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बलातकार्य (छंदमुक्त कविता)

बलात हालात बलात नियंत्रण में हैं न!
देश-देशांतर तिजारात आमंत्रण में हैं न!
आचार-विहार, व्यवहार-व्यापार, प्रहार,
घात-प्रतिघात धार अभियंत्रण में हैं न!
**
बदले 'बदले के ख़्यालात' चलन में हैं न!
अगले-पिछले अहले-वतन फलन में हैं न!
बापू तुम्हारे ही देश में, देशभक्तों के वेश में
नोट-वोट, ओट-चोट-वोट अवकलन में हैं न!


(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by नाथ सोनांचली on October 13, 2018 at 8:47am

आद0 शेख शहज़ाद उस्मानी साहब सादर अभिवादन। बढिया मुक्तक लिखा आपने। कोटिश बधाइयां निवेदित करता हूँ। सादर

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on October 12, 2018 at 6:32pm

 मेरी इस तात्कालिक रचना पर समय देकर अनुमोदन और हौसला अफ़ज़ाई हेतु  तहे दिल से बहुत-बहुत शुक्रिया मुहतरम जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब, जनाब तेजवीर सिंह साहिब,  बृजेश कुमार 'ब्रज' जनाब डॉ. छोटेलाल सिंह साहिब, जनाब  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' साहिब,  जनाब समर कबीर साहिब, 

Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on October 11, 2018 at 5:56pm

आदरणीय उस्मानी साहब सादर प्रणाम आपकी रचना बहुत ही जबरदस्त है व्यंग्य का अनूठा संगम है दिली मुबारकबाद कुबूल कीजिए

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on October 11, 2018 at 11:37am

अच्छी कटाक्ष पूर्ण कविता हुई आदरणीय..

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on October 10, 2018 at 6:40am

आ. भाई शेख शहजाद जी, सादर अभिवादन । अच्छी रचना के लिए हार्दिक बधाई ।

Comment by Samar kabeer on October 9, 2018 at 2:52pm

जनाब शैख़ शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,बहुत उम्दा कविता हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Mohammed Arif on October 9, 2018 at 11:38am

आदरणीय शेख शहज़ाद उस्मानी जी आदाब,

                                    बहुत ही सामयिक और ज्वलंत मुक्तक । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by TEJ VEER SINGH on October 9, 2018 at 11:05am

हार्दिक बधाई आदरणीय शेख उस्मानी जी।बेहतरीन गूढ़ संदेश देती प्रस्तुति।

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