For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मक्खियाँ (लघुकथा) राहिला

सौम्या की खास सहेली काफ़ी जतन के बाद भी लन्दन से शादी के एक दो दिन पहले ना पहुँच, ठीक उसी दिन पहुँच पायी।अपनी प्रिय सखी की पसंद को लेकर उसके मन में काफ़ी सवाल थे,जो मौका पाते ही निकल पड़े।

"तू बस एक वजह बता दे इस कोयले की खान से शादी करने की?"उसने एक नज़र स्टेज पर खड़े उसके दूल्हे डाल कर कहा।

"तमीज से बोल रमा!इतना तो याद रख ,तू मेरे पति के बारे में बात कर रही है।"

"अच्छा!!खूब ,जरा देख..,अपने पूरे कुटुंब को एक नज़र।इतनी हेठी शख्सियत तो तेरे ड्राइवर की भी नहीं।"

"शक्ल सूरत ही तो सब कुछ नहीं है।फिर शहर की  जानीमानी हस्तियों में गिनती है उनकी।और इन सब से अहम बात ये कि वो मुझसे बेइंतिहा मुहब्बत करते है, मेरी इज्जत करतेहै ।एक लड़की को और क्या चाहिए।" 

"मुहब्बत..!!, वो तो राकेश भी तुझसे बेपनाह करता था।उस जैसे सुंदर, सजीले नौजवान को तूने बिना बात ठुकरा दिया।जबकि शायद ही कॉलेज की कोई लड़की हो जो उसपर ना मरती हो।"

"इसी लिये तो, सारी उम्र भर उस गुड़ से मक्खियाँ कौन हटाता फिरता।मैं माँ की तरह सहनशील भी तो नहीं।"

स्टेज से दूर खड़े, महिलामित्रों से घिरे, अपने सुदर्शन पिता की ओर एक नजर फेंक कर वो बोली।

.

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 795

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Rahila on July 3, 2016 at 10:49am
बहुत शुक्रिया आदरणीय तेजवीर सर जी!सादर प्रणाम
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on July 3, 2016 at 8:11am
पारिवारिक माहौल का सन्तानों की सोच, मनोविज्ञान पर बहुत प्रभाव पड़ता है। कथा की पात्रा देखी व सुनी बातों का असर है, इसलिए काफी सोच समझकर जीवन साथी का चयन किया है। लेकिन सुदर्शन हो या बदसूरत, नामी व्यक्तित्व हो, सामान्य या बदनाम व्यक्तित्व हो, शादी के पहले प्राप्त जानकारी व परिचय कई बार शादी के बाद विपरीत छाप भी छोड़ सकता है। सुदर्शन लोगों के व्यक्तित्व भी बहुत सुंदर होते हैं और काले-कलूटे बदसूरत से लोग भी रसिक, भ्रष्ट या ज़ुल्मी जीवन साथी साबित हो सकते हैं। यहाँ पात्रा का अपना अनुभव है अतीत व वर्तमान का, भविष्य अभी सपनों की तरह ही है। बहुत अच्छी कहावत के इर्द-गिर्द बुनी गई कथा पुनः गागर में सागर ही है। कुछ पंक्तियाँ कहे व अनकहे में बहुत कुछ कह रही हैं। नकारात्मक संदेश भी है, सकारात्मक भी! इसलिए पाठकों को एक विचारणीय मुद्दाव संदेश तो देती है । बहुत बढ़िया सुंदर लघु प्रस्तुति के लिए तहे दिल से बहुत बहुत मुबारकबाद आपको मोहतरमा राहिला साहिबा।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 2, 2016 at 9:18pm

राहिला जी मैं सोचता हूँ सुन्दर लड़की से शादी करना भी ऐसा ही जोखिम है भवरों से बेचारा पति कब तक निपटेगा . सादर .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on July 2, 2016 at 6:30pm

इसी लिये तो, सारी उम्र भर उस गुड़ से मक्खियाँ कौन हटाता फिरता---वाह वाह क्या पंच लाइन जबरदस्त कहीं पहले भी सुनी है --हाँ याद आया अपने बेटी से ही सुनी है ..हालाँकि वो भी गुड से कमतर  नहीं है और आपकी लघु कथा की नायिका की तरह आज की ही लड़की है\हाहाहा कई बार लघु कथा के किरदार अपने से लगने लगते हैं यही तो खूबी होती एक अच्छी लघु कथा की जो इस लघु कथा में भी है |

बहुत बहुत बधाई प्रिय राहिला जी | 

Comment by Nita Kasar on July 1, 2016 at 8:55pm
बेहद धीर गंभीर बात कही है आपने कथा के ज़रिये,इसलिये तो सारी उम्र भर उस गुड से मक्खियाँ कौन हटाता फिरता,मैं माँ की तरह सहनशील भी तो नही ।यहाँ कथा में सार्थक संदेश की प्रस्तुति हुई है बधाई आपको आद०राहिला जी ।
Comment by KALPANA BHATT ('रौनक़') on July 1, 2016 at 8:48pm

शानदार कथा  हुई है आदरणीय राहिला जी बधाई स्वीकारें |

Comment by Sushil Sarna on July 1, 2016 at 8:15pm

शानदार अादरणीया राहिला जी शानदार  ... बहुत ही गहरी सोच ओर चोट की इस लघु कथा के लिए हार्दिक बधाई। 

Comment by TEJ VEER SINGH on July 1, 2016 at 7:42pm

हार्दिक बधाई आदरणीय राहिला जी!बहुत शानदार प्रस्तुति!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Sunday
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Saturday
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Saturday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी विद्वद्जन अपने-अपने हिसाब कुछ न कुछ चर्चा कर रहे हैं, उपाय बता रहे हैं, आदरणीय ..  आप भी…"
Jun 12
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" आदरणीय सौरभ साहब,  अंततोगत्वा कुछ ऐसा प्रबंध तो होना ही चाहिए कि ओ,बी,ओ पराभव को प्राप्त…"
Jun 12
जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

भक्ति गजल

सजल कन्हाइ रूपक रस बहाबैएहरिक ई रूप दुनियाकेँ रिझाबैएमुकुटपर पैंख मोरक मोहनी सोहैहियामे रस सिनेहक ई…See More
Jun 11

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  उत्साहित बने रहने और सतत चलते रहने के सुझाव से निस्सृत होती सकारात्मकता का आयाम आश्वस्तिकारी…"
Jun 8
धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
Jun 6

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
Jun 6

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service