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Pradeep Devisharan Bhatt
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JAWAHAR LAL SINGH commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "मरघट के कपोत"
"श्मशान ऐसी जगह है जहाँ जाकर वैराग्य उत्पन्न हो जाता है ....फिर भी आपकी भावना का शब्दों में निरूपण बेहतरीन ढंग से किया है, आदरणीय प्रदीप भट्ट जी."
Feb 7
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "मरघट के कपोत"
"आद0 Pradeep Devisharan Bhatt जी सादर अभिवादन। अच्छी रचना हुई है, बधाई स्वीकार कीजिये। कुछ जगहों पर टंकण त्रुटि है। जैसे जीवित शुद्ध है"
Feb 5
Pradeep Devisharan Bhatt commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "अज़ीम शख़्स की दास्तां"
"सुरेंद्र जी धन्यवाद"
Feb 5
Pradeep Devisharan Bhatt commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "अज़ीम शख़्स की दास्तां"
"शुक्रिया महेंद्र जी"
Feb 5
Pradeep Devisharan Bhatt commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "मरघट के कपोत"
"आपका बहुत बहुत आभार"
Feb 5
Samar kabeer commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "मरघट के कपोत"
"जनाब प्रदीप भट्ट साहिब आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें ।"
Feb 4
Pradeep Devisharan Bhatt posted a blog post

"मरघट के कपोत"

मनुज पशु पक्षी और जंतु,एक ही सबका जीवन दाता,धनी हो या फिर निर्धन कोई,मरघट अंतिम ही सुख् दाता ।भोर से लेकर सांझ तलक शव,मरघट में आते रह्ते हैं,चंद्न लकडी घी पावक मिल,भस्म उसे करते रहते हैं ।मूषक पिपिलिका कपोत उपाकर,व्रीही खाकर जीवीत रहते हैं,दूषित समझ मनुज जो छोडे,वो जल पी जीवीत रहते हैं ।उचित अनुचित तो ये भी जाने,मनुज के मन को भी पहचाने,पाप पुण्य का ज्ञान इन्हे भी,पर भूखा पेट तो कुछ ना जाने ।अगर नहीं हो पुण्य लालसा,मनुज नहीं कुछ करने वाला,पाप के भय से भयातुर मन को,स्वय मनुज है छ्लने…See More
Feb 4
Pradeep Devisharan Bhatt posted a blog post

"अज़ीम शख़्स की दास्तां"

जब वो कहता है तो वो कहता है रोक पाता नहीं उसे कोई , उसके आगे ना रंक, राजा है , कंठ में कोयल सा उसके वासा है ॥ जब भी कहता है सच ही कहता है जैसे बच्चा हृदय में रहता है , उसके जैसा नहीं कोई सानी , वो भी लिखता है पानी पे पानी ॥ धार शब्दोँ की उसकी तीखी है , जानता है वो जिसपे बीती है कह के उसको क्या तुम बुलाओगे , तुम ना समझे हो ना समझ पाओगे ॥ उसपे मर्ज़ी चलाना मुश्क़िल है, झूठ के पांव पाना मुश्क़िल है , कोशिशें सब नाकारा कर देगा , तुमको इंसानियत से भर देगा ॥ बरसों में शख़्स ऐसा होता है,  बीज उल्फ़त…See More
Jan 16
Samar kabeer commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "अज़ीम शख़्स की दास्तां"
"महब्बत है आपकी,सलामत रहो ।"
Jan 8
Mahendra Kumar commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "अज़ीम शख़्स की दास्तां"
"बहुत ख़ूब सर! आपने तो कमाल कर दिया. इसको कहते हैं उस्ताद. दण्डवत प्रणाम है आपको. यही चीज़ है जो हम सबको अपने मिसरों में लानी चाहिए. बहुत-बहुत धन्यवाद सर. सादर."
Jan 7
Samar kabeer commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "अज़ीम शख़्स की दास्तां"
"महेन्द्र जी, 'धार शब्दोँ की उसके तीखी है' "उसके शब्दों की धार तीखी है"--और स्पष्ट हो गया न?"
Jan 7
Mahendra Kumar commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "अज़ीम शख़्स की दास्तां"
"आदरणीय प्रदीप देवीशरण भट्ट जी, अच्छी रचना हुई है. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए.  //धार शब्दोँ की उसके तीखी है// सादर."
Jan 7
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "अज़ीम शख़्स की दास्तां"
"आद0 प्रदीप देवीशरण भट्ट जी सादर अभिवादन। बढ़िया रचना हुई है, कुछ टंकण त्रुटियों को देख लें। इस रचना पर मेरी बधाई स्वीकार कीजिये"
Jan 7
Samar kabeer commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "अज़ीम शख़्स की दास्तां"
"जनाब प्रदीप भट्ट जी आदाब,अच्छी रचना हुई है,बधाई स्वीकार करें । ' कोशिशें सब नकारा कर देगा' इस पंक्ति में 'नकारा' को "नाकारा" कर लें । ' आओ हम उसका अहतराम करें' इस पंक्ति में 'अहतराम' को…"
Jan 5
Pradeep Devisharan Bhatt posted a blog post

"अज़ीम शख़्स की दास्तां"

जब वो कहता है तो वो कहता है रोक पाता नहीं उसे कोई , उसके आगे ना रंक, राजा है , कंठ में कोयल सा उसके वासा है ॥ जब भी कहता है सच ही कहता है जैसे बच्चा हृदय में रहता है , उसके जैसा नहीं कोई सानी , वो भी लिखता है पानी पे पानी ॥ धार शब्दोँ की उसकी तीखी है , जानता है वो जिसपे बीती है कह के उसको क्या तुम बुलाओगे , तुम ना समझे हो ना समझ पाओगे ॥ उसपे मर्ज़ी चलाना मुश्क़िल है, झूठ के पांव पाना मुश्क़िल है , कोशिशें सब नाकारा कर देगा , तुमको इंसानियत से भर देगा ॥ बरसों में शख़्स ऐसा होता है,  बीज उल्फ़त…See More
Jan 4
Shlesh Chandrakar commented on Pradeep Devisharan Bhatt's blog post "आजकल"
"बहुत सुंदर, प्रदीप जी, आजकल"
Dec 1, 2018

Profile Information

Gender
Male
City State
Mumbai
Native Place
Roorkie
Profession
Government
About me
Superintendent in KVIC, Mumbai

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"मरघट के कपोत"

मनुज पशु पक्षी और जंतु,

एक ही सबका जीवन दाता,

धनी हो या फिर निर्धन कोई,

मरघट अंतिम ही सुख् दाता ।

भोर से लेकर सांझ तलक शव,

मरघट में आते रह्ते हैं,

चंद्न लकडी घी पावक मिल,

भस्म उसे करते रहते हैं ।

मूषक पिपिलिका कपोत उपाकर,

व्रीही खाकर जीवीत रहते हैं,

दूषित समझ मनुज जो छोडे,

वो जल पी जीवीत रहते हैं ।

उचित अनुचित तो ये भी जाने,

मनुज के मन को भी पहचाने,

पाप पुण्य का ज्ञान…

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Posted on February 4, 2019 at 12:30pm — 4 Comments

"अज़ीम शख़्स की दास्तां"

जब वो कहता है तो वो कहता है 

रोक पाता नहीं उसे कोई , 

उसके आगे ना रंक, राजा है , 

कंठ में कोयल सा उसके वासा है ॥ 

जब भी कहता है सच ही कहता है 

जैसे बच्चा हृदय में रहता है , 

उसके…

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Posted on January 4, 2019 at 1:00pm — 8 Comments

"आजकल"

आजकल कोई बुलाता भी नहीं।

आजकल मैं भी कहीं जाता नहीं

आजकल हर ओर है बदली फिज़ा

आजकल गायब है चेहरे से गीज़ा॥

 

आजकल कुछ भी सुहाता ही नहीं।

आजकल मैं गुनगुनाता भी नहीं

आजकल बदले हुए हालात हैं

आजकल मैं मुस्कुराता भी नहीं॥

 

आजकल बेकार है सब कोशिशें।

आजकल हैं लग रही बस बंदिशें

आजकल अपने ही छलते हैं यहाँ

आजकल हैं सब बहुत बस परेशां॥

 

आजकल वादों की ही भरमार है।

आजकल गैरों के सर पे हाथ…

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Posted on November 30, 2018 at 4:00pm — 2 Comments

"अहसास"

ज़िंदगी दी है खुदा ने,मुस्कुराने के लिए

भूलना लाज़िम है तुमको,याद आने के लिए

 

बेखयाली मे कदम फ़िर, खींच लाये है मुझे

मैं नहीं आया किसी का, दिल चुराने के लिए

 

यूँ ही मिल जाए कोई फ़िर, क़द्र करता ही…

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Posted on November 21, 2018 at 1:00pm — 3 Comments

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At 7:12am on November 21, 2018, Ahmed Maris said…

Good Day,
How is everything with you, I picked interest on you after going through your short profile and deemed it necessary to write you immediately. I have something very vital to disclose to you, but I found it difficult to express myself here, since it's a public site.Could you please get back to me on:( mrsstellakhalil5888@gmail.com ) for the full details.

Have a nice day
Thanks God bless.
Stella.

 
 
 

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