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SALIM RAZA REWA's Blog – April 2019 Archive (5)

अपनी ज़ुल्फों को धो रही है शब - सलीम रज़ा रीवा

2122 1212 22

अपनी ज़ुल्फों को धो रही है शब

और ख़ुश्बू निचो रही है शब

oo

मेरे ख़ाबों की ओढ़कर चादर

मेरे बिस्तर पे सो रही है शब

oo

अब अंधेरों से जंग की ख़ातिर

कुछ चराग़ों को बो रही है शब

oo

सुब्ह--नौ के क़रीब आते ही

अपना अस्तित्व खो रही है शब

oo

दिन के सदमों को सह रहा है दिन

रात का बोझ ढो रही है शब

___________________

"मौलिक व…

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Added by SALIM RAZA REWA on April 29, 2019 at 10:51am — 6 Comments

जनाबे मीर के लहजे की नाज़ुकी कि तरह - सलीम रज़ा रीवा

1212 1122 1212 22/112

--

जनाबे मीर के लहजे की नाज़ुकी कि तरह 

तुम्हारे लब हैं गुलाबों की पंखुड़ी की तरह 

oo

शगुफ्ता चेहरा ये  ज़ुलफें ये नरगिसी आँखे 

तेरा हसीन तसव्वुर है शायरी की तरह 

oo

अगर ऐ जाने तमन्ना तू छत पे आ जाए 

अंधेरी रात भी चमकेगी चांदनी की तरह

oo

यूँ ही न बज़्म से तारीकियाँ हुईं ग़ायब

कोई न कोई तो आया है…

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Added by SALIM RAZA REWA on April 18, 2019 at 9:55am — 7 Comments

हद से गुज़र गई हैं ख़ताएँ  -सलीम रज़ा रीवा

मफ़ऊल फ़ाइलात मुफ़ाईलु फ़ाइलुन

.

हद से गुज़र गई हैं ख़ताएँ तो क्या करें 

ऐसे में उनसे दूर ना जाएँ तो क्या करें 

oo

उसकी अना ने सारे तअल्लुक़ मिटा दिए 

उस बे-वफ़ा को भूल  जाएँ तो क्या करें   

oo

मीना भी तू है मय भी तू साक़ी भी जाम भी

आँखों में तेरी डूब न जाएँ तो क्या करें

oo

कश्ती को डूबने से बचाया बहुत मगर 

हो जाएं गर…

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Added by SALIM RAZA REWA on April 8, 2019 at 4:30pm — 10 Comments

आख़िर ये इश्क़ क्या है - सलीम रज़ा रीवा

मफ़ऊल फ़ाइलातुन मफ़ऊल फ़ाइलातुन

_____________

आख़िर ये इश्क़ क्या है जादू है या नशा है

जिसको भी हो गया है पागल बना दिया है

oo

हाथो में तेरे हमदम जादू नहीं तो क्या है

मिट्टी को तू ने छूकर सोना बना दिया है

oo

उस दिन से जाने कितनी नज़रें लगी हैं मुझपर

जिस दिन से तूने मुझको अपना बना लिया है

oo

खिलता हुआ ये चेहरा यूँ ही रहे सलामत

तू ख़ुश रहे हमेशा मेरी यही…

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Added by SALIM RAZA REWA on April 4, 2019 at 9:13am — 6 Comments

जिंदगी को गुनगुना कर चल दिए-सलीम रज़ा रीवा

ओबीओ को समर्पित एक क़त'आ  

----------------------------------

जब से तेरी मेहरबानी हो गई

ख़ूबसूरत ज़िन्दगानी हो गई

हम हुए तेरे दिवाने इस तरह

जिस तरह 'मीरा' दिवानी हो गई

...........

फ़ाइलातुन फ़ाइलातुन फ़ाइलुन

बहरे रमल मुसद्दस महज़ूफ़

--------

जिंदगी को गुनगुना कर चल दिए

मौत को अपना बना कर चल दिए

oo

उम्र भर की दोस्ती जाती रही

आप ये क्या गुल खिलाकर चल…

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Added by SALIM RAZA REWA on April 2, 2019 at 10:00am — 6 Comments

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