For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Abhinav Arun's Blog – January 2014 Archive (2)

ग़ज़ल - सच को अपनाने का जब ऐलान किया !

ग़ज़ल –

फैलुन फैलुन फैलुन फैलुन फैलुन फा

२२ २२ २२ २२ २२ २



सच को अपनाने का जब ऐलान किया ,

सबने मुझ पर बाणों का संधान किया |



जागो रण में नींदें भारी पड़ती हैं ,

अभिमन्यू ने प्राणों का बलिदान किया |



आंसू की दो बूँदें टपकी पन्नो पर ,

मैंने अपने किस्से का उन्वान किया |



सोने की अपनी अपनी लंकाएं गढ़ ,

हमने ख़ुद में रावण को मेहमान किया |



देश निकाला देकर सारे पेड़ों को ,

हमने अपने शहरों को वीरान किया |



भूख… Continue

Added by Abhinav Arun on January 6, 2014 at 7:47pm — 33 Comments

ग़ज़ल - माँ जो होती है तो घर लगता है ! (अभिनव अरुण)

ग़ज़ल

फाइलातुन फइलातुन फैलुन \ फइलुन

२१२२ ११२२ २२ \ ११२



वर्ना अन्जान शहर लगता है

माँ जो होती है तो घर लगता है |



दौर कैसा है नई नस्लों का,

वक़्त से पहले ही पर लगता है |



है इधर रंग बदलती दुनिया,

मैं चला जाऊं उधर लगता है |



जाने किस दर्द से गुज़रा होगा ,

शेर जज़्बात से तर लगता है |



इस ऊंचाई से न देखो मुझको ,

दूर से सौ भी सिफर लगता है |



इन चटख फूलों में मकरंद नहीं ,

ये दवाओं का असर लगता है |…

Continue

Added by Abhinav Arun on January 2, 2014 at 4:30pm — 40 Comments

Monthly Archives

2014

2013

2012

2011

2010

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

सतविन्द्र कुमार राणा posted a blog post

नहीं अच्छा है यूँ मजबूर होना- ग़ज़ल

1222 1222 122 नहीं अच्छा है यूँ मजबूर होना दिखें हैं साथ लेकिन दूर होना।कली का कुछ समय को ठीक है,…See More
3 hours ago
सतविन्द्र कुमार राणा commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल-लालफीताशाही-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"उत्तम अति उत्तम!"
4 hours ago
surender insan posted a blog post

"जब तुम्हारें शह्र में आना हुआ"

2122 2122 212किस कदर था इश्क़ में डूबा हुआ।वो जो सूली चढ़ गया हँसता हुआ।।जब किसी को इश्क़ में धोखा…See More
4 hours ago
Samar kabeer commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post मातृभाषा हिन्दी
""दृढ़ संकल्प सौंह ले मन में,हम अधिकार दिलाएंगे" उचित लगे तो यूँ कर लें ।"
7 hours ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल
"आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय बसंत शर्मा जी।"
8 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकाएं —डॉo विजय शंकर
"आदरणीय विजय निकोर जी , बहुत अच्छा लगा रचना पर आपकी उपस्तिति से, आपकी उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिए…"
8 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकाएं —डॉo विजय शंकर
"आदरणीय समर कबीर साहब , नमस्कार , आपकी सादर उपस्थिति एवं उत्साहवर्धक टिप्पणी के लिए ह्रदय से आभार।…"
8 hours ago
Dr. Vijai Shanker commented on Usha's blog post मेरे सवाल ... अतुकांत कविता
"आदरणीय सुश्री उषा जी , सुन्दर एवं आकर्षक प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई , सादर।"
9 hours ago
TEJ VEER SINGH posted a blog post

नज़रिया - लघुकथा ---

नज़रिया - लघुकथा ---अमर अपने सहपाठी के साथ घर से लगे लॉन में क्रिकेट खेल रहा था। उसके मित्र को प्यास…See More
10 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on Manan Kumar singh's blog post गजल
"आदरणीय मनन कुमार सिंह जी सादर नमस्कार बधाई हो आपको बढ़िया ग़ज़ल की"
20 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नए ख्वाब दिखाने वाला - ग़ज़ल
"आदरणीय समर कबीर जी सादर नमस्कार, आपकी ग़ज़ल पर उपस्थिति से मन प्रसन्न हुआ। सादर नमन आपको इसी तरह…"
20 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post नए ख्वाब दिखाने वाला - ग़ज़ल
"आदरणीय लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी सादर नमस्कार आपकी हौसलाफजाई को सादर नमन"
20 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service