For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Abhinav Arun's Blog – November 2010 Archive (6)

ग़ज़ल:-हूरों की तस्वीरें

ग़ज़ल

होटल वाली खीरें अच्छी लगती हैं

हूरों की तस्वीरें अच्छी लगती हैं |



अपने घर के गमले सारे सूखे हैं

औरों की जागीरें अच्छी लगती हैं|



शहरों में है लिपे पुते चेहरों की भींड

गावों वाली हीरें अच्छी लगती हैं |



मुझे बनावट वाले ढेरों रिश्तों से

यादों की जंजीरें अच्छी लगती हैं |



अपनी खुशियों में अब कम खुश होते लोग

पड़ोसियों की पीरें अच्छी लगती हैं… Continue

Added by Abhinav Arun on November 30, 2010 at 3:00pm — 4 Comments

ग़ज़ल:- आज़ादी की बस इतनी परिभाषा

ग़ज़ल:- आज़ादी की बस इतनी परिभाषा



पोर पोर पर प्रकृति ने फेंका पासा देख

क्यों उदास है तू बसंत की भाषा देख |





श्रमजीवी कलमें कहतीं रूमानी शेर

कैसी उभरी अंतस की अभिलाषा देख |





युग के विश्वामित्र ने फिर छेड़ी है रार

फिर त्रिशंकु की टूट रही है आशा देख |





ठूंठ भरी इस राह में रोड़े और छाले

इस पथ जाता कौन पथिक रुआंसा देख |





भूख ग़रीबी महंगाई और भ्रष्टाचार

आजादी की… Continue

Added by Abhinav Arun on November 15, 2010 at 3:25pm — 3 Comments

ग़ज़ल :- आग पानी है



ग़ज़ल :- आग पानी है



मुफलिसी में अब कहाँ है ज़िंदगी

आग पानी है धुआं है ज़िंदगी |





गिरते पड़ते भागते फिरते सभी

यूं लगे अँधा कुआं है ज़िंदगी |





हम जड़ों से दूर गुलदस्ते में हैं

गाँव का खाली मकां है ज़िंदगी |





अब तो हर एहसास की कीमत है तय

कारोबारी हम दुकाँ है ज़िंदगी



एक फक्कड़ की मलंगी देखकर

हमने जाना की कहाँ है ज़िंदगी |





हर… Continue

Added by Abhinav Arun on November 15, 2010 at 2:57pm — 4 Comments

ग़ज़ल- स्कूल की घंटी

ग़ज़ल

ज़मीर इसका कभी का मर गया है

न जाने कौन है किसपर गया है |



दीवारें घर के भीतर बन गयीं हैं

सियासतदाँ सियासत कर गया है |



तरक्की का नया नारा न दो अब

खिलौनों से मेरा मन भर गया है |



कोई स्कूल की घंटी बजा दे

ये बच्चा बंदिशों से डर गया है |



बहुत है क्रूर अपसंस्कृति का रावण

हमारे मन की सीता हर गया है |



शहर से आयी है बेटे की चिट्ठी

कलेजा माँ का फिर… Continue

Added by Abhinav Arun on November 12, 2010 at 10:43pm — 10 Comments

ग़ज़ल-पुराने दौर का कुर्ता

ग़ज़ल



किताबें मानता हूँ रट गया है

वो बच्चा ज़िंदगी से कट गया है|



है दहशत मुद्दतों से हमपर तारी

तमाशे को दिखाकर नट गया है |



धुंधलके में चला बाज़ार को मैं

फटा एक नोट मेरा सट गया है |



चलन उपहार का बढ़ना है अच्छा

मगर जो स्नेह था वो घट गया है |



पुराने दौर का कुर्ता है मेरा

मेरा कद छोटा उसमे अट गया है |



राजनीति में सेवा सादगी का

फलसफा रास्ते से हट… Continue

Added by Abhinav Arun on November 12, 2010 at 10:30pm — 6 Comments

ग़ज़ल :-आग नहीं कुछ पानी भी दो



ग़ज़ल



आग नहीं कुछ पानी भी दो

परियों की कहानी भी दो |



छोटे होते रिश्ते नाते

मुझको आजी नानी भी दो |



दूह रहे हो सांझ-सवेरे

गाय को भूसा सानी भी दो |



कंकड पत्थर से जलती है

धरा को चूनर धानी भी दो |



रोजी रोटी की दो शिक्षा

पर कबिरा की बानी भी दो |



हाट में बिकता प्रेम दिया है

एक मीरा दीवानी भी दो |



जाति धर्म का बंधन छोडो

कुछ रिश्ते इंसानी… Continue

Added by Abhinav Arun on November 3, 2010 at 10:00am — 8 Comments

Monthly Archives

2014

2013

2012

2011

2010

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Friday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"आदरणीय  अशोक रक्ताले जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय…"
Thursday
Ashok Kumar Raktale commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"चुप रहिए...  वाह  क्या रदीफ़ है, इसे देखकर ही मैं हाज़िर हो गया.  रहना हो भारत में…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"अभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।.....सच है अभिनय जीवन की…"
Jul 5
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

बरसात

बरसात घन गरजे अंधियारी छाई,बिजली अम्बर पर इठलाई  बूँदें टपकी टप-टप भाईरिमझिम रिमझिम बारिश आई पत्ते…See More
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"Dear respected Admin team: A few minutes ago, I typed my suggestion, but lost it all before it was…"
Jul 5
vijay nikore replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"..."
Jul 5
Chetan Prakash replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"  आदरणीय,  तकनीकी दृष्टिकोण से मैं कुछ  अधिक नहीं कह सकता । किन्तु यदि हमारा …"
Jun 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service