For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

दिया जला के उसी सम्त फिर हवा न करे (-रूपम कुमार 'मीत')

बह्र:- 1212 1122 1212 112

दिया जला के उसी सम्त फिर हवा न करे
किया है जो मेरे दुश्मन ने वो सगा न करे [1]

उसे है इल्म बिछड़ने से लोग टूटते हैं
तभी वो मोतियों को डोर से जुदा न करे [2]

बुज़ुर्ग हो गया हूँ ज़िंदगी से इसलिए भी
वो देख भाल करे पर मेरी दवा न करे [3]

नहीं है ख़ौफ़ समंदर में डूबने का मुझे
मगर यूँ क़र्ज़ में मरना पड़े ख़ुदा न करे [4]

मुहाल है ज़मीं से आसमान तक का सफ़र
बुलंदियों पे यूँ जा कर कोई गिरा न करे [5]

मैं झूटी ज़िंदगी से अब नजात चाहता हूँ
तवील उम्र की मेरी कोई दुआ न करे [6]

ख़ुदा क़ुबूल करे आख़री दुआ ये मेरी
वो मेरे बा'द किसी और का बुरा न करे [7]

हमें भी हक़ है यहाँ सर उठा के जीने का
ज़माना तल्ख़-बयानी से तब्सिरा न करे [8]

तुम्हारी ज़ुल्फ़ तो बिखरेंगी उंगलियों से मेरी
बस इसका ध्यान रहे ये कहीं हवा न करे [9]

मैं अपने दिल से तेरा दिल निकाल फेंकूँगा
मैं वो नहीं हूँ जो वा'दा करे वफ़ा न करे [10]

ये भाग दौड़ भरा शहर है ज़रा ठहरो
किसी के वास्ते कोई यहाँ रुका न करे [11]

मुक़ाम-ए-फ़ख़्र पे लब से ये बद-दुआ निकली
हमारे साथ ज़माना चले ख़ुदा न करे [12]

"मौलिक व अप्रकाशित"

-रूपम कुमार 'मीत'

Views: 220

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on March 8, 2021 at 10:12pm

जनाब रूपम कुमार 'मीत' जी आदाब, बहुत अच्छी ग़ज़ल कही है आपने मुबारकबाद पेश करता हूँ। एक अदना कोशिश की है, देखियेेगा। 

दिया जला के उसी सम्त फिर हवा न करे

रक़ीब  मेरा  भला  कैसे  ये  दग़ा  न  करे      सादर। 

Comment by सालिक गणवीर on March 8, 2021 at 6:48pm

प्रिय  Rupam kumar -'मीत
सादर अभिवादन
एक बहतरीन ग़ज़ल के लिए बधाइयाँ स्वीकार करें,जैसा कि कबीर साहब ने कहा या तो जुल्फें कर लो या बिखरेगी कर लो,खुश रहो और यूँ ही लिखते रहो.

Comment by Rupam kumar -'मीत' on March 6, 2021 at 9:24pm
आदरणीय समर कबीर साहिब, मैं और प्रयास करता हूँ, दिल से शुक्रिया
Comment by Samar kabeer on March 6, 2021 at 7:38pm

'लगा के आग मेरे घर को फिर हवा न करे

किया है जो मेरे दुश्मन ने वो सगा न करे'

मुझे इनमें भी रब्त नहीं लगता ।

Comment by Rupam kumar -'मीत' on March 6, 2021 at 2:54pm

आदरणीय समर कबीर साहिब दंडवत प्रणाम, मत्ला यूँ कहे तो

लगा के आग मेरे घर को फिर हवा न करे

किया है जो मेरे दुश्मन ने वो सगा न करे

मार्गदर्शन कीजिए साहिब,,

Comment by Rupam kumar -'मीत' on March 6, 2021 at 2:52pm

आ, लक्ष्मण धामी साहिब प्रणाम, ग़ज़ल पर आपकी आमद और हौसला अफ़ज़ाई का बहुत शुक्रिया साहिब।

Comment by Rupam kumar -'मीत' on March 6, 2021 at 2:49pm

आदरणीय नीलेश जी, बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on March 6, 2021 at 12:05pm

आ. भाई रूपम जी, अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई ।

Comment by निलेश बरई (नवाज़िश) on March 6, 2021 at 10:08am

आदरणीय रूपम साहब,बहुत ही उम्दः ग़ज़ल कही है आपने  बधाई स्वीकार करें इस ग़ज़ल के लिए ..

Comment by Rupam kumar -'मीत' on March 5, 2021 at 12:18pm

आदरणीया अमिता तिवारी जी,, बहुत शुक्रिया आपका ग़ज़ल तक आई, और बालक का हौसला बढ़ाया।। आपका दिन शुभ हो। प्रणाम।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post अगर हक़ माँगते अपना कृषक, मजदूर खट्टे हैं (ग़ज़ल)
"हौसला अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया जनाब अमीर साहब, निवेदन है कि कवि का काम ही पुराने अर्थों को…"
5 hours ago
Samar kabeer replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"बहुत शुक्रिय:,जनाब । मुझे भी ओबीओ के बग़ैर चैन नहीं मिलेगा, ओबीओ के तरही मुशाइर: में शिर्कत की भरपूर…"
8 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post मन पर दोहे ...........
"आदरणीय अमीरुद्दीन साहिब, आदाब - - - सृजन आपकी मनोहारी प्रशंसा का दिल से आभारी है ।"
11 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post मन पर दोहे ...........
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार । आप सही ✅ हैं सर । मैं अभी संशोधित…"
11 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on Sushil Sarna's blog post मन पर दोहे ...........
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, मन पर अच्छे दोहे हुए हैं, बधाई स्वीकार करें।  हालांकि मैं इस विधा का…"
12 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post मन पर दोहे ...........
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवाद । मन के दोहे अच्छे हुए हैं । हार्दिक बधाई । पाँचवे दोहे की तुकांतता…"
13 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post कोरोना को हराना है।
"जनाब सुशील सरना जी आदाब, रचना पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक आभार। सादर।"
13 hours ago

प्रधान संपादक
योगराज प्रभाकर replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
"आ० समर कबीर साहिब, आदाब! आपकी अनुपस्थिति में यह मंच सूना-सूना सा लगेगा. लेकिन मज़हबी ज़िम्मेवारी हर…"
17 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

मन पर दोहे ...........

मन पर दोहे ...........मन माने तो भोर है, मन माने तो शाम ।मन के सारे खेल हैं, मन के सब संग्राम ।…See More
17 hours ago
Sushil Sarna commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post कोरोना को हराना है।
"वाह आदरणीय जी आज के संदर्भ में बेहतरीन प्रस्तुति । हार्दिक बधाई सर ।"
17 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post गरीबी ........
"आदरणीय  अमीरुद्दीन साहिब,  आदाब ---सृजन के भावों को मान देने का दिल से शुक्रिया । "
17 hours ago
Aazi Tamaam commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post कोरोना को हराना है।
"बात एकदम पते की है जनाब अमीर जी बेहद बस टोटके हैं......... ताली थाली नहीं बजाना है बेहद पसंद आया…"
19 hours ago

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service