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Deepak Sharma Kuluvi's Blog (122)

तू अकेला है (दीपक शर्मा कुल्लुवी)

तू अकेला है


किस किस की खातिर तू रोता रहेगा
दिल में…
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Added by Deepak Sharma Kuluvi on March 25, 2011 at 3:30pm — 2 Comments

ग़ज़ल ( बार बार ) दीपक शर्मा 'कुल्लुवी'

ग़ज़ल ( बार बार ) दीपक शर्मा 'कुल्लुवी'

हमनें तो ख्वाव के सहारा पे घर बनाया था

बूटा काँटों का अपनें हाथों से लगाया था…

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Added by Deepak Sharma Kuluvi on March 24, 2011 at 1:15pm — 2 Comments

आखरी पन्नें -12



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Added by Deepak Sharma Kuluvi on January 11, 2011 at 11:00am — No Comments

आखरी पन्ने -10 (दीपक शर्मा 'कुल्लुवी')

आखरी पन्ने - 10



 

(दीपक शर्मा 'कुल्लुवी')



गतांक - 10 से आगे...



दोस्तों मैं जाते हुए साल 2010 कि बिदाई और आते हुए नव वर्ष 2011 का स्वागत अपनें कुछ भजनों से करना चाहूँगा . खुदा आप सबको ढेर खुशियाँ प्रदान करे वैसे इसी सप्ताह उड़ीसा के मंदिर में घटित शर्मनाक घटना से मन अत्यंत दुखी है जिसमें एक विदेशी महिला को केवल इस बात के लिए मंदिर से…

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Added by Deepak Sharma Kuluvi on December 31, 2010 at 4:00pm — No Comments

आखरी पन्ने -8



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Added by Deepak Sharma Kuluvi on December 18, 2010 at 4:00pm — 1 Comment

गतांक - 6 से आगे आखरी पन्ने -7

 



गतांक - 6 से आगे…
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Added by Deepak Sharma Kuluvi on December 16, 2010 at 12:30pm — 2 Comments

आखरी पन्ने -6 (दीपक शर्मा कुल्लुवी)

गतांक - 5 से आगे


आखरी पन्ने -6
(दीपक शर्मा 'कुल्लुवी')


भुलाया न गया
लाख चाहा तेरी यादों को भुलाया न गया
आप भी लौट के आये न हमसे जाया गया
दूरियां दिल की नहीं तेरी मेरी जिद्द की थी
फासला…
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Added by Deepak Sharma Kuluvi on December 15, 2010 at 5:00pm — 2 Comments

आखरी पन्नें-5 दीपक शर्मा कुल्लुवी

गतांक 4 से आगे
आखरी पन्नें-5 दीपक शर्मा कुल्लुवी
कुछ तो पल जी लेने दे
सपनों में आना छोड़कर
रह जाएंगी बाद तन्हा
यह तनहाइयाँ मेरी
इंसान अपने स्कूल कॉलिज में बिताए पल कभी नहीं भूलता वोह मस्तियाँ ,शरारतें,घूमना ,फिरना, यह वोह समय होता है जब वोह खुद को शहंशाह समझता है कई सपनें संजोता है यह वोह रंगीन पल होते हैं जिन्हें वोह उम्र भर याद करता है इससे अच्छा समय फिर ज़िन्दगी में कभी नहीं आता वोह बेफिक्री,लापरवाही फिर कहाँ नसीब…
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Added by Deepak Sharma Kuluvi on December 14, 2010 at 1:29pm — 1 Comment

आखरी पन्नें-4 दीपक शर्मा' कुल्लुवी'





गतांक से आगे
आखरी पन्नें-4 दीपक शर्मा कुल्लुवी
कितना बदल गया



मेरा शहर कितना बदल गया

मेरे वास्ते अब क्या रहा

मेरा शहर कितना बदल -----

न वोह मंजिलें न वोह रास्ते

जो कभी थे मेरे…
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Added by Deepak Sharma Kuluvi on December 10, 2010 at 3:00pm — 1 Comment

आखरी पन्नें (2) दीपक शर्मा 'कुल्लुवी '

आखरी पन्नें (2) दीपक शर्मा 'कुल्लुवी '



न देख ख्वाब यह साक़ी की कोई थाम लेगा तुझको

संभले हुए दिल तेरी महफ़िल में नहीं आते.........



ज़िन्दगी में इंसान बहुत कुछ जीतता है और बहुत कुछ हार जाता है लेकिन हार कभी नहीं माननी चाहिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए कभी तो मंजिल मिलेगी मंजिल कभी न भी मिले तो कम से कम उसके करीब तो पहुँच जाओगे









कमीं रह गयी



ज़िन्दगी में तुम्हारी कमीं रह गयी

अपनीं… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on December 7, 2010 at 3:25pm — 3 Comments

आखरी पन्नें (१) दीपक शर्मा 'कुल्लुवी '

आखरी पन्नें (१) दीपक शर्मा 'कुल्लुवी '



इन आखरी पन्नों में ज़िन्दगी का दर्द है

कुछ हमनें झेला है कुछ आप बाँट लेना

मेरे क़त्ल-ओ-गम में शामिल हैं कई नाम

ज़िक्र आपका आए न बस इतनी दुआ करना

.......

आखरी पन्नें मेरी ज़िंदगी की अंतिम किताब,अंतिम रचना,आखरी पैगाम कुछ भी हो सकता है हो सकता है यह केवल एक ही पन्नें में ख़त्म हो जाए य सैंकड़ों हजारों और पन्ने इसमें और जुड़ जाएँ क्योंकि कल किसनें देखा है खुदा ने मेरे लिए भी कोई न… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on December 7, 2010 at 11:55am — 2 Comments

आखरी पन्नें

आखरी पन्नें



ज़िंदगी अपनी यादों की इक खुली किताब है

समेटे हुए हैं जिसमें हम अपने आस पास का दर्द

इसको खोलने से पहले बस इतना ख्याल रखना

आपके अश्क ढल न जाएँ दर्द मेरा देखकर



आखरी पन्नें मेरी ज़िंदगी की अंतिम किताब,अंतिम रचना,आखरी पैगाम कुछ भी हो सकता है

क्योंकि कल किसनें देखा है खुदा ने मेरे लिए भी कोई न कोई दिन तो एसा निश्चित किया होगा जिसका कल कभी न आयेगा मैं एक लेखक हूँ जिसे हर रोज़ कुछ न कुछ नया लिखने की चाह रहती है ,प्यास रहती है और मैं कुछ न कुछ लिखता… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on December 6, 2010 at 7:35pm — No Comments

रिश्ता-ए-ग़म

रिश्ता-ए-गम

ग़म तो ग़म हैं ग़म का क्या ग़म आते जाते हैं

किसी को देते तन्हाई किसी को रुलाते हैं

'दीपक कुल्लुवी' पत्थर दिल है लोग यह कहते हैं

उसको तो यह ग़म भी अक्सर रास आ जाते हैं

किसने देखा उसको रोते किसने झाँका दिल में

किसने पूछा क्यों कर यह ग़म तुझको भाते हैं

कुछ तो बात होगी इस ग़म में कुछ तो होगा ज़रूर

बेवफा न होते यह साथ साथ ही आते हैं

गम से रिश्ता रखो यारो ताउम्र देंगे साथ

यह आखरी लम्हात तक रिश्ता… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on December 4, 2010 at 10:00am — No Comments

काहे

नसबंदी कैम्प में आये

एक आगन्तुक को देख

डाक्टर साहब झल्लाए

उत्सुकता से चिल्लाये

और उससे पूछने लगे

भैया जहाँ तक मुझे याद है

तुम तो पिछले वर्ष भी कैम्प में आये थे

और हमसे ही अपना नसबंदी आपरेशन करवाए थे

आगन्तुक बोला डाक्टर साहब आपने ठीक फ़रमाया

मैं तो पिछले वर्ष भी आया था

और आपसे ही आपरेशन करवाया था

बदले में प्रोत्साहन राशी १५० रुपये भी पाया था

लेकिन इस बार आप प्रोत्साहन राशि काहे बढ़ाये

१५०… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on November 30, 2010 at 10:30am — No Comments

राखी का इन्साफ

वाह री राखी सावंत

कर दिया तूने तंग

ऐसे चिल्लाती हो जैसे

लड़ रही हो जंग

सच बतलाएं मज़ा न आया

बेशक तूने नाम कमाया

देख तिहारी नौटंकी

हुई जाए अखियाँ बंद

नारी हो कुछ शर्म करो

कुदरत के कहर से डरो

इतना चीखना चिल्लाना

एक मर्द को नामर्द बतलाना

कहाँ से इतना ज्ञान पा लिया

हम देख के रह गए दंग

खुद भड़कीले वस्त्र धारणी

उंगली उठाती दूजों पर

राखी के इन्साफ में दिखता

केवल अश्लीलता का रंग



दीपक शर्मा… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on November 19, 2010 at 3:00pm — 1 Comment

छोटी सी भूल (रैगिंग)

छोटी सी भूल (रैगिंग)



'अमन' को आज इन्साफ मिला

हम फिर भी हैं शर्मसार

मेरे हिमाचल के बच्चों ने

ली थी उसकी जान

एक छोटी सी गलती ने

कारागार पहुँचाया

खुद भी हुए कलंकित

हिमाचल को कलंक लगाया

में लेखक हूँ ,मुझको है

अफ़सोस इस घटना पर

विनती है हर नौजवान से

ऐसे कृत्यों से डर

ऐसे कुकर्म से डर



दीपक शर्मा कुल्लुवी

०९१३६२११४८६

११-१०-२०१०.



खबर : मेरी जन्म भूमि काँगड़ा के मेडिकल कालेज टांडा(काँगड़ा)… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on November 12, 2010 at 1:15pm — 5 Comments

ऐसा हो नहीं सकता

ऐसा हो नहीं सकता



मेरी राख़ को दुनियां वालो

गंगा में ना बहाना

प्रदूषित हो चुकी बहुत

और उसे ना बढ़ाना

करम अगर होंगे अच्छे

तो मिल जाएगी मुक्ति

गंगा जी में बहाने से ही

मुक्ति नहीं मिल सकती

यह है सब बेकार की बातें

ऐसा हो नहीं सकता

किसी के कुकर्मों का अंत

इतना सुखद नहीं हो सकता

गर ऐसा हो जाता

तो हार कोई पापी तर जाता

पाप करने से यहाँ

कोई ना घबराता

कोई ना घबरा----



दीपक शर्मा… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on October 28, 2010 at 5:30pm — 2 Comments

दूर पहाड़ों से आया

मैं दूर पहाड़ों से आया



मैं दूर पहाड़ों से आया

जहाँ सर्द हवाएं बहती हैं

है व्यास पार्वती का संगम

जहाँ यादें मेरी बसती हैं

मेरे अपनें सभी वहीँ हैं

लेकिन मैं हूँ सबसे दूर

यह था किस्मत का लिखा

नहीं किसी का कसूर

ना जानें कब जा पाऊंगा

बापिस उन खूबसूरत फिजाओं में

कोई याद तो करता होगा

मुझको मेरे गाँव में

'दीपक शर्मा' था उस वक़्त मैं

अब हूं 'दीपक कुल्लुवी'

शक्ल-ओ-सूरत बदली,तखल्लुस बदला

लेकिन सीरत ना बदली

लेकिन… Continue

Added by Deepak Sharma Kuluvi on October 27, 2010 at 11:00am — 3 Comments

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