For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

‘’घर का मामला'' (लघुकथा)

‘’आपने आज का अखबार पढ़ा अशफ़ाक मियां” कश्मीर में हालात और बेकाबू हो गये हैं!

“हाँ श्रीवास्तव जी पढ़ा!” इतना कहकर अशफ़ाक मियां चुप हो गये।

‘’आखिर मौकापरस्तों के चंगुल में जनता कैसे फँस जाती है ?" श्रीवास्तव जी फिर बोल पड़े।

कुछ देर चुप रहने के बाद अशफ़ाक मियां गहरी साँस लेते हुए बोले---

‘’घर का मामला जब अदालत में जाये तो यही अंजाम होता है’’!

Views: 734

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on April 30, 2015 at 4:46pm

मिश्रा  जी बहुत सुन्दर गंभीर विचारणीय। काश लोग इस सब से बचे होते । गागर में सागर और एक सच व्यक्त करती अच्छी लघु कथा
माह के सक्रिय  सदस्य के लिए भी बधाई
भ्रमर५

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on April 22, 2015 at 10:21pm

प्रिय  कृष्णा

आपकी यह लघु कथा  मेरी नजर से छूट  गयी थी . आज सौरभ जी से भेंट भी हुयी और काफी देर तक बात हुयी . वहीं आपकी इस कथा का जिक्र चला. लिहाजा मैं इस कथा पर हूँ . इस कथा के बारे में सौरभ जी ने जितना कह दिया है उसके बाद कुछ बचता नहीं i  मैं बस इतना ही कहूंगा  इतिहास की गल्तीको आपने  बड़ा सादगी से बयां किया i  यही इस कथा की ख़ूबसूरती है . सस्नेह .

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on April 22, 2015 at 10:17am

आदरणीय मिथिलेश सरजी ! आपकी टिप्पणी का इन्तजार था...आपका अनुमोदन पाकर रचनाकर्म सार्थक हुआ!आभार आदरणीय!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on April 22, 2015 at 10:13am

आदरणीय vijai shanker सरजी! रचना के अनुमोदन के लिए हार्दिक आभार!

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on April 22, 2015 at 10:10am

अहा! गुरुवर...आपका आशीर्वाद पाकर अभिभूत हूँ!...लघुकथा के मूल को उभारकर आ० आपने और मुखरित कर दिया है...मै इसी सोच में था के शायद लघुकथा के कथ्य को और स्पष्ट करने की आवश्यकता रह गयी,क्युकी मुझे टिप्पणियों में जिस उत्तर की आशा थी,वो मिल नही रही थी!!...पर आ० आपकी विस्तृत टिप्पणी ने मेरी शंका को दूर कर दिया!हार्दिक आभार और नमन!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on April 22, 2015 at 1:03am

कुछ देर चुप रहने के बाद अशफ़ाक मियां गहरी साँस लेते हुए बोले---
 ‘’घर का मामला जब अदालत में जाये तो यही अंजाम होता है’’!................  

अद्भुत समापन !

भाई कृष्ण मिश्रजी, आपकी इस लघुकथा को मैं अपनी अबतक पढ़ी पाँच सबसे अच्छी लघुकथाओं में पाता हूँ. हर तरह से समृद्ध यह लघुकथा सीधे दिल में उतर जाती है. स्वतंत्र भारत के इतिहास की सबसे बड़ी भूल को जिस सहजता से यह लघुकथा आम करती है इसका कोई ज़वाब नहीं है.

सही है, न यूएनओ में प्रथम प्रधानमंत्री इस समस्या को ले गये होते, न उन्होंने पेब्लिसाइट की बात की होती, न यह सामयिक बवाल कैंसर का रूप अख़्तियार कर भारतीयों के गले पड़ता. हर संवेदनशील भारतीय के हृदय के कचोटपन को स्वर देती इस लघुकथा का कथ्य-विस्तार स्वयं में इतिहास की दुखती रग़ के दर्द को साझा कर रहा है. भारत का हर सच्चा नागरिक अपनी विवशता पर झल्ला कर रह जाता है. भोले-भाले कश्मीरी युवाओं को भारत के ख़िलाफ़ उकसाया जाता है. हर रोज़ देश के जवानों की हेठी होती रहती है. तो दूसरी ओर सामान्यजन को यह पता ही नहीं चल पाता कि समस्या आख़िर है कहाँ. सामान्य जनता उंगली पड़ोसी देश की ओर करती रहती है.

शिल्प की कसौटी पर भी यह लघुकथा अत्यंत कसी हुई है और सफल रचना के तौर पर सामने आती है. कथानक को इतनी महीनी से बुना गया है कि लेखक की मानसिक परिपक्वता का भान सहज ही हो जाता है. श्रीवास्तवजी जहाँ आज के सामान्यजन का प्रतिनिधित्व करते हुए हैं तो, अशफ़ाक़ मियां जागरुक किन्तु किंकर्तव्यविमूढ़ नागरिक के रूप में अत्यंत सफल हैं.
कथा विन्यास में अभिव्यंजना का स्तर तो यह है कि इससे कविताई का अहसास हो रहा है.

लघुकथा के समस्त तकनीकि पक्षों पर खरी उतरती इस लघुकथा के लिए बार-बार बधाइयाँ और हृदय की अतल गहराइयों से शुभकामनाएँ


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on April 21, 2015 at 10:30pm

आदरणीय कृष्ण भाई जी बहुत गंभीर प्रस्तुति ... सफल लघुकथा 

हार्दिक बधाई 

Comment by Dr. Vijai Shanker on April 21, 2015 at 12:58am
गंभीर प्रस्तुति, बधाई , प्रिय कृष्ण मिश्रा जी , सादर।
Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on April 20, 2015 at 9:54pm

आदरणीया राजेश कुमारी ज़ी! रचना पर आपकी सराहना पाकर धन्य हुआ,रचनाकर्म सार्थक हुआ!हृदयतल से आभार!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 20, 2015 at 9:37pm

बहुत गहन बात कही लघु कथा के माध्यम से ...ये घर के मामले भी घरवाले ही बाहर तक पंहुचाते हैं अपना देश तो सदा इसी कोशिश में है की घर का मामला घर में ही सुलझ जाए मगर गैरों (जो अपने देश में रहकर ही गैरों सा बर्ताव करते हैं )को  कैसे समझाएं?? बढ़िया लघु कथा कृष्ण जी हार्दिक बधाई .

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय अजय गुप्ता ’अजेय’ जी, आपकी संलग्नता आश्वस्तिकारी है. आपका सोचना आपके पहलू से…"
2 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"इस सारी चर्चा के बीच मैं एक बात और कहना चाहता हूँ। जैसा कि हम सबने देख लिया कि सदस्य इस मंच के लिए…"
6 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जी आदरणीय "
6 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post प्यादे मान लिये जाते हैं मात्र एक संख्या भर
"आदरणीय अमिताजी, हार्दिक बधाइयाँ    प्रस्तुति में रचनात्मकता के साथ-साथ इसके प्रस्तुतीकरण…"
23 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post कुंडलिया
"आदरणीय सुरेश कल्याण जी, आपकी उपस्थिति के लिए हार्दिक धन्यवाद  छंद की अंतिम दोनों पंक्तियों की…"
23 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
"एक मार्मिक भावदशा को शाब्दिक करने का सार्थक प्रयास हुआ है, आदरणीया अमिता तिवारीजी. आप सतत अभ्यासरत…"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"शुक्रिया आदरणीय सर जी। डाउनलोड करने की उस व्यवस्था में क्या हम अपने प्रोफाइल/ब्लॉग/पन्ने की पोस्ट्स…"
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अभी प्रश्न व्यय का ही नहीं सक्रियता और सहभागिता का है। पोर्टल का एक उद्देश्य है और अगर वही डगमगा…"
yesterday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जैसा कि ज्ञात हुआ है कि संचालन का व्यय प्रतिवर्ष 90 हज़ार रुपये आ रहा है। इस रकम को इतने लंबे समय तक…"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"लगभग 90 हजार प्रति वर्ष"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सादर नमस्कार और आदाब सम्मानित मंच। ओबीओ के वाट्सएप समूह से इस दुखद सूचना और यथोचित चर्चा की जानकारी…"
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय, ओ.बी.ओ. को बंद करने का निर्णय दुखद होने के साथ साथ संचालक मण्डल की मानसिक पराजय, थकान आदि…"
Tuesday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service