For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Sushil Sarna's Blog – August 2017 Archive (11)

भोर होने से पहले ...

भोर होने से पहले ...

वाह

कितनी अज़ीब

बात है

सौदा हो गया

महक का

गुल खिलने से

पहले

सज गयी सेजें

सौदागरों की आँखों में

शब् घिरने से

पहले

बट गया

जिस्म

टुकड़ों में

हैवानियत की

चौख़ट पर

भर गए ख़ार

गुलशन के दामन में

बहार आने से

पहले

वाह

इंसानियत के लिबास में

हैवानियत

कहकहे लगाती है

ज़िंदगी

दलालों की मंडी में

रोज मरती है

जीने…

Continue

Added by Sushil Sarna on August 31, 2017 at 4:30pm — 12 Comments

जब से तूने ..

जब से तूने ..



जब से तूने

मुझे

अपनी दुआओं में

शामिल कर लिया

मैं किसी

खुदा के घर नहीं गया



जब् से तूने

अपने लबों पे

मेरा नाम

रख लिया

मैं

तिश्नगी भूल गया



जब से तूने

मेरी आँखों को

अपने अक्स से

सँवारा हे'

मेरे लबों ने

हर लम्हा

तुझे पुकारा है



जब से तूने

निगाह फेरी है

लम्स-ए-मर्ग का

अहसास होता है

वो शख़्स

जो तुझमें कहीं

सोता था

आज

दहलीज़े…

Added by Sushil Sarna on August 30, 2017 at 3:30pm — 8 Comments

सिहरन ..../ज़न्नत ...

सिहरन ....

ये किसके आरिज़ों ने चिलमन में आग लगाई है।

ये किसकी पलकों ने फिर ली आज अंगड़ाई है।

होने लगी सिहरन सी अचानक से इस ज़िस्म में -

ये किसकी हया को छूकर नसीमे सहर आई है।

............................................................

ज़न्नत ...

वो उनके शहर की हवाओं के मौसम l

कर देते हैं यादों से आँखों को पुरनम l

तमाम शब रहती है ख़्वाबों में ज़न्नत -

पर्दों से हया के छलकती .है शबनम l



सुशील सरना

मौलिक एवं…

Continue

Added by Sushil Sarna on August 30, 2017 at 2:52pm — 6 Comments

लौट आओ ....

लौट आओ .... 

बहुत सोता था

थक कर

तेरे कांधों पर

मगर

जब से

तू सोयी है

मैं

आज तक

बंद आँखों में भी

चैन से

सो नहीं पाया

माँ

जब भी लगी

धूप

तुम

छाया बन कर

आ गए

जब से

तुम गए हो

मुझे

धूप

चिढ़ाती है

छाया में भी

बहुत सताती है

पापा

डांटते थे

जब पापा

माँ

तुम मुझे

अपनी ममता में

छुपाती थी

डांटती थी

जब माँ…

Continue

Added by Sushil Sarna on August 22, 2017 at 5:52pm — 17 Comments

एक मुट्ठी राख़ ..../अंगड़ाइयों से...

एक मुट्ठी राख़ ....

न ये सुबह तेरी है न रात तेरी है l
आबगीनों सी बंदे हयात तेरी  है l
इतराता है क्यूँ तू मैं की क़बा में -
एक मुट्ठी राख़ औकात  तेरी  है l

........................................

अंगड़ाइयों से...

उम्र जब अपने शबाब पर होती है l
तो मोहब्बत भी बेहिसाब  होती है l
जवां अंगड़ाइयों से मय बरसती है -
हर मुलाक़ात हसीन ख़्वाब होती है l

सुशील सरना

मौलिक एवं अप्रकाशित  

Added by Sushil Sarna on August 17, 2017 at 4:38pm — 2 Comments

नज़र की हदों से .....

नज़र की हदों से .....

अग़र

तेरे बिम्ब ने

मेरे स्मृति पृष्ठ पर

दस्तक

न दी होती

मैं कब का

तेरी नज़र की

हदों से

दूर हो गया होता

शायद

रह गया था

कोई क्षण

अधूरी तृषा लिए

तृप्ति के

द्वार पर

अगर

तेरी तृषा के

स्पंदन ने

मेरी श्वासों को

न छुआ होता

सच

मैं कब का

तेरी नज़र की

हदों से

दूर हो गया होता

शायद

लिपटा था

कोई मूक निवेदन

अपनी…

Continue

Added by Sushil Sarna on August 13, 2017 at 9:17pm — 12 Comments

नज़र की हदों से .....

नज़र की हदों से .....

अग़र

तेरे बिम्ब ने

मेरे स्मृति पृष्ठ पर

दस्तक

न दी होती

मैं कब का

तेरी नज़र की

हदों से

दूर हो गया होता

शायद

रह गया था

कोई क्षण

अधूरी तृषा लिए

तृप्ति के

द्वार पर

अगर

तेरी तृषा के

स्पंदन ने

मेरी श्वासों को

न छुआ होता

सच

मैं कब का

तेरी नज़र की

हदों से

दूर हो गया होता

शायद

लिपटा था

कोई…

Continue

Added by Sushil Sarna on August 13, 2017 at 9:00pm — 2 Comments

ज़िंदगी...

ज़िंदगी...

ज़िंदगी का 

हासिल
है
मौत
क्या
मौत का
हासिल
है
ज़िंदगी ?

मौलिक एवं अप्रकाशित 

Added by Sushil Sarna on August 11, 2017 at 8:39pm — 6 Comments

क्षणिक सुख ...

क्षणिक सुख ...

कितने

दुखों से

भर दिया

बज़ुर्गों का दामन

वर्तमान के

क्षणिक सुख की

सोच ने

सैंकड़ों झुर्रियों में

छुपा दिया

बज़ुर्गों के सुख को

वर्तमान के

क्षणिक सुख की

सोच ने

मानवीय संवेदनाओं के

हर बंध अनुबंध

बिसरा डाले

वर्तमान के

क्षणिक सुख की

सोच ने

ममता की अनुभूति

जो भूले न

आज तक

उन्हें

कन्धों तक का

मोहताज़ बना दिया

वर्तमान के…

Continue

Added by Sushil Sarna on August 8, 2017 at 6:37pm — 6 Comments

शर्मीले लब ……….

शर्मीले लब ……….

ये मोहब्बत भी

अज़ब शै है ज़माने में

उम्र गुज़र जाती है

समझने

और समझाने में

हो जाती हैं

सांसें चोरी

खबर नहीं होती

नींद नहीं आती बरसों

उनके इक बार मुस्कुराने में

डूबे रहते हैं पहरों

इक दूजे के ख़्यालों में

गुज़र जाती शब्

इक दूजे से बतियाने में



राहे मोहब्बत में

जाने ये कैसे मुक़ाम आते हैं

दो ज़िस्म

इक जान हो जाते हैं

मैं और तुम के अहसास

कहीं फ़ना हो जाते हैं

मख़मली लम्हे…

Continue

Added by Sushil Sarna on August 5, 2017 at 3:39pm — 8 Comments

डुगडुगी बजती रही.......

डुगडुगी बजती रही.......

1.

गरजे घन घनघोर

प्रलय चहुँ ओर

तृण बहे

तन बहे

करके

सब को अशांत

फिर 

वृष्टि का तांडव

हो गया

शांत



2

बुझ गयी

कुछ क्षण जल कर

माचिस की तीली सी

जंग लड़ती

साँसों से

असहाय काया

अस्थि कलश में

सिमट गयी

मुट्ठी भर राख में

साँसों की

माया

3

तालियों के शोर

चिलचिलाती धूप

करतब दिखाती बच्ची

रस्सी से गिर पड़ी

साँसों से संघर्ष…

Continue

Added by Sushil Sarna on August 4, 2017 at 5:26pm — 4 Comments

Monthly Archives

2026

2025

2024

2023

2022

2021

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

जगदानन्द झा 'मनु' added a discussion to the group मैथिली साहित्य
Thumbnail

गजल

हाथमे हाथ लेने सगरो चलब हमआब तोहर बिना पल भरि नहि जियब हमहो सुखद की कतेको अन्हार जीबनबनि क छाहैर…See More
10 hours ago
Shyam Narain Verma commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"नमस्ते जी, बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर"
Thursday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Aug 3

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Aug 3
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service