उम्दा 
हर तरफ बरसात थी जब आसुओं की
मुश्किलों  से  भीगते  आँचल सुखाए ----वाह्ह्ह्ह 

बढ़िया ग़ज़ल कही है लक्ष्मण भैय्या बहुत- बहुत बधाई. 

Comment by khursheed khairadi on February 12, 2015 at 12:31am

हर तरफ बरसात थी जब आसुओं की
मुश्किलों  से  भीगते  आँचल सुखाए /10
******
हो गया  अब  छाँव में  साकार सपना
सूर्य  से बोलो अधिक मत तमतमाए /11

आदरणीय लक्ष्मण साहब उम्दा ग़ज़ल हुई है |सादर अभिनन्दन |

Comment by Hari Prakash Dubey on February 11, 2015 at 8:07pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' साहब

/डूबता हो सूर्य तो अब डूब जाए

मत कहो तुम रोशनी से पास आए/ शानदार....बधाई शानदार !

 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on February 11, 2015 at 1:41pm

आदरणीय धामी जी

सुन्दर रचना  i सादर i


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 9, 2015 at 11:54pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी सर जी सुन्दर प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.

Comment by somesh kumar on February 9, 2015 at 10:33pm

कुछ-कुछ दुष्यंत कुमार की गजलों वाला अंदाज़ लग रहा है |बधाई 

Comment by Samar kabeer on February 8, 2015 at 10:40pm
जनाब,लक्ष्मण धामी जी,आदाब,सुन्दर प्रस्तुति के लिये बधाई स्वीकारें |

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