For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Featured Blog Posts – November 2011 Archive (7)


सदस्य टीम प्रबंधन
एक गज़ल

भूख की चौखट पे आकर कुछ निवाले रह गए

फिर से अंधियारे की ज़द में कुछ उजाले रह गए

 

आपकी ताक़त का अंदाजा इसी से लग गया

इस दफे भी आप ही कुर्सी संभाले रह गए

 

लाख कोशिश की मगर फिर भी छुपा ना पाए तुम

चंद घेरे आँख के नीचे जो काले रह गए

 

जब से मंजिल पाई है होता नहीं है दर्द भी

देते हैं आनंद जो पाओं में छाले रह गए                                    

 

जम गए आंसू, चुका आक्रोश, सिसकी दब गई

इस पुराने घर में बस…

Continue

Added by Rana Pratap Singh on November 27, 2011 at 11:30pm — 16 Comments

मैने सहस्त्रो आमन्त्रण भेजे तुम्हे

 

 

 

मैने सहस्त्रो आमन्त्रण भेजे तुम्हे

आखिर कब आओगे ?



पिछली बारिश में , भीगते हुए राह देखता रहा

बारिस आई और गई , और मन तरसता रहा

रातभर झींगुरों के ताने और कीटो की चिकोटी

अपने दिल को तुम्हारा…
Continue

Added by AK Rajput on November 27, 2011 at 9:30am — 5 Comments

इलाहाबाद : काव्य गोष्ठी

इलाहाबाद : काव्य गोष्ठी

स्थान - चंद्रशेखर आजाद पार्क, इलाहाबाद

दिनांक - २६-११-११

समय - २ बजे से ५ बजे



राणा प्रताप काव्य पाठ करते हुए

 

 …

Continue

Added by वीनस केसरी on November 26, 2011 at 11:37pm — 5 Comments

महाकवि‍ जानकी वल्‍लभ शास्‍त्री की याद

महाकवि‍ जानकी वल्‍लभ शास्‍त्री की याद 

संस्‍मरण 0 श्‍याम बि‍हारी श्‍यामल…



Continue

Added by Shyam Bihari Shyamal on November 26, 2011 at 6:30am — 4 Comments

हे चित्रकार !

मिलन की ओस से निखरा ये गुलाबी चेहरा

आखिरी लम्हों की कुछ भर दो सफेदी इनमे…

Continue

Added by Arun Sri on November 23, 2011 at 1:30pm — 3 Comments

ग़ज़ल - ऐसे झूटे' ख्वाबों के............

बस क़दमों की आहट आये' आने का' इमकान कहाँ,

ऐसे झूटे' ख्वाबों के सच होने का' इमकान कहाँ।



उम्मीदों के' बागीचे का' पत्ता पत्ता बिखर गया,

इस गुलशन में' फूलों के' फिर खिलने का' इमकान कहाँ।



दाना खाने' के चक्कर में' पंछी जो' उस पार गये,

खा पीकर भी वापिस उनके' आने का' इमकान कहाँ।



हाँ दौलत के' ढेर नहीं ये' माना माँ के आँचल में,

पर' दो वक्ता रोज़ी के ना' मिलने का' इमकान कहाँ।



डगमग होके' गोते खाए रूहें बाबा अम्मा की,

टूटी नय्या' पर…

Continue

Added by इमरान खान on November 21, 2011 at 11:00am — 4 Comments

अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद

 

अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद

 

दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेगें

आज़ाद ही रहे हैं आज़ाद ही रहेगें

 

अमर शहीद चंद्रशेखर आज़ाद को उपरोक्त पंक्तियां अत्यंत प्रिय थी। इन्हे वह अनेक बार गुनगुनाया भी करते थे। चंद्रशेखर आज़ाद ने 27 फरवरी 1931 को ‘हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन’ के कंमाडर इन चीफ की हैसियत से इलाहबाद के अलेफ्रेड…

Continue

Added by prabhat kumar roy on November 10, 2011 at 8:00am — 3 Comments

Featured Monthly Archives

2020

2019

2018

2017

2016

2015

2014

2013

2012

2011

2010

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"//दिल का है टूटने का ग़म 'नाहक'     था सलामत मुआहिदा कोई//    इस…"
7 minutes ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"आदरणीय दण्डपाणि नाहक़ जी आदाब, देरी से प्रतिक्रिया देने की कुछ वजूहात रही होंगी मैं समझ सकता…"
28 minutes ago
dandpani nahak commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"आदरणीय नीलेश जी मैं बहुत शर्मिंदा हूँ और मुआफ़ी चाहता हूँ इस देरी के लिए  आपका बहुत बहुत…"
1 hour ago
dandpani nahak commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर ' जी नमस्ते  मुआफ़ी चाहता हूँ देरी से आने के…"
1 hour ago
dandpani nahak commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"आदरणीय रूपम kumar 'मीत ' जी नमस्ते मैं देरी से हाजिर होने के लिए मुआफ़ी चाहता…"
2 hours ago
dandpani nahak commented on dandpani nahak's blog post ग़ज़ल 2122 1212 22
"आदरणीय अमीरुद्दीन  'अमीर ' साहब आदाब बहुत मुआफ़ी चाहता हूँ इस देरी के लिए ! आदरणीय…"
2 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (ज़िन्दगी भर हादसे दर हादसे होते रहे...)
"आदरणीय जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और दाद के लिये…"
2 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post नहीं दो चार लगता है बहुत सारे बनाएगा.( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"उस्ताद-ए -मुहतरम समर कबीर साहिब आदाब ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हार्दिक आभार। ग़ज़ल पर इस्लाह…"
5 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post नहीं दो चार लगता है बहुत सारे बनाएगा.( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय अमीरूद्दीन 'अमीर' साहिब आदाब ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हार्दिक आभार। ग़ज़ल पर…"
5 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post नहीं दो चार लगता है बहुत सारे बनाएगा.( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय भाई लक्मण धामी जी ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हार्दिक आभार।"
5 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post नहीं दो चार लगता है बहुत सारे बनाएगा.( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"प्रिय रूपम ग़ज़ल पर आपकी आमद और सराहना के लिए हार्दिक आभार। बालक शाइरी को विज्ञान से जोड़ना ठीक नहीं।…"
5 hours ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

फूल काँटों में खिला है- ग़ज़ल

२१२२ २१२२ फूल काँटों में खिला है, प्यार में सब कुछ मिला है.  है न कुछ परिमाप गम का, गाँव है, कोई…See More
11 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service